उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान 2025: सीएम धामी ने किया सम्मान, ‘साहित्य ग्राम’ का बड़ा ऐलान

शब्दों की महक, संस्कृति की गूंज और साहित्य के प्रति सम्मान का एक भावनात्मक संगम। मुख्यमंत्री आवास स्थित मुख्य सेवक सदन में आयोजित “उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान समारोह-2025” सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि उस विरासत का उत्सव था जिसने पहाड़ की आत्मा को शब्दों में पिरोया है। ✍️

इस गरिमामय अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने जब मंच से साहित्यकारों का सम्मान किया, तो हर तालियों की गूंज में पहाड़ की पहचान झलक रही थी।


🌟 डॉ. जितेन ठाकुर को मिला सर्वोच्च सम्मान

समारोह का सबसे भावुक और गर्व भरा क्षण तब आया जब डॉ. जितेन ठाकुर को “उत्तराखंड साहित्य भूषण सम्मान” से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने उन्हें न सिर्फ उत्तराखंड बल्कि पूरे हिंदी साहित्य जगत की प्रेरणा बताया।


📚 वरिष्ठ साहित्यकारों का भी हुआ सम्मान

साहित्य के लंबे सफर को शब्दों में ढालने वाले कई दिग्गजों को “दीर्घकालीन उत्कृष्ट साहित्य सृजन पुरस्कार” से सम्मानित किया गया।
इनमें प्रमुख नाम रहे—
डॉ. बुद्धिनाथ मिश्र, श्याम सिंह कुटौला, डॉ. प्रीतम सिंह, केसर सिंह राय और अताए साबिर अफजल मंगलौरी।

इसके साथ ही “युवा कलमकार प्रतियोगिता” के विजेताओं और विभिन्न विधाओं में उत्कृष्ट लेखन करने वाले रचनाकारों को भी मंच पर सम्मान मिला—जहां नई पीढ़ी की आंखों में सपनों की चमक साफ दिख रही थी। ✨


👩‍🎓 महिला, बाल और लोक साहित्य को भी मिला मंच

इस समारोह में साहित्य के हर रंग को सम्मान मिला—

  • प्रो. दिवा भट्ट को “साहित्य नारी वंदन सम्मान”
  • प्रो. दिनेश चमोला को उत्कृष्ट बाल साहित्य
  • डॉ. भूपेंद्र बिष्ट, डॉ. सुधा जुगरान और शीशपाल गुसाईं को मौलिक रचना पुरस्कार

वहीं कुमाऊनी और गढ़वाली भाषा को समृद्ध करने वाले रचनाकारों को भी विशेष सम्मान दिया गया—जो इस बात का संकेत है कि सरकार स्थानीय भाषाओं को बचाने के लिए गंभीर है।


🏔️ “साहित्य ग्राम” से बदलेगा उत्तराखंड का सांस्कृतिक नक्शा

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा कि राज्य में दो आधुनिक “साहित्य ग्राम” स्थापित किए जाएंगे।

यह सिर्फ भवन नहीं होंगे, बल्कि ऐसे केंद्र होंगे जहां लेखक सृजन कर सकेंगे, संवाद होगा और उत्तराखंड की साहित्यिक आत्मा को नई उड़ान मिलेगी।


📖 साहित्यकार ही समाज के असली मार्गदर्शक

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने साफ कहा—
“साहित्यकार सिर्फ शब्दों के रचयिता नहीं, बल्कि समाज के मार्गदर्शक और प्रेरक होते हैं।”

उन्होंने यह भी याद दिलाया कि स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर उत्तराखंड राज्य निर्माण तक, साहित्यकारों ने हमेशा समाज को दिशा देने का काम किया है।


🌄 विरासत से भविष्य तक… उत्तराखंड का साहित्यिक सफर

जब मंच से सुमित्रानंदन पंत, गौरा पंत शिवानी, मोहन उप्रेती और शैलेश मटियानी जैसे महान साहित्यकारों का जिक्र हुआ, तो लगा जैसे पूरी परंपरा उस पल में जीवंत हो उठी।


🇮🇳 प्रधानमंत्री के नेतृत्व में संस्कृति को नया सम्मान

मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश अपनी सांस्कृतिक जड़ों की ओर लौट रहा है और साहित्य को उसका उचित सम्मान मिल रहा है।

इसी दिशा में उत्तराखंड सरकार भी अपनी बिखरी साहित्यिक धरोहर को संजोने में जुटी है।


🎯 युवा पीढ़ी को मिल रहा डिजिटल मंच

नई पीढ़ी को लेखन से जोड़ने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म, प्रतियोगिताएं और अनुदान योजनाएं चलाई जा रही हैं—ताकि पहाड़ की कहानियां सिर्फ किताबों तक सीमित न रहें, बल्कि दुनिया तक पहुंचें।