अयोध्या | 7 नवंबर 2026
उत्तर प्रदेश की राजनीति में राम मंदिर और अयोध्या को लेकर एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के 12 दिसंबर को राम मंदिर दर्शन के प्रस्तावित कार्यक्रम के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बड़ा बयान दिया है।
अयोध्या में दीपोत्सव के मंच से मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन लोगों ने रामभक्तों पर गोलियां चलवाईं और संतों पर लाठीचार्ज कराया, उन्हें अयोध्या आने से पहले रामभक्तों और संतों से माफी मांगनी चाहिए। हालांकि, योगी ने अपने संबोधन में अखिलेश यादव का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया।
रामभक्तों और संतों से माफी मांगने की कही बात
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ शनिवार को अयोध्या में आयोजित 10वें दीपोत्सव समारोह को संबोधित कर रहे थे। इसी दौरान उन्होंने राम जन्मभूमि आंदोलन और अयोध्या के पुराने घटनाक्रमों का जिक्र करते हुए पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधा।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने अयोध्या की उपेक्षा की, रामभक्तों पर गोली चलवाई और संतों पर लाठियां चलवाईं, उनका अयोध्या में स्वागत है, लेकिन उन्हें पहले अपने पुराने कृत्यों के लिए पश्चाताप करना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने रामभक्तों और संतों से माफी मांगने की बात दोहराते हुए कहा कि अयोध्या आने से पहले ऐसा करना चाहिए।
12 दिसंबर को रामलला के दर्शन करेंगे अखिलेश यादव
दरअसल, समाजवादी पार्टी की ओर से घोषणा की गई है कि पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव 12 दिसंबर को अयोध्या पहुंचेंगे। उनके कार्यक्रम में हनुमानगढ़ी और राम मंदिर में दर्शन-पूजन शामिल है।
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता पवन पांडेय के अनुसार, अखिलेश यादव अपनी पत्नी एवं सांसद डिंपल यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अयोध्या जाएंगे।
इसी प्रस्तावित दौरे के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की यह टिप्पणी सामने आई है।
1990 के कारसेवक गोलीकांड का भी किया जिक्र
मुख्यमंत्री के बयान का संदर्भ वर्ष 1990 में राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान कारसेवकों पर हुई पुलिस फायरिंग से जुड़ा है। 30 अक्टूबर और 2 नवंबर 1990 को अयोध्या में कारसेवकों पर गोली चलाई गई थी। उस समय उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री थे।
योगी आदित्यनाथ ने इसी ऐतिहासिक घटनाक्रम को लेकर पूर्ववर्ती सरकारों की भूमिका पर सवाल उठाए।
भगवान राम को बताया भारत की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने भगवान श्रीराम को भारत की सांस्कृतिक पहचान, राष्ट्रीय चेतना और स्वाभिमान का प्रतीक बताया।
उन्होंने कहा कि अयोध्या ने लंबे संघर्ष के बाद अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को फिर से स्थापित किया है। राम मंदिर आंदोलन में कारसेवकों, संतों और समाज के विभिन्न वर्गों के योगदान का भी उन्होंने उल्लेख किया।
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद अखिलेश यादव के प्रस्तावित अयोध्या दौरे को लेकर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।











