देहरादून की वादियों में इस बार चर्चा सिर्फ मौसम की नहीं, बल्कि न्याय की रही। दो दिनों तक चली नॉर्थ ज़ोन रीजनल कॉन्फ्रेंस ने यह साफ कर दिया कि अब देश की न्याय व्यवस्था एक नए मोड़ पर खड़ी है—जहां लक्ष्य है हर उस व्यक्ति तक न्याय पहुंचाना, जो अब तक इससे दूर रहा।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) के तत्वाधान में आयोजित इस सम्मेलन का भव्य समापन रविवार को हुआ। मंच पर न्यायपालिका, सरकार और नीति-निर्माताओं का ऐसा संगम दिखा, जिसने “Justice Beyond Barriers” के विचार को ज़मीन पर उतारने की दिशा तय की।
🏛️ देश के शीर्ष नेतृत्व की मौजूदगी, उत्तराखंड बना चर्चा का केंद्र
इस अहम सम्मेलन में राज्यपाल गुरमीत सिंह, भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल समेत कई न्यायमूर्ति और विधि विशेषज्ञ शामिल हुए।
कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन और राष्ट्रगान के साथ हुई, जहां उत्तराखंड हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता ने अतिथियों का स्वागत किया।
💡 “न्याय तभी सफल, जब आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे”
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में एक अहम बात कही—
👉 “न्याय व्यवस्था की असली सफलता तभी है, जब समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक समय पर न्याय पहुंचे।”
उन्होंने “जस्टिस बियॉन्ड बैरियर्स” की अवधारणा को समझाते हुए कहा कि न्याय सिर्फ अदालतों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि हर बाधा को पार करते हुए आम आदमी तक पहुंचना चाहिए।
🔍 इन मुद्दों पर हुआ मंथन—जिनसे जुड़ा है समाज का दर्द
सम्मेलन में कई संवेदनशील और अहम विषयों पर गहन चर्चा हुई:
- वन अधिकार अधिनियम, 2006 का प्रभावी क्रियान्वयन 🌳
- जेल सुधार और विचाराधीन बंदियों के अधिकार 🔐
- एसिड अटैक पीड़ितों का पुनर्वास 💔
- महिलाओं और बच्चों के कानूनी अधिकार 👩👧
इन मुद्दों पर विशेषज्ञों ने अपने सुझाव दिए, ताकि न्याय प्रणाली और ज्यादा मानवीय और सुलभ बन सके।
🚀 “न्याय मित्र पोर्टल”—अब ऑनलाइन भी मिलेगा इंसाफ
इस मौके पर भारत के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने “न्याय मित्र पोर्टल” लॉन्च किया। अब आम नागरिक ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर, न्याय की प्रक्रिया को तेज़ और आसान बना सकेंगे।
इसके साथ ही नालसा के कार्यकारी अध्यक्ष न्यायमूर्ति विक्रम नाथ ने एक ई-बुकलेट का भी विमोचन किया।
📲 डिजिटल न्याय की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र सरकार ई-कोर्ट्स, नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड और फास्ट ट्रैक कोर्ट्स जैसे सुधारों से न्याय व्यवस्था को आधुनिक बना रही है। वहीं उत्तराखंड में भी ई-फाइलिंग, वर्चुअल हियरिंग और डिजिटल कोर्ट्स को बढ़ावा दिया जा रहा है।
🌄 उत्तराखंड से उठी आवाज़, देश को मिला दिशा
देहरादून में हुआ यह सम्मेलन सिर्फ एक औपचारिक आयोजन नहीं था, बल्कि एक ऐसा मंच बना, जहां से न्याय को और ज्यादा संवेदनशील, तेज़ और आमजन के करीब लाने का रोडमैप तैयार हुआ।










