देवभूमि उत्तराखंड में आज एक ऐसा फैसला हुआ, जो सीमाओं की सुरक्षा और गांवों की खुशहाली—दोनों को एक साथ मजबूती देगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की मौजूदगी में मुख्यमंत्री आवास पर ‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ के तहत भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और उत्तराखंड औद्यानिक परिषद के बीच अहम समझौता (MoU) हुआ।
यह समझौता अब सीधे तौर पर पहाड़ के किसानों को देश की सीमाओं की रक्षा कर रहे जवानों से जोड़ देगा।
🇮🇳 जवानों तक पहुंचेगा पहाड़ का ताज़ा स्वाद
इस MoU के तहत अब उत्तराखंड में तैनात ITBP के जवानों को
👉 स्थानीय किसानों से सीधे ताज़े फल और सब्जियां मिलेंगी।
सीएम धामी ने कहा कि इससे एक ओर जवानों को पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन मिलेगा, वहीं दूसरी ओर किसानों को उनकी उपज का उचित दाम भी मिलेगा।
🌄 सीमांत जिलों के किसानों के लिए बड़ी राहत
यह पहल खासतौर पर उन इलाकों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती है, जहां बाजार तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती है—
- चमोली
- उत्तरकाशी
- पिथौरागढ़
- चंपावत
👉 अब इन दूरस्थ क्षेत्रों के किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए भटकना नहीं पड़ेगा, बल्कि एक स्थायी और भरोसेमंद बाजार मिल जाएगा।
💰 करोड़ों की आमदनी का रास्ता
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक:
- ITBP अब तक ₹14.77 करोड़ के स्थानीय उत्पाद खरीद चुका है
- अगर वार्षिक मांग का सिर्फ 25% भी स्थानीय स्तर से लिया जाए, तो किसानों को करीब ₹6 करोड़ की अतिरिक्त आमदनी हो सकती है
👉 यानी यह समझौता सिर्फ कागज़ी नहीं, बल्कि जमीन पर असर दिखाने वाला कदम है।
🌱 “लोकल को ग्लोबल” बनाने की पहल
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह समझौता राज्य सरकार के “स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा” देने के संकल्प को मजबूत करेगा।
👉 इससे किसानों को एक मजबूत सप्लाई चेन मिलेगी और उनकी आर्थिक स्थिति में सीधा सुधार होगा।
🤝 पहले भी मिला है सकारात्मक परिणाम
‘वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम’ के तहत पहले हुए समझौतों के भी अच्छे नतीजे सामने आए हैं। यही वजह है कि अब इस पहल को और व्यापक बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
🧭 किसान और जवान—दोनों को फायदा
सीएम धामी ने साफ कहा—
👉 “राज्य सरकार किसानों के हित और जवानों के कल्याण दोनों के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”
यह समझौता एक ऐसा मॉडल बन सकता है, जहां देश की सुरक्षा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था साथ-साथ मजबूत हो।










