G20 में जयशंकर ने उठाया वैश्विक ऊर्जा संकट का मुद्दा, बोले- ऊर्जा बाजारों का राजनीतिकरण विकासशील देशों के लिए नुकसानदेह

अटलांटा (अमेरिका) | 1 नवंबर 2026

दुनिया में ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर पड़ रहे असर के बीच भारत ने G20 मंच पर अपनी चिंता जाहिर की है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अटलांटा में आयोजित G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में कहा कि ऊर्जा बाजारों में बाधाएं, प्रतिबंध और रणनीतिक रास्तों पर रुकावटें वैश्विक आपूर्ति को प्रभावित कर रही हैं। इसका सबसे अधिक असर कम आय वाले और विकासशील देशों पर पड़ रहा है।

जयशंकर ने ऊर्जा बाजारों को खुला और भरोसेमंद बनाए रखने, सप्लाई चेन में विविधता लाने तथा वैश्विक आर्थिक सहयोग मजबूत करने की जरूरत बताई।

🌍 ऊर्जा संकट पर भारत ने G20 में जताई चिंता

30 और 31 अक्टूबर को अमेरिका के अटलांटा में हुई G20 विदेश मंत्रियों की बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला और भू-राजनीतिक तनाव जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।

बैठक के दूसरे पूर्ण सत्र में जयशंकर ने कहा कि दुनिया के सामने ऊर्जा संकट केवल उत्पादन की कमी का मामला नहीं है। आपूर्ति में अनिश्चितता, व्यवधान, बढ़ती कीमतें और ऊर्जा तक पहुंच की चुनौतियां भी बड़ी समस्या बन रही हैं।

उन्होंने ऊर्जा व्यापार और बुनियादी ढांचे पर होने वाले जानबूझकर हमलों को कीमतों को अपने नियंत्रण में रखने की रणनीति बताया।

⚡ प्रतिबंधों और समुद्री रास्तों में बाधाओं पर उठाए सवाल

जयशंकर ने कहा कि ऊर्जा बाजारों में प्रतिबंधों, बाधाओं और महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर रुकावटों के कारण लगातार असंतुलन पैदा हो रहा है। इसका असर पहले से ही आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे देशों पर अधिक पड़ता है।

उन्होंने तेल और गैस के मामले में अलग-अलग मानदंड अपनाए जाने पर भी सवाल उठाया। उनका कहना था कि वैश्विक बाजार में एक देश के फैसलों का असर दूसरे देशों पर भी पड़ता है, इसलिए इस पर व्यापक दृष्टिकोण अपनाना जरूरी है।

भारत की स्वच्छ खाना पकाने की जरूरतों के लिए एलपीजी की विश्वसनीय और नियमित आपूर्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता भी उन्होंने दोहराई।

🏭 वैश्विक व्यापार के लिए सप्लाई चेन में विविधता जरूरी

बैठक के तीसरे सत्र में जयशंकर ने वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक मजबूत और भरोसेमंद बनाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि दुनिया को उत्पादन और विनिर्माण के लिए किसी एक भौगोलिक क्षेत्र पर अत्यधिक निर्भर नहीं रहना चाहिए।

उन्होंने औद्योगिक विकास के अधिकार को बढ़ावा देने, प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली अनुचित व्यापारिक गतिविधियों का विरोध करने और अलग-अलग देशों में उत्पादन के अवसर विकसित करने की आवश्यकता बताई।

जयशंकर के अनुसार, महामारी, युद्ध, जलवायु संबंधी घटनाएं और परिवहन में बाधाएं वैश्विक आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में व्यापारिक मार्गों और उत्पादन केंद्रों का विविधीकरण जरूरी है।

🇮🇳 भारत ने क्रिटिकल मिनरल्स और नई ऊर्जा तकनीक पर दिया जोर

विदेश मंत्री ने भारत के नेशनल मिशन ऑन क्रिटिकल मिनरल्स का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि यह मिशन खनिजों की खोज से लेकर उनके पुनर्चक्रण तक की पूरी प्रक्रिया को कवर करता है।

भारत की ओर से G20 क्रिटिकल मिनरल्स सर्कुलैरिटी इनिशिएटिव का प्रस्ताव भी रखा गया है।

जयशंकर ने ऊर्जा क्षेत्र में निवेश बढ़ाने और नई तकनीकों को आगे बढ़ाने की जरूरत बताई। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:

  • ऊर्जा भंडारण (Energy Storage)

  • छोटे मॉड्यूलर परमाणु रिएक्टर (SMR)

  • ग्रीन हाइड्रोजन

  • जैव ईंधन (Biofuels)

  • क्रिटिकल मिनरल्स का पुनर्चक्रण

उन्होंने कहा कि G20 देशों को इन क्षेत्रों में वित्तीय सहायता और निवेश तक पहुंच बढ़ाने के लिए मिलकर काम करना चाहिए।

🕊️ युद्धों के समाधान के लिए कूटनीति पर भी जोर

G20 बैठक में जयशंकर ने अंतरराष्ट्रीय संघर्षों का समाधान सैन्य कार्रवाई के बजाय बातचीत और कूटनीति से निकालने की जरूरत भी बताई।

उन्होंने कहा कि दुनिया में जारी बड़े संघर्षों का प्रभाव अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पड़ रहा है और इनके समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ता तलाशना आवश्यक है।

बैठक के दौरान उन्होंने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से भी मुलाकात की। इसके अलावा रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव के साथ यूक्रेन संघर्ष, खाड़ी क्षेत्र की स्थिति और बहुपक्षीय मुद्दों पर बातचीत की।

G20 बैठक में ऊर्जा सुरक्षा और व्यापार रहे प्रमुख मुद्दे

अमेरिका की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में 30 और 31 अक्टूबर को G20 देशों के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद जारी अमेरिकी G20 अध्यक्षीय वक्तव्य में भी ऊर्जा सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला की मजबूती और भू-राजनीतिक तनाव को प्रमुख मुद्दों के रूप में शामिल किया गया।

वक्तव्य में अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों से निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा और क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन मजबूत करने पर जोर दिया गया।

G20 Information Centre

जयशंकर की इस बैठक में भागीदारी के जरिए भारत ने ऊर्जा की विश्वसनीय आपूर्ति, विकासशील देशों की जरूरतों, वैश्विक व्यापार और औद्योगिक विविधीकरण से जुड़े अपने मुद्दे G20 के सामने रखे।