हरिद्वार | अगस्त 2026
हरिद्वार के अवधूत मण्डल आश्रम में आयोजित संत समागम में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर अपने विचार रखे। शिवराज सिंह चौहान ने इसे देश की जरूरत बताते हुए संत समाज से जनजागरण में भूमिका निभाने की अपील की।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ किसी राजनीतिक दल का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्रहित, सुशासन और जनकल्याण से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा है। 🇮🇳
बार-बार चुनाव विकास की गति को प्रभावित करते हैं: शिवराज सिंह चौहान
संत समागम को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि देश में बार-बार होने वाले चुनाव विकास और जनसेवा की गति को प्रभावित करते हैं। उनके अनुसार चुनावी प्रक्रिया में समय, धन और प्रशासनिक संसाधनों का बड़ा हिस्सा खर्च होता है।
उन्होंने कहा कि लगातार चुनाव होने के कारण स्कूलों में पढ़ाई प्रभावित होती है और प्रशासनिक मशीनरी चुनावी तैयारियों में व्यस्त हो जाती है। ऐसे में विकास कार्यों पर प्रशासन का ध्यान और समय कम हो जाता है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यदि लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ होते हैं तो संसाधनों और चुनाव से जुड़े समय की बचत हो सकती है। इससे प्रशासन को विकास और जनसेवा से जुड़े कार्यों पर अधिक ध्यान देने का अवसर मिलेगा।
संत समाज से जनजागरण की अपील
केंद्रीय मंत्री ने संत समाज से ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ को लेकर जनता के बीच जागरूकता बढ़ाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि संतों का समाज पर व्यापक प्रभाव है और उनके माध्यम से यह विचार लोगों तक पहुंच सकता है।
उन्होंने संतों से अपने प्रवचनों में इस विषय पर समर्थन व्यक्त करने की अपील करते हुए कहा कि यह किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि पूरे देश से जुड़ा विषय है।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “देश पहले, पार्टी बाद में” और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के संकल्प को पूरा करने के लिए व्यापक जनसमर्थन जरूरी है। 🎯
वंदे मातरम को लेकर भी बोले शिवराज सिंह
संत समागम में शिवराज सिंह चौहान ने वंदे मातरम के पूरे स्वरूप को लेकर भी अपनी बात रखी। उन्होंने इसे देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि आजादी से पहले मुस्लिम लीग के दबाव में वंदे मातरम के दो हिस्से किए गए थे और इसे उन्होंने देश के विभाजन से जोड़कर देखा। उन्होंने कहा कि अब भारत को और विभाजित नहीं होने दिया जाएगा।
केंद्रीय मंत्री ने संत समाज से आग्रह किया कि वे अपने प्रवचनों के माध्यम से वंदे मातरम के पूरे स्वरूप के समर्थन की भावना को लोगों तक पहुंचाएं। उन्होंने कहा कि मातृभूमि की वंदना को लेकर विवाद नहीं होना चाहिए।
सीएम धामी बोले- ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ राष्ट्रहित से जुड़ा विषय
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनाव लोकतंत्र में पर्व के समान हैं। हालांकि, लगातार चलने वाली चुनावी प्रक्रिया का असर शासन और विकास कार्यों पर भी पड़ता है।
उन्होंने कहा कि चुनाव के दौरान आचार संहिता लागू होने के साथ बड़ी संख्या में प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षक, पुलिसकर्मी और सुरक्षा बल चुनाव संबंधी जिम्मेदारियों में लगाए जाते हैं।
सीएम धामी के मुताबिक, यदि एक साथ चुनाव कराने से सार्वजनिक धन और संसाधनों की बचत होती है तथा प्रशासन को जनसेवा और विकास के लिए ज्यादा समय मिलता है, तो यह लोकतांत्रिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी और सुव्यवस्थित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है।
विकसित भारत-2047 के लिए विकास की निरंतर गति जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘एक राष्ट्र-एक चुनाव’ के विषय को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में लाने की दिशा में पहल की है।
उन्होंने कहा कि विकसित भारत-2047 के संकल्प को साकार करने के लिए विकास की गति लगातार बनी रहना जरूरी है। उनके अनुसार भारत तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और ऐसे समय में शासन का अधिकतम समय विकास, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य तथा आधारभूत संरचना से जुड़े कार्यों में लगाया जाना चाहिए।
संतों से समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संत-महात्माओं से इस राष्ट्रीय विषय पर समाज का मार्गदर्शन करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि भारत की सनातन परंपरा में संत समाज ने हमेशा राष्ट्र और समाज को दिशा देने का काम किया है।
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र मजबूत हो, विकास निरंतर जारी रहे, संस्कृति सुरक्षित रहे और राष्ट्र सर्वोपरि रहे—इसी संकल्प के साथ आगे बढ़ना है।










