देहरादून | 3 सितंबर 2026
उत्तराखंड में 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों (मदरसों) को मान्यता प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए। देहरादून के आईआरडीटी सभागार में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संस्थानों के प्रतिनिधियों को प्रमाण-पत्र सौंपे और बच्चों की शिक्षा को आधुनिक जरूरतों से जोड़ने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि परंपराओं का महत्व अपनी जगह है, लेकिन मौजूदा दौर ज्ञान-विज्ञान, तकनीक, इनोवेशन और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का है। ऐसे में बच्चों को बदलती दुनिया के अनुरूप तैयार करना जरूरी है। 🎯
📚 26 संस्थानों को मिला मान्यता प्रमाण-पत्र
अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में आयोजित इस कार्यक्रम की थीम “नई पहचान, नया सम्मान। आधुनिक शिक्षा से उज्ज्वल भविष्य” रही।
मुख्यमंत्री ने कहा कि 26 शिक्षण संस्थानों को मान्यता मिलना अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। उन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों के प्रतिनिधियों को शुभकामनाएं देते हुए शिक्षा को समाज और राष्ट्र के भविष्य निर्माण से जुड़ी जिम्मेदारी बताया।
💻 बच्चों को किताबी ज्ञान के साथ तकनीकी शिक्षा पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि बच्चों को ऐसी शिक्षा मिलनी चाहिए, जिससे उनकी प्रतिभा और व्यक्तित्व का विकास हो तथा वे अपने भविष्य के लिए बेहतर विकल्प चुन सकें।
उन्होंने कहा कि आज केवल किताबी ज्ञान पर्याप्त नहीं है। शिक्षा को व्यावहारिक, आधुनिक और रोजगारपरक बनाना जरूरी है। डॉक्टर, इंजीनियर, प्रशासनिक अधिकारी, लेखक या वैज्ञानिक बनने के साथ कृषि जैसे क्षेत्रों में जाने वाले बच्चों को भी आधुनिक तकनीकों और शोध की जानकारी होनी चाहिए।
🤖 नई पीढ़ी की तकनीकी क्षमता को सही दिशा देने की जरूरत
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज 14-15 वर्ष की उम्र के बच्चे ऐसी तकनीकी और डिजिटल जानकारी रखते हैं, जिसके बारे में कई बार बड़े लोग भी नहीं जानते। इसलिए उनकी क्षमताओं को पहचानकर उन्हें सही दिशा और अच्छे संस्कार देने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि प्रत्येक बच्चे में प्रतिभा और क्षमता होती है। परिवार, समाज और शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी है कि बच्चों की इन क्षमताओं को पहचानकर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर दिया जाए।
⚖️ UCC और अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण पर भी बोले धामी
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की नीतियों का उद्देश्य किसी व्यक्ति या वर्ग को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) का उल्लेख करते हुए कहा कि इसे किसी वर्ग को टारगेट करने के लिए लागू नहीं किया गया है।
इसी तरह उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण का उद्देश्य भी किसी वर्ग को निशाना बनाना नहीं, बल्कि सभी बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराना है।
धामी ने कहा कि उत्तराखंड में सभी वर्गों के बीच आपसी प्रेम, भाईचारा और मधुर संबंध हैं तथा सरकार व्यक्ति की पहचान या वर्ग के बजाय उसके कार्य और योगदान को महत्व देती है।
🏫 मान्यता प्राप्त संस्थानों से धरातल पर बदलाव की अपेक्षा
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज शुरू हुई व्यवस्था को मजबूत करने के लिए सरकार और शिक्षण संस्थानों, दोनों की भूमिका महत्वपूर्ण है। उन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों से अपेक्षा की कि आधुनिक शिक्षा का संदेश गांव-गांव और घर-घर तक पहुंचे।
उन्होंने कहा कि इस पहल का वास्तविक असर आने वाले समय में बच्चों की शिक्षा, प्रतिभा और भविष्य में दिखाई देना चाहिए। केवल औपचारिकता पूरी करने के बजाय धरातल पर बदलाव नजर आना चाहिए।
🌾 आधुनिक शिक्षा के साथ परंपरा का भी उल्लेख
मुख्यमंत्री ने कृषि का उदाहरण देते हुए कहा कि समय के साथ काम करने के तरीकों में बदलाव आता है। उन्होंने अपने किसान परिवार से होने का उल्लेख करते हुए कहा कि वह स्वयं खेत में जाकर कृषि कार्य करते हैं और आधुनिक उपकरणों के साथ पारंपरिक तरीके से काम करने में भी उन्हें संकोच नहीं है।
उनके मुताबिक इसी तरह शिक्षा में भी पारंपरिक मूल्यों के साथ आधुनिक तकनीक और नए ज्ञान को अपनाना समय की जरूरत है।
👩🎓 हुनर और रोजगार के अवसरों पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार समाज के सभी वर्गों को हुनर और रोजगार के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए काम कर रही है। युवाओं को ऋण और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ बेटियों को आगे बढ़ने के अवसर दिए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि शिक्षा के माध्यम से बच्चों को इतना सक्षम बनाया जाना चाहिए कि वे भविष्य की चुनौतियों का सामना कर सकें और प्रदेश व देश के विकास में योगदान दे सकें।
इसके अलावा ऊधमसिंहनगर जिले के एम. जी. एन. पब्लिक स्कूल, केलाखेड़ा को भी नवीन मान्यता प्रदान की गई। इस तरह प्रदेश के कुल 26 अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को मान्यता प्रमाण-पत्र मिले।
🤝 शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने का संदेश
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षण संस्थानों की जिम्मेदारी केवल शिक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वे आने वाली पीढ़ियों को दिशा देने का काम करते हैं। उन्होंने मान्यता प्राप्त संस्थानों, संचालकों और शिक्षकों से आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण, व्यावहारिक और रोजगारपरक शिक्षा पर ध्यान देने की अपेक्षा की।
उन्होंने उत्तराखंड की आपसी भाईचारे और सामाजिक सौहार्द की परंपरा का भी उल्लेख किया और कहा कि अल्पसंख्यक शिक्षा के क्षेत्र में शुरू हुई पहल का प्रभाव संस्थानों के कामकाज और बच्चों के भविष्य में दिखाई देना चाहिए।
कार्यक्रम में अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के मंत्री खजान दास, उत्तराखण्ड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉ. सुरजीत सिंह गांधी, विशेष सचिव डॉ. पराग मधुकर धकाते, अपर सचिव विक्रम सिंह यादव सहित विभागीय अधिकारी, जनप्रतिनिधि और शिक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि मौजूद रहे।










