देहरादून | 28 अप्रैल 2026
उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र में बुधवार को महिला सशक्तिकरण का मुद्दा जोरदार तरीके से गूंजा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने ‘नारी सम्मान – लोकतंत्र में अधिकार’ विषय पर आयोजित विशेष सत्र को संबोधित करते हुए साफ कहा कि महिलाओं के अधिकारों और सम्मान जैसे गंभीर विषय पर किसी भी प्रकार की राजनीति नहीं होनी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने सदन के सामने महिलाओं को संसद और विधानसभाओं में 33 प्रतिशत आरक्षण देने के उद्देश्य से लाए गए नारी शक्ति वंदन अधिनियम को जल्द लागू करने के लिए केंद्र सरकार के प्रयासों के समर्थन में सर्वसम्मति से संकल्प लेने का प्रस्ताव रखा।
उत्तराखंड की वीरांगनाओं को किया नमन
अपने संबोधन की शुरुआत मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड आंदोलन और राज्य की प्रेरणादायक महिलाओं को नमन करते हुए की। उन्होंने गौरा देवी, टिंचरी माई, जशूली शौक्याण, कुंती वर्मा, भागीरथी देवी, हंसा धनाई, सरला बहन जैसी विभूतियों को याद करते हुए कहा कि उत्तराखंड की धरती सदियों से नारी शक्ति की मिसाल रही है।
उन्होंने कहा कि आज की महिला केवल भागीदारी नहीं, बल्कि नेतृत्व की भूमिका निभा रही है।
“नारी शक्ति वंदन अधिनियम” बताया ऐतिहासिक कदम
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्ष 2023 में लाया गया नारी शक्ति वंदन अधिनियम महिलाओं को राजनीतिक निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी देने वाला ऐतिहासिक कदम है।
उन्होंने कहा कि यह केवल सीटों का आरक्षण नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी को नीति निर्माण में उचित स्थान देने की पहल है।
सीएम धामी ने आरोप लगाया कि इस दिशा में हुए हालिया प्रयासों को विपक्षी दलों ने समर्थन नहीं दिया, जबकि यह महिलाओं के अधिकारों का प्रश्न है।
विपक्ष पर भ्रम फैलाने का आरोप
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर कुछ दल जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दशकों तक सत्ता में रहने वालों ने महिलाओं के हित में ठोस कदम नहीं उठाए, लेकिन जब गंभीर प्रयास हुए तो बाधाएं खड़ी की गईं।
उन्होंने कहा कि देश की महिलाएं अब सब समझ रही हैं और समय आने पर लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगी।
केंद्र सरकार की योजनाओं का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले वर्षों में महिलाओं के उत्थान के लिए कई बड़े कदम उठाए गए हैं। उन्होंने बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, सुकन्या समृद्धि योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना, स्वच्छ भारत मिशन और तीन तलाक कानून जैसे फैसलों को महिला सशक्तिकरण की दिशा में अहम बताया।
उन्होंने कहा कि अब सामान्य परिवारों की बेटियां देश के सर्वोच्च पदों से लेकर सेना, विज्ञान और खेलों तक नई पहचान बना रही हैं।
उत्तराखंड में महिलाओं के लिए बड़े फैसले
सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार भी मातृशक्ति को मजबूत करने के लिए निरंतर काम कर रही है। उन्होंने बताया कि:
- सरकारी सेवाओं में महिलाओं को 30% आरक्षण दिया गया है
- सहकारी समितियों में 33% आरक्षण लागू है
- महिला स्वयं सहायता समूहों को 5 लाख रुपये तक ब्याज मुक्त ऋण दिया जा रहा है
- “लखपति दीदी” अभियान के तहत 2.65 लाख से अधिक महिलाएं आत्मनिर्भर बनीं
- लोहाघाट में राज्य का पहला महिला स्पोर्ट्स कॉलेज बनाया जा रहा है
यूसीसी और महिला अधिकारों पर भी बोले
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड ने देश में सबसे पहले समान नागरिक संहिता (UCC) लागू कर महिलाओं के अधिकारों की रक्षा की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाया है। उन्होंने कहा कि इससे महिलाओं को कई सामाजिक कुरीतियों से राहत मिली है।
सदन से की अपील
अपने संबोधन के अंत में मुख्यमंत्री धामी ने सभी दलों से अपील की कि वे महिलाओं के सम्मान और अधिकार जैसे विषयों पर राजनीति से ऊपर उठकर सकारात्मक रुख अपनाएं।
उन्होंने कहा, “देश की आधी आबादी को उनका पूरा अधिकार मिलना ही सच्चे लोकतंत्र की पहचान है।”










