वॉशिंगटन | 3 नवंबर 2026
अमेरिका में मंगलवार को मिडटर्म चुनाव के लिए मतदान हो रहा है। इस चुनाव में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी और विपक्षी डेमोक्रेटिक पार्टी के बीच संसद पर नियंत्रण को लेकर अहम मुकाबला है। नतीजे तय करेंगे कि ट्रंप अपने कार्यकाल के अगले दो वर्षों में कितनी आसानी से अपने राजनीतिक एजेंडे को आगे बढ़ा पाएंगे।
इस बार चुनाव में प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और सीनेट की 100 में से 35 सीटों पर मतदान हो रहा है। कई राज्यों में गवर्नर पद के लिए भी चुनाव कराए जा रहे हैं।
🗳️ संसद के दोनों सदनों पर नजर
फिलहाल रिपब्लिकन पार्टी को प्रतिनिधि सभा और सीनेट, दोनों में बढ़त हासिल है। प्रतिनिधि सभा में रिपब्लिकन के पास 218 और डेमोक्रेट्स के पास 214 सीटें हैं, जबकि दो सीटें खाली हैं।
वहीं सीनेट में रिपब्लिकन 53-47 से आगे हैं। डेमोक्रेट्स को दोनों सदनों में बहुमत हासिल करने के लिए चार-चार सीटों का शुद्ध फायदा करना होगा।
📢 ट्रंप के लिए क्यों अहम है यह चुनाव?
मिडटर्म चुनाव को अमेरिकी मतदाता राष्ट्रपति के कामकाज पर अपनी राय जाहिर करने के एक बड़े अवसर के रूप में देखते हैं। अगर डेमोक्रेट्स प्रतिनिधि सभा या सीनेट में बहुमत हासिल करते हैं, तो ट्रंप प्रशासन के फैसलों और विधायी एजेंडे पर निगरानी बढ़ सकती है।
दूसरी ओर, रिपब्लिकन बहुमत बरकरार रखने में सफल रहते हैं तो राष्ट्रपति को अपनी नीतियों को आगे बढ़ाने में अपेक्षाकृत आसानी होगी।
💵 महंगाई और अर्थव्यवस्था बने चुनाव के बड़े मुद्दे
इस बार चुनाव प्रचार में महंगाई, रोजमर्रा की चीजों की बढ़ती कीमतें, स्वास्थ्य सेवाएं और आव्रजन जैसे मुद्दे प्रमुख रहे हैं। ईरान के साथ जारी युद्ध और उससे जुड़े आर्थिक दबावों का असर भी मतदाताओं की चिंताओं में शामिल है।
रॉयटर्स/इप्सोस के सर्वे में ट्रंप की लोकप्रियता में गिरावट के संकेत मिले हैं। वहीं चुनाव से पहले हुए सर्वेक्षणों में डेमोक्रेट्स को मतदान के प्रति अधिक उत्साहित बताया गया है।
⏳ कब आएंगे चुनाव के नतीजे?
अमेरिका में अलग-अलग समय क्षेत्रों के कारण मतदान केंद्रों के बंद होने का समय भी अलग-अलग होगा। शुरुआती नतीजे मतदान समाप्त होने के बाद आने शुरू होंगे, लेकिन डाक मतपत्रों की गिनती और करीबी मुकाबलों के कारण अंतिम तस्वीर सामने आने में कई दिन लग सकते हैं।
इन चुनावों के नतीजे केवल अमेरिकी राजनीति ही नहीं, बल्कि आने वाले समय में देश की आर्थिक और विदेश नीति की दिशा को भी प्रभावित कर सकते हैं।










