देहरादून | उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियर्स की हड़ताल के बीच आखिरकार बातचीत की राह खुलती नजर आ रही है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने शनिवार को मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखंड डिप्लोमा इंजीनियर्स महासंघ के प्रतिनिधियों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं को गंभीरता से सुना और समाधान की दिशा में ठोस पहल के संकेत दिए।


⚖️ हड़ताल के बीच बनी संवाद की राह

प्रदेश में लंबे समय से चल रही हड़ताल के चलते विकास कार्यों और जनसेवाओं पर असर पड़ रहा था। ऐसे में यह बैठक उम्मीद की एक नई किरण लेकर आई।
महासंघ के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री के सामने अपनी 27 सूत्रीय मांगें रखीं, जिनमें पदोन्नति, वेतनमान और पुरानी पेंशन बहाली जैसे अहम मुद्दे शामिल रहे।


🧾 मांगों के परीक्षण के लिए बनेगी सब-कमेटी

सीएम धामी ने प्रतिनिधियों की बातों को ध्यानपूर्वक सुनते हुए आश्वासन दिया कि सरकार उनकी मांगों के प्रति पूरी तरह संवेदनशील है।
👉 उन्होंने ऐलान किया कि इन मांगों के समाधान के लिए एक विशेष सब-कमेटी का गठन किया जाएगा, जो हर बिंदु का गहराई से अध्ययन कर जल्द अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।


🤝 “संवाद से ही निकलेगा समाधान” – सीएम धामी

मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि सरकार हर समस्या का हल संवाद और समन्वय के जरिए निकालने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने इंजीनियर्स से अपील की कि वे जनहित को प्राथमिकता देते हुए सकारात्मक रुख अपनाएं, ताकि राज्य के विकास कार्य बाधित न हों।

👉 “राज्य सरकार डिप्लोमा इंजीनियर्स की मांगों के प्रति संवेदनशील है। हम सभी मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से जल्द निकालेंगे।” — पुष्कर सिंह धामी


🚧 जनहित बनाम हड़ताल—क्या निकलेगा बीच का रास्ता?

सरकार और इंजीनियर्स के बीच यह बातचीत ऐसे समय पर हुई है जब जनहित से जुड़े कई काम प्रभावित हो रहे हैं।
अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि सब-कमेटी की रिपोर्ट और अगली वार्ता इस गतिरोध को कितनी जल्दी खत्म कर पाती है।


📌 निष्कर्ष

उत्तराखंड में डिप्लोमा इंजीनियर्स और सरकार के बीच शुरू हुआ यह संवाद सिर्फ एक बैठक नहीं, बल्कि समाधान की दिशा में बढ़ता भरोसा है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि यह पहल हड़ताल खत्म कर विकास की रफ्तार को फिर से पटरी पर ला पाती है या नहीं।