देवभूमि की पहाड़ियों में इस बार सिर्फ हवा नहीं, हौसलों की गूंज भी सुनाई दी… 🏔️🔥
सोमवार को टिहरी के चौरास परिसर में जब “सूर्य देवभूमि चैलेंज 2.0” का समापन हुआ, तो हर चेहरे पर जीत का जज़्बा और आंखों में पहाड़ जैसी दृढ़ता साफ झलक रही थी।
🇮🇳 सेना के जांबाज़ और युवाओं का अद्भुत संगम
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस खास मौके पर कार्यक्रम में शिरकत करते हुए कहा कि यह सिर्फ एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि साहस, अनुशासन और देशभक्ति का जीवंत उदाहरण है।
इस चैलेंज में भारतीय सेना के 100 बहादुर जवानों के साथ देशभर से आए करीब 200 ट्रैकर्स ने हिस्सा लिया—एक ऐसा संगम, जहां देशभक्ति और एडवेंचर एक साथ दौड़ते नजर आए।
🏃♂️ 113 KM की चुनौती: केदार-बद्री ट्रेल पर हौसलों की दौड़
यह हाई एल्टीट्यूड मैराथन कोई आम दौड़ नहीं थी।
हेलंग से कलगोट, फिर मंडल होते हुए उखीमठ तक—113 किलोमीटर का यह कठिन सफर प्रतिभागियों के धैर्य और मानसिक शक्ति की असली परीक्षा था।
बर्फीली हवाओं, ऊबड़-खाबड़ रास्तों और ऊंचाई की चुनौती के बीच हर कदम एक कहानी बनता गया।
🛕 आस्था और एडवेंचर का अनोखा संगम
इस यात्रा में प्रतिभागियों ने केवल दूरी नहीं नापी, बल्कि बद्रीनाथ, केदारनाथ और पंच केदार को जोड़ने वाले ऐतिहासिक और आध्यात्मिक मार्ग का अनुभव भी किया।
यानी यह सफर सिर्फ शरीर का नहीं, आत्मा का भी था।
🚀 युवाओं के लिए प्रेरणा, सीमांत क्षेत्रों के लिए उम्मीद
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे आयोजन युवाओं में नेतृत्व, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करते हैं।
साथ ही यह सीमांत क्षेत्रों में रोजगार और पर्यटन के नए अवसर भी पैदा करते हैं।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व का जिक्र करते हुए कहा कि आज भारत का युवा आत्मविश्वास से भरा हुआ है और एडवेंचर टूरिज्म में देश वैश्विक पहचान बना रहा है।
🌄 उत्तराखंड: एडवेंचर टूरिज्म का उभरता हब
औली की बर्फीली ढलानों से लेकर ऋषिकेश की तेज़ बहती गंगा, मुनस्यारी की ऊंचाइयों से टिहरी झील के विशाल विस्तार तक—उत्तराखंड अब एडवेंचर प्रेमियों का पसंदीदा डेस्टिनेशन बनता जा रहा है।
सरकार एंगलिंग, राफ्टिंग, कयाकिंग, ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और माउंटेनियरिंग जैसी गतिविधियों को योजनाबद्ध तरीके से बढ़ावा दे रही है।
🎯 क्या था इस चैलेंज का मकसद?
गढ़वाल स्काउट के मेजर पुष्पेंद्र सिंह के मुताबिक, इस आयोजन का उद्देश्य पारंपरिक यात्रा मार्गों को पर्यटन से जोड़ना और सीमांत गांवों में नए अवसर पैदा करना है।
16 अप्रैल को बद्रीनाथ में एक्सपो से शुरू होकर 19 अप्रैल को उखीमठ तक पहुंचने वाली इस प्रतियोगिता ने हर प्रतिभागी की असली परीक्षा ली।










