देहरादून | 8 नवंबर 2026
🎖️ दीपावली के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देहरादून में गढ़वाल रेजीमेंट के वीर जवानों के साथ त्योहार की खुशियां साझा कीं। गढ़ीकैंट स्थित गढ़वाल ग्रीन्स प्रशिक्षण मैदान में आयोजित दीपावली मिलन कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने जवानों को अपने हाथों से मिठाई खिलाई और दीपावली की शुभकामनाएं दीं।
इस दौरान उन्होंने सैनिकों के साहस, शौर्य और देश के प्रति समर्पण को नमन करते हुए कहा कि देशवासियों के घरों में जलने वाले दीपों के पीछे जवानों का त्याग और उनके परिवारों का समर्पण भी शामिल है।
🇮🇳 जवानों के बीच पहुंचकर भावुक हुए मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री ने जवानों से आत्मीय बातचीत करते हुए कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट के सैनिकों के बीच आकर उन्हें अपने परिवार के साथ दीपावली मनाने जैसा अनुभव हो रहा है।
उन्होंने कहा कि त्योहारों की खुशियां अपनों के बीच मनाने से ही पूरी होती हैं, लेकिन हमारे सैनिक ऐसे अवसरों पर भी अपने घरों से दूर रहकर देश की सुरक्षा में तैनात रहते हैं।
जब देशवासी अपने परिवारों के साथ दीपावली मनाते हैं, उस समय सैनिक सीमाओं पर मुस्तैद रहकर उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी निभाते हैं। मुख्यमंत्री ने सैनिकों के साथ-साथ उनके परिवारों के त्याग को भी नमन किया।
पिता से सुनी थीं गढ़वाल रेजीमेंट के वीरों की शौर्यगाथाएं
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने सैनिक परिवार से जुड़ी यादें भी साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनका जन्म एक सैनिक परिवार में हुआ है। उनके पिता ने सेना में रहते हुए उन्हें अनुशासन, देशसेवा और कर्तव्यनिष्ठा के संस्कार दिए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके पिता अक्सर गढ़वाल रेजीमेंट के वीर सैनिकों की बहादुरी के किस्से सुनाया करते थे। इनमें महावीर चक्र से सम्मानित अमर शहीद जसवंत सिंह रावत की वीरता और बलिदान का विशेष उल्लेख होता था।
वर्ष 1962 के भारत-चीन युद्ध में नूरानांग मोर्चे पर जसवंत सिंह रावत का अदम्य साहस भारतीय सैन्य इतिहास का गौरवशाली अध्याय है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उसी गौरवशाली रेजीमेंट के जवानों के बीच पहुंचकर उन्हें अपने पिता की सुनाई बातें याद आ रही हैं। यह उनके लिए गर्व और भावुकता से भरा अवसर है।
गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास वीरता और बलिदान की मिसाल
मुख्यमंत्री ने अमर शहीद जसवंत सिंह रावत सहित देश की रक्षा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले सभी वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
उन्होंने कहा कि गढ़वाल रेजीमेंट का इतिहास अदम्य साहस, अनुशासन, राष्ट्रभक्ति और बलिदान की गौरवशाली परंपरा से जुड़ा है। प्रथम और द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर आजादी के बाद हुए विभिन्न युद्धों और सैन्य अभियानों तक इस रेजीमेंट के जवानों ने अपनी वीरता का परिचय दिया है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की वीरभूमि ने हमेशा ऐसे वीर सपूत दिए हैं, जिन्होंने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता और सैन्य शक्ति को मिल रहा बढ़ावा
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सैन्य शक्ति और सामरिक क्षमताओं को मजबूत किए जाने की बात कही।
उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री के अनुसार रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता, सेनाओं के आधुनिकीकरण और स्वदेशी रक्षा उपकरणों के निर्माण पर जोर दिया जा रहा है। इसके साथ ही सीमावर्ती इलाकों में सड़क, पुल, सुरंग और आधुनिक संचार सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिससे सेना की आवाजाही और संचार व्यवस्था को मजबूती मिली है।
शहीद सैनिकों के परिजनों को अब ₹50 लाख की अनुग्रह राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान एवं कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों की जानकारी देते हुए बताया कि शहीद सैनिकों के आश्रितों को दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹50 लाख कर दी गई है।
इसके अलावा शहीद सैनिकों के परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की व्यवस्था के तहत अनेक आश्रितों को सरकारी सेवा में नियुक्ति दी गई है। इस योजना के अंतर्गत आवेदन करने की समय-सीमा भी दो वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है।
देहरादून में सैन्यधाम का निर्माण लगभग पूरा
मुख्यमंत्री ने बताया कि देहरादून में निर्माणाधीन सैन्यधाम का कार्य भी लगभग पूरा हो चुका है।
उन्होंने कहा कि यह सैन्यधाम देश की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सैनिकों के शौर्य, त्याग और समर्पण का प्रतीक बनेगा। राज्य सरकार सैनिक परिवारों की समस्याओं के समाधान और उन्हें हरसंभव सहयोग देने के लिए प्रतिबद्ध है।
कार्यक्रम के समापन पर मुख्यमंत्री ने वीर जवानों और उनके परिवारों के सुख, समृद्धि एवं उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने कहा कि सैनिक सिर्फ देश की सीमाओं की रक्षा नहीं करते, बल्कि करोड़ों देशवासियों के सुरक्षित जीवन और खुशियों के भी रक्षक हैं।











