उत्तराखंड की मिट्टी से निकली एक संवेदनशील कहानी आज पूरे देश में गूंज रही है। देहरादून की सुद्दोवाला जेल पर बनी डॉक्युमेंट्री ‘सेकंड चांस’ ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की प्रतिष्ठित शॉर्ट फिल्म प्रतियोगिता में जीत दर्ज कर, प्रदेश को गर्व से भर दिया है।
युवा फिल्मकार शुभम शर्मा और रवि कर्णवाल की इस फिल्म ने 526 प्रविष्टियों और 24 भाषाओं के कड़े मुकाबले को पीछे छोड़ते हुए टॉप 7 में जगह बनाई—और यहीं से शुरू हुई उत्तराखंड की एक नई पहचान।
🏆 NHRC मंच पर उत्तराखंड की चमक
यह सम्मान NHRC के अध्यक्ष न्यायमूर्ति वी. रामसुब्रमण्यन की उपस्थिति में दिया गया। उनके साथ सदस्य बिद्युत रंजन सारंगी और विजया भारती सयानी भी मौजूद रहे।
तीन चरणों की कठिन चयन प्रक्रिया के बाद जब ‘सेकंड चांस’ का नाम विजेताओं में आया, तो सभागार में तालियों की गूंज के साथ उत्तराखंड की मेहनत और संवेदना दोनों को सलाम मिला।
🔍 “सेकंड चांस”—क्या समाज सच में देता है दूसरा मौका?
यह फिल्म सिर्फ एक डॉक्युमेंट्री नहीं, बल्कि उन अनसुनी आवाज़ों का आईना है, जो अक्सर जेल की चारदीवारी में दबकर रह जाती हैं।
देहरादून की सुद्दोवाला जेल में बंद कैदियों के जीवन, उनके संघर्ष और पुनर्वास की कहानी को बेहद संवेदनशील तरीके से दिखाया गया है। फिल्म एक बड़ा सवाल छोड़ती है—
👉 क्या हम सच में उन्हें दूसरा मौका देने के लिए तैयार हैं?
NHRC अध्यक्ष ने भी माना कि ऑडियो-विजुअल माध्यम लोगों के दिल और दिमाग पर गहरी छाप छोड़ता है—और ‘सेकंड चांस’ इसका सशक्त उदाहरण है।
💬 “यह सम्मान हमारा नहीं, उन कैदियों का है…”
फिल्मकारों का कहना है—
“यह पुरस्कार हमें नहीं, उन हजारों कैदियों को मिला है, जिनकी ज़िंदगी को हमने अपनी फिल्म में दिखाने की कोशिश की।”
यह एक ऐसा बयान है, जो इस पूरी कहानी को और भी मानवीय बना देता है।
🎥 टीम जिसने रची ये कहानी
- निर्देशक: हर्षित मिश्रा
- DOP: निवान प्राचुर्या
- निर्माता: दीपा धामी
🌟 पहाड़ से फिल्मी दुनिया तक—प्रेरणा की मिसाल
शुभम शर्मा, जो रुड़की के रहने वाले हैं, NSD और FTII पुणे से प्रशिक्षित हैं और अभिनय से लेकर निर्देशन तक अपनी अलग पहचान बना चुके हैं। वहीं रवि कर्णवाल, पद्मश्री निरंजन गोस्वामी के शिष्य, एक सशक्त अभिनेता और कोच के रूप में जाने जाते हैं।
दोनों की जोड़ी पहले भी ‘अलार्मघड़ी’, ‘चप्पल’, ‘डस्टर’ जैसी फिल्मों से 50 से ज्यादा पुरस्कार जीत चुकी है—और अब ‘सेकंड चांस’ ने इस सूची में एक और सुनहरा अध्याय जोड़ दिया है।
🤝 सरकार और जेल प्रशासन की भी सराहना
NHRC अधिकारियों ने उत्तराखंड सरकार और देहरादून जेल प्रशासन के सहयोग की खुलकर सराहना की। इसी सहयोग ने इस संवेदनशील विषय को राष्ट्रीय मंच तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई।
❤️ पहाड़ की कहानी, पूरे देश का संदेश
रुड़की की गलियों से निकलकर NHRC के राष्ट्रीय मंच तक पहुंची यह कहानी आज हर उस युवा के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखता है।










