🌿 विकास भी, पर्यावरण भी: CM धामी बोले- संतुलन के साथ आगे बढ़ेगा उत्तराखंड, महिलाओं-युवाओं पर फोकस

हल्द्वानी | 25 सितम्बर 2026

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हल्द्वानी में आयोजित ‘जागरण विमर्श-उत्तराखण्ड : आशाएं और चुनौतियां’ कार्यक्रम में राज्य के विकास, रोजगार, पर्यटन, स्थानीय उत्पादों और पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर सरकार की प्राथमिकताएं साझा कीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के विकास की दिशा ऐसी होनी चाहिए जिसमें इकोलॉजी और इकॉनमी एक-दूसरे के पूरक बनें। 🌿

मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है। साथ ही ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की निगरानी व सर्वेक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है।

📈 ₹4 हजार करोड़ से ₹1.11 लाख करोड़ तक पहुंचा बजट

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य गठन के समय उत्तराखंड का बजट करीब ₹4 हजार करोड़ था, जो अब लगभग ₹1.11 लाख करोड़ तक पहुंच गया है।

उन्होंने सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, ऊर्जा, कृषि और उद्यानिकी समेत विभिन्न क्षेत्रों में हुई प्रगति का उल्लेख किया। उनके अनुसार, विकास एक लगातार चलने वाली प्रक्रिया है और इसके साथ जरूरतें व चुनौतियां भी बदलती रहती हैं।

🏔️ पर्यटन और फिल्म डेस्टिनेशन के रूप में बढ़ी पहचान

मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड को पर्यटन और फिल्म डेस्टिनेशन के तौर पर उभरता हुआ राज्य बताया।

उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में प्रदेश में होम-स्टे की संख्या में करीब 50 प्रतिशत वृद्धि हुई है। वहीं राज्य की प्रति व्यक्ति आय में लगभग 41 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि SDG India Index 2023-24 में उत्तराखंड और केरल संयुक्त रूप से पहले स्थान पर रहे।

🛍️ ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ से स्थानीय उत्पादों को बाजार

मुख्यमंत्री ने स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए ‘हाउस ऑफ हिमालयाज’ का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इसके माध्यम से उत्तराखंड के स्थानीय उत्पादों को नई पहचान और बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है।

उनके मुताबिक, प्रदेश की महिलाएं सीमित संसाधनों में गुणवत्तापूर्ण उत्पाद तैयार कर रही हैं। स्वयं सहायता समूहों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए ₹5 लाख तक ब्याजमुक्त ऋण की व्यवस्था की गई है।

महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्तीय मदद और बाजार से जोड़कर स्वरोजगार एवं उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित करने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।

👨‍💼 युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि पारदर्शी व्यवस्था के जरिए युवाओं को रोजगार देना सरकार की प्राथमिकता है।

भर्ती परीक्षाओं में अनियमितताओं पर रोक लगाने के लिए लागू किए गए कठोर नकल विरोधी कानून का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि अनियमितताओं में शामिल 100 से अधिक लोगों के खिलाफ गिरफ्तारी की कार्रवाई हुई है।

मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले कुछ वर्षों में करीब 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में नियुक्ति मिली है। उन्होंने कहा कि युवाओं को सरकारी नौकरी के अलावा स्वरोजगार, स्टार्टअप और उद्यमिता की दिशा में भी आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

🎓 आधुनिक और रोजगारपरक शिक्षा पर फोकस

मुख्यमंत्री ने प्रदेश में उत्तराखंड राज्य अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण की व्यवस्था लागू किए जाने का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य बच्चों को आधुनिक, गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा से जोड़ना है। सरकार की प्राथमिकता प्रत्येक बच्चे को आधुनिक ज्ञान-विज्ञान, तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास के समान अवसर उपलब्ध कराना है।

🕉️ कुंभ मेला 2027 की तैयारियों पर भी चर्चा

हरिद्वार में होने वाले कुंभ मेला-2027 की तैयारियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि संत समाज, अखाड़ों, धार्मिक संगठनों और अन्य हितधारकों के सुझावों के आधार पर व्यवस्थाएं तैयार की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिलें और कुंभ का आयोजन सुरक्षित, सुव्यवस्थित, भव्य एवं दिव्य रूप से संपन्न हो।

🌍 हिमालय की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन

मुख्यमंत्री ने अनियोजित विकास और जलवायु परिवर्तन को उत्तराखंड के लिए बड़ी चुनौती बताया।

उन्होंने कहा कि इकोलॉजी और इकॉनमी को एक-दूसरे का पूरक बनाकर आगे बढ़ने की जरूरत है। हिमालयी क्षेत्रों की संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों की धारण क्षमता का वैज्ञानिक आकलन कराया जा रहा है।

इसके साथ ही ग्लेशियरों और ग्लेशियल झीलों की वैज्ञानिक निगरानी एवं सर्वेक्षण को आगे बढ़ाने की बात भी कही गई।

🏡 विकास का लाभ अंतिम छोर तक पहुंचाने पर जोर

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास सिर्फ बड़ी परियोजनाओं तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसका लाभ समाज के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है।

उन्होंने उत्तराखंड के विकास के साथ प्रदेश की संस्कृति, पहचान और देवभूमि की विशिष्टता को सुरक्षित रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।