म्यांमार में शांति और स्थिरता के समर्थन पर भारत का रुख कायम, ओम बिरला ने दोहराई प्रतिबद्धता 🇮🇳🇲🇲

नई दिल्ली | 2 सितंबर 2026

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने म्यांमार में शांति और स्थिरता के लिए भारत के समर्थन को दोहराया है। उन्होंने म्यांमार में शांति और राष्ट्रीय सुलह की दिशा में हुई प्रगति का स्वागत करते हुए कहा कि भारत इस प्रक्रिया में म्यांमार का मजबूत और भरोसेमंद साझेदार बना रहेगा।

बिरला ने यह बात PRIDE की ओर से आयोजित क्षमता निर्माण कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए म्यांमार के संसदीय प्रतिनिधिमंडल के स्वागत के दौरान कही। प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व म्यांमार संसद की इंटरनेशनल रिलेशन्स समिति के चेयरपर्सन डॉ. पिंट सान कर रहे हैं।

भारत-म्यांमार संबंधों को बताया प्राचीन और गहरा

प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत में ओम बिरला ने कहा कि भारत और म्यांमार के रिश्ते पुराने और गहरे हैं। दोनों देशों के बीच साझा सभ्यतागत विरासत और बौद्ध धर्म के संबंध इन रिश्तों को मजबूती देते हैं।

उन्होंने कहा कि भारत की तीन प्रमुख विदेश नीति प्राथमिकताओं—एक्ट ईस्ट, नेबरहुड फर्स्ट और इंडो-पैसिफिक—में म्यांमार का अहम स्थान है।

बिरला के अनुसार, दोनों देशों के संबंध राजनीति, सुरक्षा, रक्षा, व्यापार, निवेश, कनेक्टिविटी, विकास और मानवीय सहायता जैसे कई क्षेत्रों तक फैले हुए हैं।

जरूरत के समय म्यांमार के साथ खड़ा रहा भारत

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि भारत जरूरत के समय हमेशा म्यांमार के साथ खड़ा रहा है और मदद पहुंचाने वाले शुरुआती देशों में शामिल रहा है।

उन्होंने दोनों देशों के शीर्ष नेतृत्व के बीच नियमित उच्चस्तरीय बैठकों को भी द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।

संसदीय अनुभव साझा करने को तैयार भारत

ओम बिरला ने कहा कि भारत म्यांमार के साथ अपनी संसदीय संस्थाओं के कामकाज, नियमों, प्रक्रियाओं और लोकतांत्रिक परंपराओं से जुड़े अनुभव साझा करने के लिए तैयार है।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य म्यांमार में मजबूत और समावेशी लोकतांत्रिक संस्थाओं के निर्माण में सहयोग करना है।

दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच हुए चुनावों का जिक्र

म्यांमार में हुए हालिया चुनावों का उल्लेख करते हुए बिरला ने कहा कि वहां दिसंबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच तीन चरणों में राष्ट्रीय संसद और राज्य/क्षेत्रीय विधानसभाओं के चुनाव कराए गए।

उन्होंने बताया कि इन चुनावों में पहली बार आनुपातिक प्रतिनिधित्व और इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया। बिरला ने इसे म्यांमार की चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण पड़ाव और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम बताया।

संसदीय सहयोग बढ़ाने पर जोर 📢

लोकसभा अध्यक्ष ने कहा कि म्यांमार के संसदीय प्रतिनिधिमंडल की यह यात्रा दोनों देशों के बीच सार्थक विचार-विमर्श और संसदीय सहयोग को और मजबूत करने में मदद करेगी।