नई दिल्ली | 8 सितंबर 2026
🇮🇳🇨🇳 चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले भारत ने चीन के साथ आर्थिक रिश्तों से जुड़े अहम मुद्दों पर अपनी तैयारी तेज कर दी है। नई दिल्ली में 12-13 सितंबर को होने वाले 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान चीन के साथ हाई-टेक आयात, निवेश संबंधी बाधाओं और कस्टम्स से जुड़ी दिक्कतों पर बातचीत की संभावना है।
शी जिनपिंग की यात्रा 2019 के बाद उनकी पहली भारत यात्रा होगी। ऐसे में BRICS सम्मेलन के साथ होने वाली संभावित द्विपक्षीय बातचीत को भारत-चीन संबंधों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
🧩 चीन से हाई-टेक सामान की सप्लाई बना बड़ा मुद्दा
भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय ने चीन से जुड़े व्यापारिक मुद्दों पर उद्योग संगठनों से चर्चा शुरू की है। रिपोर्टों के मुताबिक भारत BRICS के दौरान चीनी पक्ष के सामने हाई-टेक उत्पादों के आयात में आ रही बाधाओं और चीनी कस्टम्स की प्रक्रियागत रुकावटों का मुद्दा उठा सकता है।
इन दिक्कतों का असर खासतौर पर उन भारतीय उद्योगों पर पड़ रहा है, जो चीन से महत्वपूर्ण तकनीक या कच्चे माल की आपूर्ति पर निर्भर हैं।
⚙️ रेयर-अर्थ मैग्नेट से बैटरी और सोलर टेक्नोलॉजी तक
भारत की चिंता केवल किसी एक उत्पाद तक सीमित नहीं है। रिपोर्टों में रेयर-अर्थ मैग्नेट, बैटरी सेल और उनकी तकनीक, सोलर इनगॉट व वेफर टेक्नोलॉजी तथा हाई वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) से जुड़े उपकरणों पर चीनी निर्यात प्रतिबंधों का उल्लेख किया गया है।
रेयर-अर्थ मैग्नेट खासतौर पर ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए महत्वपूर्ण हैं। इनकी आपूर्ति में देरी के कारण भारतीय वाहन कंपनियों को वैकल्पिक व्यवस्थाओं पर निर्भर रहना पड़ा है।
वहीं HVDC तकनीक लंबी दूरी तक बिजली पहुंचाने और नवीकरणीय ऊर्जा को ग्रिड से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
💰 चीन के निवेश पर भी भारत की नजर
BRICS बैठक के दौरान बातचीत का दूसरा महत्वपूर्ण पहलू निवेश हो सकता है। भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की कोशिशों के बीच निवेश से जुड़ी प्रक्रियाओं और प्रतिबंधों पर भी चर्चा की संभावना है।
भारत ने 2026 में चीन से जुड़े कुछ निवेश नियमों में सीमित स्तर पर बदलाव किए हैं। मार्च में किए गए बदलावों के तहत कुछ परिस्थितियों में सीमावर्ती देशों से आने वाले निवेश प्रस्तावों की प्रक्रिया को आसान किया गया, हालांकि रणनीतिक क्षेत्रों में सावधानी बरकरार है।
📈 कारोबार बढ़ा, लेकिन भारत का व्यापार घाटा भी बड़ा हुआ
भारत और चीन के बीच आर्थिक संबंधों की एक बड़ी चुनौती व्यापार असंतुलन है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक FY2026 में दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार $151.10 बिलियन तक पहुंच गया, जबकि इसी अवधि में चीन के साथ भारत का व्यापार घाटा $112.16 बिलियन रहा। चीन FY2026 में भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार भी बना।
इस व्यापार में चीन से इलेक्ट्रिकल मशीनरी, कंप्यूटर हार्डवेयर, सोलर सेल और कुछ महत्वपूर्ण फार्मास्युटिकल इनपुट का आयात प्रमुख रहा है। दूसरी ओर भारत का चीन को निर्यात भी बढ़ा है।
🤝 सीमा विवाद के बाद रिश्तों में धीरे-धीरे नरमी
भारत-चीन संबंधों में 2020 के बाद आई तल्खी के बीच पिछले कुछ समय में दोनों देशों के बीच संवाद बढ़ा है।
अगस्त के अंत में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन के विदेश मंत्री वांग यी के बीच सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता हुई थी। इसके बाद सीमा प्रश्न पर आगे की बातचीत को लेकर 8 बिंदुओं पर सहमति बनी।
इसके साथ ही दोनों देशों ने वीजा सेवाओं, सीधी उड़ानों और कैलाश मानसरोवर यात्रा जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
🌏 BRICS में पहली नजर मोदी-Xi मुलाकात पर
नई दिल्ली में होने वाला BRICS शिखर सम्मेलन इस साल इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समूह का विस्तार हो चुका है और इसमें अब 11 पूर्ण सदस्य हैं।
12-13 सितंबर को होने वाली बैठक में व्यापार, वित्त, तकनीक, ऊर्जा सुरक्षा, डिजिटल कारोबार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और वैश्विक वित्तीय संस्थाओं में सुधार जैसे विषयों पर चर्चा प्रस्तावित है।
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की स्थिति में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी संभावित बातचीत पर भी पूरी दुनिया की नजर रहेगी। यह मुलाकात 2019 के बाद दोनों नेताओं के बीच भारत में होने वाली पहली बैठक होगी।
🔍 भारत के सामने संतुलन साधने की चुनौती
भारत के लिए चीन के साथ आर्थिक रिश्तों को आगे बढ़ाना और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हितों की रक्षा करना दोनों महत्वपूर्ण हैं।
एक ओर भारतीय उद्योग को कई महत्वपूर्ण चीनी कंपोनेंट और तकनीकों की जरूरत है, तो दूसरी ओर भारत रणनीतिक क्षेत्रों में निर्भरता कम करने और घरेलू विनिर्माण क्षमता बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे में आगामी BRICS सम्मेलन भारत को चीन के साथ व्यापार, निवेश और तकनीकी आपूर्ति से जुड़े व्यावहारिक मुद्दों पर सीधे बातचीत का मंच दे सकता है। हालांकि इन मुद्दों पर अंतिम निर्णय या किसी समझौते की पुष्टि अभी नहीं हुई है।








