🏥 देहरादून में रेयर डिजीज से जूझ रहे बच्चों के इलाज की पहल, 10 बच्चों के लिए ₹9.60 लाख जारी

देहरादून | 26 सितंबर 2026

दुर्लभ बीमारियों से जूझ रहे बच्चों के इलाज में आर्थिक परेशानी बाधा न बने, इसके लिए देहरादून जिला प्रशासन ने सहायता का कदम उठाया है। 10 ऐसे बच्चों के उपचार के लिए CSR फंड से ₹9.60 लाख उपलब्ध कराए गए हैं, जो राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के दायरे में नहीं आते।

जिले में अब तक 32 बच्चों की पहचान की गई है। इनमें से 22 बच्चों का उपचार RBSK के तहत चल रहा है, जबकि बाकी 10 बच्चों के उपचार की व्यवस्था जिला प्रशासन की मदद से की जा रही है। 👶

💰 10 बच्चों के इलाज के लिए CSR फंड से मिली सहायता

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान की पहल पर RBSK के तहत चिन्हित बच्चों के उपचार, रेफरल, आर्थिक सहायता और चिकित्सा प्रगति की नियमित निगरानी की जा रही है।

RBSK के दायरे से बाहर पाए गए 10 बच्चों के इलाज के लिए जिलाधिकारी के निर्देश पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी को CSR फंड से ₹9.60 लाख उपलब्ध कराए गए हैं। इसी धनराशि के माध्यम से इन बच्चों का उपचार कराया जा रहा है।

👨‍⚕️ इन बच्चों का कराया गया उपचार

जिला प्रशासन के सहयोग से प्रेमनगर निवासी 10 वर्षीय उमेश, बैराज निवासी 13 वर्षीय आयशा, डोईवाला निवासी 9 वर्षीय वंशिका, रायपुर निवासी 2 वर्षीय अक्ष, मेहूवाला निवासी 3 वर्षीय आरिस, मांडूवाला निवासी 15 वर्षीय बाबू एवं प्रदीप, मांडूवाला निवासी 20 वर्षीय रंजीत, डोईवाला निवासी 5 वर्षीय शमशाद और जोगीवाला निवासी 5 वर्षीय दिव्यांश का उपचार कराया गया है।

इनमें कुछ बच्चों को सर्जरी के साथ लंबे समय तक नियमित चिकित्सकीय निगरानी की जरूरत है।

🏥 जरूरत के मुताबिक विशेषज्ञ अस्पतालों में इलाज

गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित उन बच्चों का इलाज देश के विभिन्न विशेषज्ञ एवं उच्च चिकित्सा सुविधाओं वाले संस्थानों में कराया जा रहा है, जिनके परिवार महंगे इलाज का खर्च उठाने की स्थिति में नहीं हैं।

रेयर डिजीज के मामलों में उपचार पर अधिक खर्च आने के साथ कई बार लंबे समय तक चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता होती है। ऐसे मामलों में इलाज जारी रखने के लिए समय पर आर्थिक और प्रशासनिक सहायता महत्वपूर्ण होती है।

इसी जरूरत को देखते हुए जिलाधिकारी ने CSR फंड के साथ आवश्यकता पड़ने पर राइफल क्लब फंड से भी आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

📋 इलाज में देरी न हो, अधिकारियों को निर्देश

जिलाधिकारी डॉ. आशीष चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पात्र बच्चों के उपचार से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

दस्तावेजों की पूर्ति, चिकित्सकीय रेफरल, अनुमोदन और वित्तीय सहायता से संबंधित प्रक्रिया निर्धारित समय-सीमा में पूरी करने को कहा गया है।

यदि RBSK के तहत मिलने वाली सहायता के बाद भी किसी बच्चे के इलाज के लिए अतिरिक्त धनराशि की आवश्यकता होती है, तो जिला प्रशासन को राइफल क्लब फंड से आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

डीएम ने स्पष्ट कहा कि “आर्थिक संसाधनों के अभाव में किसी भी बच्चे का उपचार प्रभावित नहीं होना चाहिए।”

🔎 सभी चिन्हित बच्चों की होगी नियमित मॉनिटरिंग

जिलाधिकारी ने गंभीर और दुर्लभ बीमारियों से पीड़ित बच्चों को समय पर गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में बताया।

स्वास्थ्य विभाग, जिला कार्यक्रम अधिकारी और शिक्षा विभाग के संबंधित अधिकारियों को सभी चिन्हित बच्चों के मामलों की नियमित समीक्षा करने तथा उनके अभिभावकों के संपर्क में रहने के निर्देश दिए गए हैं।

📌 बैठक में उपचार की स्थिति की हुई समीक्षा

बैठक में प्रत्येक बच्चे के उपचार की वर्तमान स्थिति, चिकित्सकीय प्रगति, रेफरल प्रक्रिया, आर्थिक सहायता और इलाज से जुड़ी अन्य व्यवस्थाओं की बिंदुवार समीक्षा की गई।

अधिकारियों को आपसी समन्वय, संवेदनशीलता और तत्परता के साथ काम करने को कहा गया, ताकि उपचार में प्रशासनिक या वित्तीय अड़चन न आए।

इसके साथ ही जिले में रेयर डिजीज से पीड़ित बच्चों की पहचान का अभियान लगातार जारी रखने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कोई पात्र बच्चा उपचार और जरूरी सहायता से वंचित न रहे।