बीजिंग | 25 अगस्त 2026
भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने मंगलवार को बीजिंग में चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से मुलाकात की। दोनों के बीच सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने के उपायों के साथ भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने पर बातचीत हुई।
यह बैठक ऐसे समय हुई है जब डोभाल चीन के दो दिवसीय दौरे पर हैं और भारत-चीन सीमा प्रश्न पर विशेष प्रतिनिधियों की 25वें दौर की वार्ता भी हो रही है। इस बातचीत में डोभाल की मुलाकात चीन के विदेश मंत्री वांग यी से होनी है। 📢
हान झेंग से डोभाल की क्या बातचीत हुई?
भारतीय दूतावास की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, डोभाल ने 25 अगस्त को चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग से शिष्टाचार मुलाकात की।
बैठक में दोनों पक्षों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने तथा दोनों देशों के संबंधों को मजबूत करने से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की। आर्थिक, राजनीतिक और अन्य द्विपक्षीय क्षेत्रों में संबंध बेहतर करने पर भी जोर दिया गया।
25वें दौर की सीमा वार्ता भी अहम
डोभाल और हान झेंग की मुलाकात के बाद भारत और चीन के बीच विशेष प्रतिनिधियों की सीमा वार्ता का 25वां दौर भी महत्वपूर्ण है। डोभाल भारत की ओर से विशेष प्रतिनिधि हैं, जबकि चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी इस प्रक्रिया में शामिल हैं।
यह प्रक्रिया भारत-चीन सीमा से जुड़े जटिल मुद्दों पर बातचीत के लिए लंबे समय से जारी है। दोनों देशों के बीच सीमा पर शांति बनाए रखना व्यापक द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण मुद्दा रहा है।
LAC पर शांति को लेकर भारत का रुख
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी डोभाल-वांग वार्ता से पहले कहा था कि चीन के साथ अच्छे संबंधों के लिए सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता जरूरी है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी पहले कहा था कि वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता भारत-चीन संबंधों की दिशा के लिए महत्वपूर्ण है।
अरुणाचल प्रदेश को लेकर मतभेद बरकरार
भारत और चीन के बीच बातचीत के बावजूद अरुणाचल प्रदेश को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद कायम हैं। चीन इस क्षेत्र पर अपना दावा करता रहा है और इसे दक्षिण तिब्बत बताता है।
भारत ने चीन की ओर से अरुणाचल प्रदेश के स्थानों के नाम बदलने या नए नाम जारी करने की कोशिशों को खारिज किया है। नई दिल्ली का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा है।
2020 के बाद रिश्तों को सामान्य करने की कोशिश
भारत-चीन संबंधों में 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान क्षेत्र में हुई हिंसक झड़प के बाद तनाव बढ़ा था। इसके बाद दोनों देशों ने सीमा से जुड़े मुद्दों पर सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी रखी।
हाल के महीनों में दोनों पक्षों की ओर से संबंधों को स्थिर करने और संवाद बढ़ाने के प्रयास भी देखने को मिले हैं। डोभाल की मौजूदा यात्रा इसी संवाद प्रक्रिया का हिस्सा है।
शी जिनपिंग के संभावित भारत दौरे पर भी नजर
डोभाल की बीजिंग यात्रा ऐसे समय हुई है जब 12-13 सितंबर को भारत में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित भागीदारी को लेकर भी चर्चा है। हालांकि, उनकी भारत यात्रा की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ऐसे में भारत-चीन के बीच सीमा और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों पर उच्चस्तरीय संवाद को अहम माना जा रहा है।









