देहरादून, सेलाकुई — देवभूमि की फिजाओं में भक्ति, आस्था और संस्कृति का रंग उस समय और गहरा हो गया, जब पुष्कर सिंह धामी ने मां भगवती के भव्य जागरण में शामिल होकर प्रदेश की खुशहाली की कामना की। आद्यशक्ति श्री माता वैष्णो देवी धाम सेवा समिति के इस आयोजन में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़ सिर्फ धार्मिक आस्था नहीं, बल्कि उत्तराखंड की जीवंत संस्कृति की झलक भी थी। 🙏
🌄 “सनातन संस्कृति का स्वर्णिम दौर” – सीएम धामी
मुख्यमंत्री धामी ने अपने संबोधन में कहा कि वर्ष 2014 के बाद नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश में सनातन संस्कृति के पुनर्जागरण का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। उन्होंने राम मंदिर अयोध्या के निर्माण को केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत की आस्था और स्वाभिमान की पुनर्स्थापना बताया।
उन्होंने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, केदारनाथ धाम और बद्रीनाथ धाम जैसे तीर्थों का विकास देश की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दे रहा है।
🚩 चारधाम यात्रा में उमड़ी आस्था की लहर
22 अप्रैल से शुरू हुई चारधाम यात्रा में अब तक 3 लाख से ज्यादा श्रद्धालु दर्शन कर चुके हैं। खासकर बाबा केदार के धाम में भक्तों की भारी भीड़ यह साबित कर रही है कि उत्तराखंड की ओर लोगों की आस्था दिन-ब-दिन मजबूत हो रही है।
❄️ शीतकालीन यात्रा और सीमांत क्षेत्रों को नई पहचान
मुख्यमंत्री ने बताया कि 2024 से शुरू हुई शीतकालीन यात्रा ने धार्मिक पर्यटन को सालभर जीवित रखने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। साथ ही आदि कैलाश यात्रा के बाद सीमांत क्षेत्रों में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है, जिससे स्थानीय रोजगार को भी मजबूती मिली है।
🚄 कनेक्टिविटी से बदलेगी तस्वीर
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का जिक्र करते हुए सीएम ने कहा कि अब सफर का समय काफी घटेगा। उन्होंने खुद का अनुभव साझा करते हुए बताया कि हाल ही में वे ढाई घंटे में दिल्ली से देहरादून पहुंचे—जो इस परियोजना की अहमियत को दर्शाता है।
🏔️ हेमकुंड साहिब रोपवे: आसान होगी यात्रा
सिख श्रद्धालुओं के प्रमुख तीर्थ हेमकुंड साहिब के लिए रोपवे परियोजना को भी एक बड़ी सौगात बताया गया। इससे यात्रा सुरक्षित और सुगम होगी, साथ ही क्षेत्रीय विकास को भी गति मिलेगी।
🌿 “देवभूमि का देवत्व हर हाल में रहेगा सुरक्षित”
सीएम धामी ने साफ कहा कि उत्तराखंड की पहचान उसकी संस्कृति और आध्यात्मिकता से है। इसे सुरक्षित रखना हर नागरिक की जिम्मेदारी है—चाहे वह यहां जन्मा हो या इस भूमि को अपनी कर्मभूमि बनाया हो।
उन्होंने यह भी दोहराया कि राज्य सरकार विकास और विरासत, दोनों को साथ लेकर चल रही है—ताकि आने वाली पीढ़ियों को एक मजबूत और संस्कारित उत्तराखंड मिल सके।










