🚩 चारधाम यात्रा पर सीएम धामी: ‘सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद’ बनेगा नया मंत्र

देहरादून | 2 जून 2026

उत्तराखंड की आस्था और अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा मानी जाने वाली चारधाम यात्रा अब अपने दूसरे और अधिक चुनौतीपूर्ण चरण में प्रवेश कर रही है। मानसून की दस्तक से पहले मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने यात्रा प्रबंधन को लेकर स्पष्ट संदेश दिया है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा से किसी भी स्तर पर समझौता नहीं किया जाएगा।

मंगलवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारधाम यात्रा का मूल मंत्र “सुरक्षित यात्रा, सुगम दर्शन और सतत संवाद” होना चाहिए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव देने के लिए प्रशासन, पुलिस, आपदा प्रबंधन और अन्य विभागों के बीच मजबूत समन्वय बेहद जरूरी है।

🌧️ मानसून को देखते हुए बढ़ाई गई सतर्कता

मुख्यमंत्री ने कहा कि अब यात्रा का वह दौर शुरू होने वाला है, जहां बारिश, भूस्खलन और मौसम संबंधी चुनौतियां सामने आएंगी। ऐसे में सभी विभाग पूरी तरह अलर्ट मोड में रहें और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पहले से तैयारियां सुनिश्चित करें।

उन्होंने संवेदनशील स्थानों पर जेसीबी, पोकलैंड मशीनें, सैटेलाइट फोन, एम्बुलेंस और राहत-बचाव उपकरणों की अग्रिम तैनाती करने के निर्देश दिए, ताकि किसी भी मार्ग अवरोध या आपदा की स्थिति में तत्काल कार्रवाई की जा सके।

🚗 रात 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों पर सख्त रोक

मुख्यमंत्री ने चारधाम यात्रा मार्गों पर रात्रि 10 बजे से सुबह 4 बजे तक वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध का सख्ती से पालन कराने के निर्देश दिए। साथ ही भारी वाहनों और ट्रकों को केवल रात्रिकाल में संचालन की अनुमति देने को कहा गया है, जबकि दिन के समय इनके संचालन पर रोक रहेगी।

सरकार का मानना है कि इससे यात्रा मार्गों पर ट्रैफिक दबाव कम होगा और श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकेगी।

🙏 धामों में क्षमता के अनुरूप दर्शन व्यवस्था

सीएम धामी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि चारों धामों के लिए श्रद्धालुओं की संख्या और क्षमता के अनुरूप विस्तृत एसओपी (Standard Operating Procedure) तैयार की जाए।

यदि किसी धाम या पड़ाव पर क्षमता से अधिक भीड़ होती है तो नीचे बने होल्डिंग एरिया और प्रमुख चेक प्वाइंट्स पर श्रद्धालुओं को चरणबद्ध तरीके से रोका और आगे भेजा जाए, ताकि अव्यवस्था की स्थिति पैदा न हो।

🍛 होल्डिंग एरिया में मिलेंगी बेहतर सुविधाएं

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जहां भी श्रद्धालुओं को रोका जाए, वहां सिर्फ इंतजार नहीं बल्कि सम्मानजनक व्यवस्था भी होनी चाहिए।

इसके लिए पार्किंग, भोजन, पेयजल, शौचालय और अन्य आवश्यक सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही यात्रियों को लगातार यह जानकारी भी दी जाएगी कि उन्हें क्यों रोका गया है और आगे की व्यवस्था क्या है।

📢 सूचना के अभाव में नहीं होगी परेशानी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यात्रा के दौरान किसी भी श्रद्धालु को सूचना के अभाव का सामना नहीं करना चाहिए।

इसके लिए एलईडी डिस्प्ले, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप चैनल, एफएम रेडियो और सार्वजनिक सूचना प्रणाली के माध्यम से लगातार अपडेट जारी किए जाएंगे। मौसम, ट्रैफिक जाम, मार्ग अवरोध और दर्शन में विलंब जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां समय पर यात्रियों तक पहुंचाई जाएंगी।

🏥 गंभीर मरीजों के लिए हेली एम्बुलेंस व्यवस्था

यात्रा के दौरान स्वास्थ्य सुविधाओं को और मजबूत बनाने के लिए मुख्यमंत्री ने राज्य स्तर पर हेली एम्बुलेंस सेवा हेतु एक नोडल अधिकारी नियुक्त करने के निर्देश दिए हैं।

इस व्यवस्था के जरिए गंभीर मरीजों को जरूरत पड़ने पर तेजी से उच्च चिकित्सा केंद्रों तक पहुंचाया जा सकेगा।

🧹 स्वच्छता पर रहेगा विशेष फोकस

मुख्यमंत्री ने चारों धामों और पैदल यात्रा मार्गों पर स्वच्छता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की बात कही। उन्होंने पर्याप्त संख्या में शौचालयों की व्यवस्था और उनकी नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

इसके अलावा केदारनाथ पैदल मार्ग पर श्रद्धालुओं को बारिश और तेज धूप से बचाने के लिए अतिरिक्त शेड लगाने के भी निर्देश दिए गए हैं।

🎯 अधिकारियों को फील्ड में रहने के निर्देश

मुख्यमंत्री ने गढ़वाल आयुक्त, आईजी गढ़वाल, जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को नियमित रूप से व्यवस्थाओं की समीक्षा करने और श्रद्धालुओं व स्थानीय लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

साथ ही होटल, रेस्टोरेंट और ढाबों में रेट लिस्ट का अनिवार्य प्रदर्शन तथा खाद्य पदार्थों की नियमित गुणवत्ता जांच भी सुनिश्चित करने को कहा गया है।

चारधाम यात्रा को लेकर राज्य सरकार का संदेश स्पष्ट है—आस्था की इस महायात्रा में श्रद्धालुओं की सुरक्षा, सुविधा और भरोसा सबसे बड़ी प्राथमिकता है।