देहरादून | 14 सितंबर
📚 हिंदी दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हिंदी को केवल संवाद और साहित्य तक सीमित रखने के बजाय विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल दुनिया में भी मजबूत भूमिका देने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि हिंदी देश की राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक पहचान की सशक्त अभिव्यक्ति है।
मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय में आयोजित हिंदी दिवस समारोह में साहित्यिक एवं रचनात्मक लेखन प्रतियोगिताओं के 126 विजेता विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में साहित्यकार, लेखक, भाषाविद, छात्र-छात्राएं और हिंदी प्रेमी मौजूद रहे।
‘विविधता में एकता’ को मजबूत करती है हिंदी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी ने देश की अलग-अलग भाषाओं, बोलियों और संस्कृतियों के बीच संवाद स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके अनुसार, हिंदी दिवस अपनी भाषा, राष्ट्रीय पहचान और सांस्कृतिक विरासत के प्रति गौरव व्यक्त करने का अवसर है।
उन्होंने बताया कि 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को देवनागरी लिपि में संघ की राजभाषा के रूप में स्वीकार किया था।
भारतेंदु हरिश्चंद्र की प्रसिद्ध पंक्तियों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अपनी भाषा केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि सामाजिक और राष्ट्रीय उन्नति का आधार भी है। उन्होंने कहा कि भाषा को सहेजने वाला समाज अपनी संस्कृति और पहचान को भी सुरक्षित रखता है।
AI और डिजिटल दौर में हिंदी की नई भूमिका
🤖 मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डिजिटल तकनीक का है। ऐसे दौर में हिंदी की भूमिका भी व्यापक होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हिंदी को किताबों और कक्षाओं तक सीमित रखने के बजाय विज्ञान, तकनीक, शोध और डिजिटल दुनिया की मजबूत भाषा बनाने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने युवाओं से नई तकनीक और दूसरी भाषाएं सीखने के साथ अपनी हिंदी और मातृभाषा के प्रति गौरव बनाए रखने का आह्वान किया। उन्होंने तकनीक के माध्यम से हिंदी को दुनिया के अलग-अलग मंचों तक पहुंचाने की बात कही।
उत्तराखंड की लोकभाषाओं के संरक्षण पर भी जोर
🏔️ मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की सांस्कृतिक पहचान केवल हिंदी से नहीं, बल्कि यहां की समृद्ध लोकभाषाओं और बोलियों से भी जुड़ी है।
उन्होंने गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, भोटिया, थारू और बंगाणी सहित प्रदेश की विभिन्न लोकभाषाओं और बोलियों को सांस्कृतिक धरोहर बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार हिंदी के साथ क्षेत्रीय भाषाओं, साहित्य और साहित्यकारों के संरक्षण तथा सम्मान के लिए कार्य कर रही है।
उत्तराखंड के साहित्यकारों का किया उल्लेख
मुख्यमंत्री ने भाषा और साहित्य के संबंध को रेखांकित करते हुए कहा कि उत्तराखंड ने हिंदी और भारतीय साहित्य को अनेक महत्वपूर्ण रचनाकार दिए हैं।
उन्होंने राष्ट्रकवि सुमित्रानंदन पंत के साहित्य में हिमालय और प्रकृति के चित्रण का उल्लेख किया। वहीं गौरा पंत ‘शिवानी’ की लेखनी के जरिए उत्तराखंड के लोकजीवन और स्त्री चेतना के देशभर तक पहुंचने की बात कही।
मुख्यमंत्री ने चंद्रकुंवर बर्त्वाल और प्रसून जोशी का भी उल्लेख किया और कहा कि इन रचनाकारों ने उत्तराखंड की साहित्यिक परंपरा को आगे बढ़ाया है।
साहित्यकारों के सम्मान के लिए चल रही योजनाएं
📖 मुख्यमंत्री ने राज्य सरकार की ओर से साहित्य के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों की जानकारी भी दी।
उन्होंने बताया कि ‘दीर्घकालीन साहित्य सेवी सम्मान’ के तहत जीवनभर साहित्य साधना करने वाले साहित्यकारों को पांच लाख रुपये की सम्मान राशि दी जा रही है।
वहीं ‘उत्तराखंड साहित्य गौरव सम्मान’ के तहत हिंदी, गढ़वाली, कुमाऊँनी, जौनसारी, पंजाबी और उर्दू सहित विभिन्न भाषाओं के साहित्यकारों को सम्मानित किया जा रहा है।
‘साहित्य भूषण’ पुरस्कार के माध्यम से उत्कृष्ट साहित्यकारों को 5 लाख 51 हजार रुपये की सम्मान राशि प्रदान की जा रही है।
‘बुके नहीं, बुक देंगे’ पहल का भी जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदी और स्थानीय भाषाओं को डिजिटल माध्यमों से जोड़ने के प्रयास किए जा रहे हैं। इसके साथ ही ‘बुके नहीं, बुक देंगे’ जैसी पहल के जरिए पुस्तक पढ़ने की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि रचनाकारों को पुस्तकों के प्रकाशन के लिए आर्थिक अनुदान देने का काम भी किया जा रहा है। भाषा संस्थान के माध्यम से उत्तराखंड के अप्रकाशित और बिखरे साहित्य को एकत्र करने, संरक्षित करने और प्रकाशित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है।
समारोह में ये लोग रहे मौजूद
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, विधायक सविता कपूर, उमेश शर्मा काऊ, प्रो. जगत सिंह बिष्ट, भाषा विभाग के सचिव उमेश नारायण पांडे, भाषा निदेशक मायावती ढकरियाल सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद रहे।










