देहरादून | 31 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड की लोकभाषा, लोकगीत, पारंपरिक पहनावा और पहाड़ी खानपान ही राज्य की असली पहचान हैं। इन्हें अगली पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को देहरादून के रेंजर्स कॉलेज ग्राउंड में आयोजित उत्तराखंड कौथिक-2026 में यह बात कही। उन्होंने स्थानीय उत्पादों, हस्तशिल्प और पारंपरिक व्यंजनों को देश-दुनिया में पहचान दिलाने के लिए सरकार के प्रयासों का भी उल्लेख किया।
अखिल गढ़वाल सभा, देहरादून की ओर से आयोजित इस महोत्सव में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने में सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया।
🎭 लोकभाषा और लोककलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान यहां की लोकभाषाओं, लोकगीतों, लोकनृत्यों, पारंपरिक वेशभूषा, मेलों और त्योहारों से बनी है। इन परंपराओं को केवल यादों तक सीमित रखने के बजाय आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड कौथिक जैसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करते हैं। ऐसे मंचों पर स्थानीय कलाकारों, शिल्पकारों और पारंपरिक कारीगरों को अपनी कला प्रदर्शित करने का अवसर मिलता है।
महोत्सव में लगाए गए स्टॉलों पर उत्तराखंडी हस्तशिल्प, जैविक उत्पाद और पारंपरिक पहाड़ी व्यंजन भी प्रदर्शित किए गए। मुख्यमंत्री ने इनकी सराहना करते हुए स्थानीय उत्पादों को व्यापक बाजार उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
🏔️ ‘विकास भी, विरासत भी’ के मंत्र पर आगे बढ़ रहा उत्तराखंड
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार विकास के साथ प्रदेश की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत को भी प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम में चल रहे पुनर्विकास कार्यों का उल्लेख किया। साथ ही सीमांत क्षेत्रों में सड़क, बिजली, दूरसंचार, पर्यटन और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम के तहत किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी।
मुख्यमंत्री के अनुसार, धार्मिक पर्यटन को स्थानीय रोजगार और अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
👩🌾 उत्तराखंड में 3 लाख से अधिक महिलाएं बनीं लखपति दीदी
महिला सशक्तीकरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मातृशक्ति की अहम भूमिका है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में लखपति दीदी अभियान के तहत 3 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं।
स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाएं कृषि, हस्तशिल्प, पहाड़ी व्यंजन और स्थानीय उत्पादों के जरिए अपनी आमदनी बढ़ा रही हैं। कौथिक महोत्सव में महिला समूहों की ओर से लगाए गए स्टॉल भी उनकी उद्यमशीलता और आत्मनिर्भरता को प्रदर्शित करते हैं।
📢 स्थानीय उत्पादों को बाजार देने के लिए सरकार की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार चाहती है कि उत्तराखंड के युवाओं को रोजगार के लिए अपने गांव और क्षेत्र से बाहर जाने की मजबूरी न हो। इसके लिए स्थानीय उत्पादों, उद्यमिता और स्वरोजगार को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
उन्होंने सरकार की प्रमुख पहलों का उल्लेख करते हुए कहा कि:
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एक जनपद-दो उत्पाद: जिलों के स्थानीय उत्पादों को प्रोत्साहन।
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हाउस ऑफ हिमालयाज: उत्तराखंड के उत्पादों को व्यापक पहचान और बाजार उपलब्ध कराने की पहल।
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होम-स्टे योजना: ग्रामीण और पर्वतीय क्षेत्रों में पर्यटन आधारित आजीविका को बढ़ावा।
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कृषि एवं बागवानी: स्थानीय खेती और उत्पादन को प्रोत्साहन।
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पशुपालन एवं दुग्ध उत्पादन: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास।
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मधुमक्खी पालन और सुगंधित पौधों की खेती: स्वरोजगार के नए अवसर विकसित करना।
मुख्यमंत्री ने ‘वेड इन उत्तराखंड’, शीतकालीन पर्यटन और एडवेंचर टूरिज्म को भी रोजगार सृजन से जुड़ी महत्वपूर्ण पहल बताया।
📊 रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत वृद्धि का दावा
मुख्यमंत्री ने पलायन निवारण आयोग की सर्वे रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि उत्तराखंड में रिवर्स पलायन में 44 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है।
उन्होंने इसे प्रदेश में स्थानीय स्तर पर रोजगार और आजीविका के अवसर बढ़ने का संकेत बताया।
इसके अलावा मुख्यमंत्री ने कहा कि स्टार्टअप इंडिया की राज्यों की रैंकिंग में उत्तराखंड को ‘लीडर’ श्रेणी में स्थान मिला है। नीति आयोग के SDG इंडिया इंडेक्स 2023-24 में भी उत्तराखंड देश के शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्यों में शामिल रहा और केरल के साथ संयुक्त रूप से सर्वोच्च स्कोर प्राप्त किया।
🏆 निवेश और सुशासन के क्षेत्र में उपलब्धियों का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने राज्य की अन्य उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए बताया कि सिंगल विंडो सिस्टम को ‘टॉप अचीवर्स’ श्रेणी में सम्मानित किया गया है।
भारत सरकार के राज्य खनन तत्परता सूचकांक में उत्तराखंड को श्रेणी-C में देशभर में दूसरा स्थान मिला है। वहीं, लॉजिस्टिक्स परफॉर्मेंस में प्रदेश को ‘अचीवर्स’ श्रेणी में जगह मिली है।
उन्होंने कहा कि सरकार निवेश के अनुकूल वातावरण तैयार करने, पारदर्शी व्यवस्था और आधारभूत सुविधाओं के विस्तार के लिए काम कर रही है।
🎯 आधुनिकता के साथ बचानी होगी पहाड़ की सांस्कृतिक पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास और आधुनिकता की दौड़ में उत्तराखंड की पारंपरिक पहचान को पीछे नहीं छोड़ा जा सकता। लोकभाषा, लोकगीत, लोकनृत्य, रीति-रिवाज और पारंपरिक पहनावे को जीवंत बनाए रखने में युवाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
उन्होंने अखिल गढ़वाल सभा सहित प्रदेश की सामाजिक और सांस्कृतिक संस्थाओं से लोकसंस्कृति के संरक्षण के प्रयास जारी रखने की अपेक्षा जताई।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को देश के श्रेष्ठ राज्यों में शामिल करने के संकल्प को पूरा करने में प्रदेशवासियों की सहभागिता और सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा।










