देवभूमि की वादियों में भक्ति और आस्था की अनूठी गूंज उस वक्त और भी गहरी हो गई, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी रेंजर्स ग्राउंड में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में शामिल हुए। संतों के सानिध्य और श्रद्धालुओं की भीड़ के बीच यह आयोजन सिर्फ एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि आध्यात्मिक ऊर्जा का विशाल संगम बन गया। ✨

मुख्यमंत्री ने मंच से बोलते हुए कहा कि “संत समागम और हरि कथा में शामिल होना जीवन का सर्वोच्च सौभाग्य है।” उनके शब्दों में साफ झलक रहा था कि आज के भागदौड़ भरे समय में ऐसी कथाएं न केवल आत्मिक शांति देती हैं, बल्कि जीवन को सही दिशा भी दिखाती हैं।

कथा व्यास ‘धर्मरत्न’ देवकीनंदन ठाकुर जी महाराज के प्रति श्रद्धा व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका जीवन भक्ति, अनुशासन और तपस्या का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि कम उम्र में ही श्रीमद्भागवत को आत्मसात कर समाज को आध्यात्मिक दिशा देना प्रेरणादायक है।

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने विश्व शांति सेवा चैरिटेबल ट्रस्ट के सेवा कार्यों की सराहना करते हुए “प्रियाकांत जू विद्या धन योजना” का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बेटियों की शिक्षा के लिए इस तरह के प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव की मजबूत नींव रखते हैं। 🎯

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण को आध्यात्मिक चेतना का आधार बताते हुए कहा कि यह ग्रंथ भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का अद्भुत संगम है। आज जब इंसान भौतिकता की दौड़ में मानसिक तनाव से जूझ रहा है, ऐसे में भागवत कथा जीवन में संतुलन और शांति का मार्ग दिखाती है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देशभर में चल रहे सांस्कृतिक पुनर्जागरण का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अयोध्या राम मंदिर, केदारनाथ-बद्रीनाथ धाम का पुनर्निर्माण और काशी विश्वनाथ कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं भारत की सांस्कृतिक आत्मा को नई पहचान दे रही हैं।

उत्तराखंड में भी धार्मिक और सांस्कृतिक परियोजनाओं को नई गति मिल रही है। केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण से लेकर हरिपुर कालसी में यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार तक, सरकार लगातार प्रयास कर रही है कि श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाओं के साथ आस्था का अनुभव मिले। 🚩

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना की गई है, जिससे भारतीय संस्कृति, इतिहास और दर्शन को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जा सके। साथ ही, समान नागरिक संहिता और धर्मांतरण विरोधी कानून को उन्होंने राज्य के लिए ऐतिहासिक कदम बताया, जो सामाजिक समरसता और न्याय को मजबूत करते हैं।

अंत में उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने और आध्यात्मिक चेतना को मजबूत करने के लिए लगातार कार्य करती रहेगी।

इस मौके पर संत-महात्माओं, जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति ने आयोजन को भव्य और यादगार बना दिया। 🙏