चेन्नई के फिल्म कॉन्क्लेव में छाया उत्तराखंड का आकर्षण, तमिल इंडस्ट्री ने शूटिंग में दिखाई दिलचस्पी

देहरादून | 9 सितंबर 2026

🎬 चेन्नई में आयोजित ‘इंडिया इंटरनेशनल फिल्म टूरिज्म कॉन्क्लेव-साउथ’ में उत्तराखंड की फिल्म नीति और शूटिंग लोकेशंस को प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया। आयोजन में तमिल फिल्म इंडस्ट्री के कई प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स ने उत्तराखंड में फिल्मांकन को लेकर रुचि दिखाई।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद ने राज्य में उपलब्ध शूटिंग सुविधाओं, सब्सिडी और सिंगल विंडो व्यवस्था की जानकारी फिल्म जगत के प्रतिनिधियों के साथ साझा की।

🌄 फिल्ममेकर्स के सामने रखी उत्तराखंड की खूबियां

चेन्नई में मंगलवार को हुए कॉन्क्लेव में देश-विदेश के फिल्ममेकर्स, प्रोड्यूसर्स और विभिन्न फिल्म कमीशन के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। इस दौरान उत्तराखंड की प्राकृतिक खूबसूरती, अलग-अलग भौगोलिक परिस्थितियों और सांस्कृतिक विरासत को फिल्म निर्माण के लिए अनुकूल बताया गया।

प्रसार भारती वेव्स ओटीटी, उत्तराखंड एफडीसी और महाराष्ट्र एफएससीडीसी समेत विभिन्न प्रदर्शकों ने भी कार्यक्रम में भाग लिया। ट्यूनीशिया, इटली, थाईलैंड, रोमानिया, हंगरी, सर्बिया और अजरबैजान के प्रतिनिधि भी कॉन्क्लेव में शामिल हुए।

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने राज्य की फिल्म नीति और यहां उपलब्ध शूटिंग संभावनाओं के बारे में जानकारी साझा की।

💰 फिल्मों को 3 करोड़ रुपये तक सब्सिडी

के.एस. चौहान ने बताया कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के मार्गदर्शन में उत्तराखंड में फिल्म शूटिंग को बढ़ावा देने के लिए फिल्म नीति लागू की गई है। इसके तहत फिल्म निर्माताओं को विभिन्न स्तरों पर सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।

नीति के तहत उत्तराखंड में शूट की गई हिंदी और अन्य क्षेत्रीय भाषाओं की फिल्मों के लिए 3 करोड़ रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान बताया गया। वेब सीरीज और विदेशी फिल्मों को भी सब्सिडी के दायरे में शामिल किया गया है।

📲 7 दिन में शूटिंग की अनुमति, शुल्क भी माफ

फिल्म निर्माताओं के लिए राज्य में शूटिंग से जुड़ी प्रक्रियाओं को आसान बनाने के लिए ऑनलाइन अनुमति और सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था की गई है। चौहान के अनुसार, इसके तहत सात दिनों के भीतर फिल्मांकन की अनुमति प्रदान की जा रही है।

उन्होंने बताया कि प्रदेश में शूटिंग शुल्क माफ किया गया है। फिल्मांकन के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के साथ-साथ जीएमवीएन और केएमवीएन गेस्ट हाउसों में विशेष छूट भी दी जा रही है।

उनके अनुसार, उत्तराखंड में हर साल 200 से अधिक फिल्मों, वेब सीरीज और सीरियल्स की शूटिंग हो रही है। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो रहे हैं।

🎥 तमिल फिल्म इंडस्ट्री के प्रोड्यूसर्स-डायरेक्टर्स से वन-टू-वन बैठक

कॉन्क्लेव के दौरान उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के नोडल अधिकारी के.एस. चौहान ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े प्रोड्यूसर्स और डायरेक्टर्स के साथ व्यक्तिगत बैठकें भी कीं।

इन बैठकों में इंडिया टॉकीज, स्टोन बीच स्टूडियो, गिरीश प्रधान, बीटीजीआई प्रोड्यूसंस (यूएस), पारसा पिक्चर, लाइका प्रोड्यूसंस, मसाला पिक्स, कवि क्रिएशन्स और ड्रीम वारियर पिक्चर सहित कई प्रोडक्शन हाउस ने उत्तराखंड में शूटिंग को लेकर रुचि दिखाई।

🏔️ फिल्म शूटिंग के साथ फिल्म टूरिज्म पर भी जोर

उत्तराखंड फिल्म विकास परिषद के अनुसार, राज्य की प्राकृतिक सुंदरता, भौगोलिक विविधता और फिल्म शूटिंग के लिए उपलब्ध सुविधाओं के साथ अनुकूल फिल्म नीति इसे निर्माताओं के लिए आकर्षक विकल्प बनाती है।

कॉन्क्लेव में राज्य की सहभागिता से फिल्म निर्माण के साथ फिल्म टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद जताई गई। राज्य सरकार का लक्ष्य उत्तराखंड को देश और विदेश के फिल्म निर्माताओं के लिए प्रमुख शूटिंग डेस्टिनेशन बनाते हुए एक मजबूत फिल्म शूटिंग हब के रूप में स्थापित करना है।