देहरादून | 3 सितंबर 2026
उत्तराखंड के विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के स्पष्ट निर्देश दिए हैं। लंबित मास्टर प्लान और परियोजनाओं में तेजी लाने के साथ हर काम की समय-सीमा तय करने और जिम्मेदारी निर्धारित करने को कहा गया है।
मुख्यमंत्री ने प्राधिकरण क्षेत्रों की सभी सड़कों को अगले 15 दिनों में बेहतर स्थिति में लाने और 15 अक्टूबर तक बड़े स्तर पर सौंदर्यीकरण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए। साथ ही अवैध निर्माण की रियल टाइम निगरानी के लिए हर विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard बनाने को कहा गया है।
🏙️ 15 अक्टूबर तक बदलेगा शहरों का स्वरूप
मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी विकास प्राधिकरणों के क्षेत्र में इसी महीने सौंदर्यीकरण के काम शुरू किए जाएं। इन कार्यों का स्वरूप और गुणवत्ता G20 समिट के दौरान किए गए सौंदर्यीकरण की तरह आकर्षक और प्रभावी होनी चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि सौंदर्यीकरण से जुड़े काम 15 अक्टूबर तक पूरे किए जाएं। जरूरत पड़ने पर बजट की व्यवस्था करने के निर्देश देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि धन की कमी को काम में देरी का कारण नहीं बनाया जाना चाहिए।
🚧 15 दिन में प्राधिकरण क्षेत्र की सड़कें सुधारने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने विकास प्राधिकरणों के अधीन आने वाली सड़कों का सर्वे कराने और उनकी स्थिति का आकलन करने को कहा। खराब सड़कों की मरम्मत और सुधार प्राथमिकता के आधार पर कराने के निर्देश दिए गए।
लक्ष्य तय किया गया है कि अगले 15 दिनों के भीतर प्राधिकरण क्षेत्र की सभी सड़कें बेहतर स्थिति में हों। सड़कों की गुणवत्ता और मरम्मत कार्यों की नियमित निगरानी भी की जाएगी।
📋 अटके मास्टर प्लान पर अब जवाबदेही तय होगी
मुख्यमंत्री ने लंबे समय से लंबित मास्टर प्लान और अन्य परियोजनाओं की स्थिति की समीक्षा कर उन्हें तेजी से आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। प्रत्येक लंबित कार्य की वर्तमान स्थिति के साथ उसकी पूरी होने की समय-सीमा तय करने और संबंधित अधिकारी की जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा गया।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि योजनाएं केवल कागजों पर नहीं रहनी चाहिए, बल्कि उनका असर जमीन पर दिखाई देना चाहिए।
🚻 हर शहर में सिटी पार्क और पिंक टॉयलेट
शहरी सुविधाओं को लेकर भी मुख्यमंत्री ने कई निर्देश दिए। सभी शहरों में सिटी पार्क विकसित करने और प्रत्येक सिटी पार्क में सामान्य टॉयलेट के साथ पिंक टॉयलेट की व्यवस्था अनिवार्य करने को कहा गया।
शहरी, अर्द्धशहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरत के अनुसार पिंक टॉयलेट विकसित करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अगली समीक्षा बैठक तक इस लक्ष्य का करीब 70 प्रतिशत हासिल करने को कहा गया है। महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की जरूरतों को ध्यान में रखकर सार्वजनिक सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया गया।
🏠 प्रधानमंत्री आवास योजना की भी समीक्षा
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना की प्रगति की जानकारी लेते हुए सभी जिलों में अब तक योजना का लाभ पा चुके अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और BPL परिवारों की विस्तृत सूची तैयार करने के निर्देश दिए।
यह सूची 15 दिन के भीतर मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराने को कहा गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि आवास योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्र परिवारों तक पहुंचे और इसकी नियमित समीक्षा होती रहे।
🛰️ अवैध निर्माण पर GIS, ड्रोन और सैटेलाइट से नजर
अवैध निर्माण को लेकर मुख्यमंत्री ने कार्रवाई को निर्माण शुरू होने के बाद तक सीमित नहीं रखने के निर्देश दिए। उन्होंने शुरुआती स्तर पर ही संदिग्ध निर्माण की पहचान के लिए GIS, सैटेलाइट इमेजरी और ड्रोन आधारित निगरानी विकसित करने को कहा।
हर विकास प्राधिकरण में Illegal Construction Monitoring Dashboard बनाया जाएगा। इसमें संदिग्ध निर्माण की पहचान से लेकर निरीक्षण, नोटिस, सीलिंग और ध्वस्तीकरण तक की कार्रवाई की रियल टाइम स्थिति दर्ज होगी।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि किसी अवैध निर्माण मामले में अधिकारियों की मिलीभगत सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाए।
💻 ऑनलाइन नक्शा मंजूरी और वेबसाइट होगी आसान
ऑनलाइन मानचित्र स्वीकृति प्रणाली को सभी जिला स्तरीय विकास प्राधिकरणों से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्यमंत्री ने भवन मानचित्र स्वीकृति प्रक्रिया को पारदर्शी, सरल और समयबद्ध बनाने पर जोर दिया।
प्राधिकरणों की वेबसाइट को भी Citizen Friendly बनाने को कहा गया, ताकि लोगों को योजनाओं, मानचित्र स्वीकृति, शुल्क, नियमों और अन्य सेवाओं की जानकारी आसानी से मिल सके। वेबसाइट के लिए प्रस्तावित चैटबॉट की प्रगति की भी जानकारी ली गई।
🅿️ देहरादून-हरिद्वार में पार्किंग संकट का समाधान
देहरादून और हरिद्वार क्षेत्र में पार्किंग की समस्या को लेकर भी मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को ठोस कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए।
MDDA और HRDA को संबंधित नगर निकायों के साथ मिलकर मल्टी-लेवल पार्किंग, सरफेस पार्किंग, पेरीफेरल पार्किंग और PPP मॉडल के जरिए पार्किंग विकसित करने की योजना तैयार करनी होगी।
🌾 2-3 क्षेत्रों में Land Pooling का पायलट
मुख्यमंत्री ने Land Pooling Scheme को पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कम से कम 2 से 3 विकास क्षेत्रों में लागू करने की कार्ययोजना तैयार करने को कहा।
योजना में किसानों और भूमि मालिकों को मिलने वाले लाभ का स्पष्ट और पारदर्शी मॉडल तैयार करने तथा उन्हें योजना की पूरी जानकारी देने के निर्देश दिए गए।
🏘️ ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों पर भी फोकस
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की भूमिका सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिन ग्रामीण और अर्द्धशहरी इलाकों को प्राधिकरणों के दायरे में शामिल किया गया है, वहां भी नागरिक सुविधाओं को बेहतर किया जाए।
स्थानीय निकायों और ग्राम पंचायतों के साथ समन्वय कर स्ट्रीट लाइट, पेयजल और बैठने की व्यवस्था जैसी सुविधाएं विकसित करने के निर्देश दिए गए।
🏗️ आवासीय परियोजनाओं की नियमित निगरानी
सभी जिलों में आवासीय परियोजनाओं की प्रगति का स्पष्ट विवरण तैयार करने को कहा गया है। इसमें यह जानकारी शामिल होगी कि कितने आवास पूरे हो चुके हैं और कितने निर्माणाधीन हैं।
जहां परियोजनाओं की रफ्तार धीमी है, वहां आवश्यक कार्रवाई कर काम तेज करने के निर्देश दिए गए।
📢 मुख्यमंत्री का साफ संदेश—देरी की कोई गुंजाइश नहीं
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास प्राधिकरणों की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और तकनीक का अधिकतम इस्तेमाल होना चाहिए। विकास कार्यों और सरकारी योजनाओं में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।
हर काम की समय-सीमा तय कर नियमित मॉनिटरिंग करने और लापरवाही या अनावश्यक विलंब मिलने पर जिम्मेदारी तय करने के निर्देश दिए गए हैं।
बैठक में प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, सचिव विनय शंकर पाण्डेय, डॉ. आर. राजेश कुमार सहित सभी विकास प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष और संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।










