देहरादून | 13 अगस्त 2026
उत्तराखंड की लोक संस्कृति को राज्य की आत्मा और पहचान बताते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि इसके संरक्षण और संवर्धन के लिए सरकार लगातार काम कर रही है। देहरादून में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी के जन्मदिवस पर आयोजित संस्कृति सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री ने उनके गीतों के अंग्रेजी अनुवाद पर आधारित पुस्तक “Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” का विमोचन किया।
समारोह में अरुणाचल प्रदेश के अभिनेता, रंगकर्मी और नाटककार ताई तुगुंग को वर्ष 2026 का ‘नरेंद्र सिंह नेगी संस्कृति सम्मान’ प्रदान किया गया। 🎯
नेगी के गीतों में दिखता है उत्तराखंड का जनजीवन
सोशल बलूनी स्कूल, हरिद्वार बाईपास, देहरादून में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने नरेंद्र सिंह नेगी को जन्मदिवस की शुभकामनाएं देते हुए उनके स्वस्थ और दीर्घायु जीवन की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी ने अपने गीतों और संगीत के माध्यम से उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान को व्यापक स्तर पर प्रतिष्ठा दिलाई है। उनके गीतों में प्रदेश के जनजीवन, प्रकृति, संघर्ष, संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों की झलक मिलती है।
उन्होंने कहा कि नरेंद्र सिंह नेगी के नाम से दिया जाने वाला संस्कृति सम्मान हिमालयी राज्यों में संस्कृति, साहित्य, कला और सामाजिक सरोकारों के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली हस्तियों को समर्पित है।
ताई तुगुंग को संस्कृति सम्मान-2026
मुख्यमंत्री ने अरुणाचल प्रदेश के ताई तुगुंग को सम्मान मिलने पर बधाई दी। उन्होंने कहा कि ताई तुगुंग ने न्यीशी भाषा, अरुणाचली हिंदी, रंगमंच, नाटक और सिनेमा के जरिए अरुणाचल प्रदेश की लोक संस्कृति एवं परंपराओं को पहचान दिलाने का काम किया है।
मुख्यमंत्री ने उनके चर्चित नाटक ‘लप्या’ और फिल्म ‘संगी माई’ का भी उल्लेख किया। फिल्म का प्रदर्शन कांस फिल्म फेस्टिवल में भी हुआ है।
अंग्रेजी अनुवाद से वैश्विक पाठकों तक पहुंचेंगे नेगी के गीत
“Mountain Melodies of Narendra Singh Negi” के विमोचन को मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की लोकभाषा और लोकसंस्कृति के संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि अंग्रेजी अनुवाद वाली यह पुस्तक नई पीढ़ी को नरेंद्र सिंह नेगी के जीवन, व्यक्तित्व और उनकी दशकों लंबी संगीत यात्रा से परिचित कराने में मदद करेगी। साथ ही इससे उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को व्यापक और वैश्विक संदर्भ में प्रस्तुत करने का अवसर मिलेगा।
लोकगीत और पारंपरिक वाद्य उत्तराखंड की पहचान
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की लोक संस्कृति विविध परंपराओं से समृद्ध है। जागर, बेड़ा, मांगल, खुदेड़ और छोपाटी जैसे पारंपरिक गीत तथा ढोल, दमाऊ, हुड़का, मशक, तुर्री और भंकोरा जैसे लोक वाद्य प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के कई युवा आधुनिक संगीत के साथ लोकगीतों को नए अंदाज में प्रस्तुत कर रहे हैं। इससे पारंपरिक लोकसंगीत को नई पहचान मिलने का रास्ता तैयार हो रहा है।
275 सांस्कृतिक दल और 226 एकल कलाकार सूचीबद्ध
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य सरकार लोकभाषाओं, लोककलाओं, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि लोक कलाकारों को सम्मान और मंच देने के उद्देश्य से सूचीबद्धकरण की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अब तक 275 सांस्कृतिक दलों और 226 एकल कलाकारों को सूचीबद्ध किया जा चुका है। इससे कलाकारों को अपनी प्रतिभा प्रदर्शित करने के साथ रोजगार के अवसर भी मिल रहे हैं।
कलाकारों को वाद्ययंत्र और वेशभूषा भी उपलब्ध
मुख्यमंत्री के अनुसार ढोल-दमाऊ जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों और उनसे जुड़े कलाकारों को बढ़ावा देने के लिए पात्र कलाकारों को हर वर्ष निःशुल्क वाद्ययंत्र और वेशभूषा उपलब्ध कराई जा रही है।
लोककला और साहित्य को जीवन समर्पित करने वाले वृद्ध तथा आर्थिक रूप से कमजोर कलाकारों, साहित्यकारों और लेखकों की मासिक पेंशन भी 3 हजार रुपये से बढ़ाकर 6 हजार रुपये की गई है। वर्तमान में 180 कलाकार इसका लाभ ले रहे हैं।
गुरु-शिष्य परंपरा के लिए छह माह की कार्यशालाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि पारंपरिक कलाओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए गुरु-शिष्य परंपरा को मजबूत करना जरूरी है। इसी उद्देश्य से लोक कलाकारों के माध्यम से छह माह की प्रशिक्षण कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं।
इन कार्यशालाओं का उद्देश्य नई पीढ़ी को लोककलाओं और परंपराओं से जोड़ना है, ताकि सांस्कृतिक विरासत आगे भी जीवंत बनी रहे।
साहित्यकारों के लिए सम्मान और आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2025 में ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ शुरू किया गया है। इसके तहत 5 लाख रुपये की सम्मान राशि दी जाती है।
वहीं, ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के तहत हिंदी सहित विभिन्न भाषाओं के अब तक 57 साहित्यकारों को सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा ‘साहित्य भूषण पुरस्कार’ भी शुरू किया गया है, जिसकी सम्मान राशि 5 लाख 51 हजार रुपये निर्धारित है।
वर्ष 2022 से अब तक 102 लेखकों की पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान भी दिया गया है।
दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की योजना
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को केवल पर्यटन के लिए ही नहीं, बल्कि साहित्य और संस्कृति के राष्ट्रीय केंद्र के रूप में भी विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है।
इसी क्रम में प्रदेश में दो ‘साहित्य ग्राम’ विकसित करने की योजना पर काम चल रहा है। इन स्थानों पर साहित्यकारों के लिए आवास, पुस्तकालय, अध्ययन केंद्र और संगोष्ठी जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है।
देहरादून में हिमालय सांस्कृतिक केंद्र, आर्ट गैलरी और संग्रहालय जैसी पहलें भी इसी व्यापक सांस्कृतिक दृष्टि का हिस्सा हैं।
लोकभाषाओं और नई पीढ़ी को जोड़ना प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार लोकभाषाओं और बोलियों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभिन्न स्तरों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।
उन्होंने ‘विकल्प रहित संकल्प’ के साथ सांस्कृतिक विरासत और लोक परंपराओं के संरक्षण की प्रतिबद्धता दोहराई। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज, कलाकारों और साहित्यकारों के सहयोग से उत्तराखंड की सांस्कृतिक धरोहर को और मजबूत बनाया जा सकता है।
कार्यक्रम में लोकगायक नरेंद्र सिंह नेगी, साहित्यकार, कलाकार, संस्कृति प्रेमी, विभिन्न सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।










