देहरादून | 9 सितंबर 2026
🎓 मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून स्थित मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय के मुख्य सेवक सदन में आयोजित ‘ज्ञान गंगा सम्मान समारोह एवं छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम’ में शिक्षकों को सम्मानित किया और मेधावी छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति प्रदान की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को केवल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना पर्याप्त नहीं है। उनके व्यक्तित्व निर्माण के लिए संस्कार, अनुशासन, आत्मविश्वास और सकारात्मक मार्गदर्शन भी जरूरी है।
शिक्षक सिर्फ विद्यार्थी नहीं, राष्ट्र का भविष्य गढ़ते हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गुरु को हमेशा विशेष और सर्वोच्च स्थान मिला है। शिक्षक विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान देने के साथ-साथ उन्हें सही दृष्टि, आत्मविश्वास और जीवन-मूल्यों से भी जोड़ते हैं।
उन्होंने कहा कि एक शिक्षक की भूमिका केवल कक्षा तक सीमित नहीं रहती। वह विद्यार्थियों की प्रतिभा को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है और इस तरह पूरे राष्ट्र के भविष्य के निर्माण में योगदान करता है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षकों से अपील की कि वे बच्चों को ऐसी शिक्षा और संस्कार दें, जिससे वे बेहतर इंसान बनने के साथ जिम्मेदार नागरिक भी बन सकें।
‘ज्ञान गंगा’ कार्यक्रम को बताया प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने का प्रयास
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ज्ञान गंगा सम्मान समारोह महज सम्मान और छात्रवृत्ति देने तक सीमित कार्यक्रम नहीं है। इसका उद्देश्य प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को पहचान देना, शिक्षा को प्रोत्साहित करना और बच्चों को अपने सपनों की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर देना है।
उन्होंने कहा कि किसी बच्चे की पढ़ाई में सहयोग करना केवल आर्थिक मदद नहीं, बल्कि उसके सपनों को साकार करने की प्रक्रिया में सहभागी बनना है।
स्व. कुसुम कांता के योगदान को किया याद
मुख्यमंत्री ने स्व. श्रीमती कुसुम कांता को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके संगीत, साहित्य और शिक्षा के प्रति समर्पण को प्रेरणादायी बताया।
उन्होंने कहा कि उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए कुसुम कांता फाउंडेशन पिछले छह वर्षों से शिक्षा, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, डिजिटल साक्षरता और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहा है।
मुख्यमंत्री ने शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तीकरण, कौशल विकास, सामाजिक जागरूकता और जनकल्याण के क्षेत्र में मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के कार्यों की भी सराहना की।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति का भी किया उल्लेख
🇮🇳 मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राष्ट्रीय शिक्षा नीति के माध्यम से देश की शिक्षा व्यवस्था को आधुनिक, व्यावहारिक और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए गए हैं।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड राष्ट्रीय शिक्षा नीति को लागू करने वाले देश के अग्रणी राज्यों में रहा है। राज्य सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बेहतर करने के साथ-साथ शिक्षकों की भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी और निष्पक्ष बनाने पर भी विशेष ध्यान दे रही है।
अभिभावकों से बच्चों को समय देने की अपील
मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से कहा कि बच्चों को केवल सुविधाएं उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। उन्हें समय, अच्छे संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक मार्गदर्शन देना भी जरूरी है।
उन्होंने कहा कि बच्चे का बेहतर भविष्य बनाने में परिवार और विद्यालय दोनों की भूमिका होती है। आने वाली पीढ़ी के निर्माण में माता-पिता और शिक्षक मिलकर महत्वपूर्ण योगदान देते हैं।
विद्यार्थियों से बोले- बड़े सपने देखें और मेहनत से आगे बढ़ें
🎯 मुख्यमंत्री ने छात्र-छात्राओं से बड़े लक्ष्य निर्धारित करने और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत, अनुशासन तथा दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि जीवन में मिलने वाली असफलताओं से सीख लेकर लक्ष्य की ओर लगातार बढ़ते रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि विद्यार्थियों को आगे बढ़ने के लिए जरूरी अवसर और सहयोग उपलब्ध कराने में राज्य सरकार उनके साथ खड़ी है।
उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि वे भविष्य में शिक्षक, वैज्ञानिक, चिकित्सक, इंजीनियर, खिलाड़ी, उद्यमी, प्रशासनिक अधिकारी या किसी भी अन्य क्षेत्र में जाएं, लेकिन सबसे पहले अच्छे इंसान और जिम्मेदार नागरिक बनें।
मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि उत्तराखंड के विद्यार्थी अपने ज्ञान, प्रतिभा, मेहनत और अच्छे संस्कारों के बल पर प्रदेश और देश के निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देंगे।
डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने भी कुसुम कांता को किया याद
कार्यक्रम में पूर्व मुख्यमंत्री एवं पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने अपनी धर्मपत्नी स्व. श्रीमती कुसुम कांता का भावपूर्ण स्मरण किया।
उन्होंने कहा कि कुसुम कांता का शिक्षा, साहित्य, संगीत और समाज सेवा के प्रति विशेष अनुराग था। शिक्षिका के रूप में उन्होंने शिक्षा और संस्कारों को हमेशा महत्व दिया।
डॉ. निशंक ने कहा कि उनके जीवन-मूल्यों और सेवा भावना को आगे बढ़ाते हुए शिक्षा तथा समाजहित में किए जा रहे कार्य ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यक्ति के संपूर्ण व्यक्तित्व और राष्ट्र के भविष्य के निर्माण का आधार है। शिक्षकों की भूमिका विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ संस्कार, आत्मविश्वास और कर्तव्यबोध विकसित करने में महत्वपूर्ण है।
छात्रवृत्ति प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को शुभकामनाएं देते हुए डॉ. निशंक ने उनसे अपने ज्ञान और प्रतिभा का इस्तेमाल समाज एवं राष्ट्रहित में करने का आह्वान किया। उन्होंने कुसुम कांता फाउंडेशन और मंथन वेलफेयर एसोसिएशन के प्रयासों की भी सराहना की।
कार्यक्रम में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री श्री खजान दास, विधायक श्रीमती सविता कपूर, प्रो. सुधारानी पाण्डेय, कुसुम कांता फाउंडेशन की संस्थापक विदुषी निशंक, श्री आर्यन देव उनियाल सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।










