नैनीताल में नंदा-सुनंदा की भक्ति में डूबा जनसमूह, CM धामी ने कहा- विकास के साथ विरासत की रक्षा जरूरी

नैनीताल | 22 सितंबर 2026

नैनीताल में आयोजित माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव में मंगलवार को आस्था और लोक संस्कृति का रंग देखने को मिला। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने महोत्सव में शामिल होकर माँ नंदा-सुनंदा के श्रीचरणों में नमन किया और प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। 🙏

इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड को “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है। उन्होंने धार्मिक पर्यटन को रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय उत्पादों के बाजार से जोड़ने की बात भी कही।

सिर्फ मेला नहीं, पीढ़ियों की आस्था और परंपरा का उत्सव

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि नैनीताल का नंदा देवी महोत्सव केवल एक आयोजन नहीं है, बल्कि प्रदेश की आस्था, संस्कृति और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं का हिस्सा है।

माँ नंदा-सुनंदा के स्वागत की परंपरा के साथ लोकगीत, झोड़ा-चांचरी, ढोल-दमाऊं और लोक संस्कृति की अन्य परंपराएं इस महोत्सव के माध्यम से जीवंत होती हैं।

उन्होंने कहा कि जिस समाज को अपनी जड़ों और संस्कृति पर गर्व होता है, वह आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ता है।

नैनीताल में पर्यटन के साथ अध्यात्म की भी पहचान

मुख्यमंत्री ने कहा कि नैनीताल अपनी झील, पहाड़ों और हरियाली के कारण दुनिया भर में जाना जाता है, लेकिन इसकी पहचान केवल पर्यटन तक सीमित नहीं है।

यह क्षेत्र धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। माँ नैना देवी का धाम, हनुमानगढ़ी और कैंची धाम जैसे प्रमुख धार्मिक स्थल यहां मौजूद हैं। वहीं मुक्तेश्वर में देवाधिदेव महादेव का आशीर्वाद मिलता है।

मुख्यमंत्री के अनुसार प्रकृति और अध्यात्म का यह मेल नैनीताल को विशिष्ट पहचान देता है।

“विकास भी और विरासत भी” के मंत्र पर जोर

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि देश में प्राचीन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े प्रमुख स्थलों के विकास पर काम किया जा रहा है। उन्होंने अयोध्या में प्रभु श्रीराम मंदिर, काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक तथा केदारनाथ और बदरीनाथ धाम में हुए विकास कार्यों का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इसी सोच के साथ उत्तराखंड में भी “विकास भी और विरासत भी” के मंत्र को आगे बढ़ाया जा रहा है।

कुमाऊं क्षेत्र में मानसखंड मंदिर माला मिशन के माध्यम से प्रमुख पौराणिक और धार्मिक स्थलों के विकास की बात भी मुख्यमंत्री ने कही। इसके तहत श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के साथ प्राचीन विरासत के मूल स्वरूप को संरक्षित रखने का उद्देश्य बताया गया।

माँ नैना देवी, कैंची धाम और मुक्तेश्वर सहित प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास से धार्मिक पर्यटन को गति मिलने की बात मुख्यमंत्री ने कही।

धार्मिक पर्यटन से युवाओं और मातृशक्ति को अवसर

मुख्यमंत्री ने कहा कि धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होंगे। महिलाओं को स्वरोजगार के बेहतर अवसर मिलने और स्थानीय उत्पादों के लिए व्यापक बाजार उपलब्ध होने की बात भी उन्होंने कही।

उन्होंने कहा कि इससे उत्तराखंड की संस्कृति और परंपराओं को देश-दुनिया तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। 📢

नैनीताल जिले के समग्र विकास को लेकर स्वास्थ्य, शिक्षा, सड़क, पर्यटन और कनेक्टिविटी जैसी आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देने की बात भी मुख्यमंत्री ने कही।

उन्होंने कहा कि पहाड़ में रहने वाले लोगों को बेहतर स्वास्थ्य और शिक्षा के लिए अनावश्यक रूप से दूर न जाना पड़े तथा विकास का लाभ समाज के अंतिम छोर तक पहुंचे, इस दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।

भूमि और सांस्कृतिक पहचान की सुरक्षा का जिक्र

मुख्यमंत्री ने कहा कि विकास के साथ उत्तराखंड की जमीन, संसाधनों और सांस्कृतिक पहचान की रक्षा करना भी सरकार की जिम्मेदारी है।

उन्होंने बताया कि राज्य में भूमि संबंधी कानूनों को मजबूत किया गया है। उनके अनुसार वर्ष 2025 में किए गए संशोधन के तहत 11 पर्वतीय जिलों में बाहरी राज्यों के लोगों द्वारा कृषि एवं उद्यान श्रेणी की भूमि खरीद पर रोक का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार देवभूमि की संस्कृति, पहचान और संसाधनों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है तथा उन्होंने लैंड जिहाद और लव जिहाद जैसी गतिविधियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई किए जाने की बात कही।

समान नागरिक संहिता और महिला अधिकारों पर बात

मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि महिलाओं के अधिकार सुनिश्चित करने और महिला सशक्तिकरण के उद्देश्य से उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता लागू की गई है।

उन्होंने बताया कि उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता 27 जनवरी 2025 से प्रभावी है।

35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में अवसर का दावा

मुख्यमंत्री ने युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकारी भर्तियों में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए नकल विरोधी कानून लागू किया गया है।

उन्होंने कहा कि राज्य में अब तक 35 हजार युवाओं को सरकारी सेवाओं में रोजगार का अवसर मिला है।

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उपस्थित लोगों से पूछा कि पिछले पांच वर्षों में कितने युवाओं को सरकारी नौकरियां मिली हैं। इस पर जनसमूह की ओर से “35 हजार” का उत्तर दिया गया।

मातृशक्ति के उत्पादों के लिए बेहतर बाजार की बात

मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सरकार लगातार काम कर रही है।

उन्होंने स्वयं सहायता समूहों, एकल महिला स्वरोजगार और अन्य माध्यमों से स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं को बिक्री के लिए उचित स्थान और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने की बात कही।

उन्होंने कहा कि महिलाओं के लिए ऐसे केंद्र उपलब्ध कराए जाएंगे, जहां वे अपने उत्पाद उचित मूल्य पर बेच सकें। इससे उनके हुनर को कारोबार में बदलने और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनने के अवसर बढ़ेंगे।

मुख्यमंत्री ने बताया कि महिला स्वयं सहायता समूहों को ₹5 लाख तक का ब्याजमुक्त ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

उन्होंने कहा कि स्थानीय उत्पादों को उचित बाजार और उचित मूल्य मिलने से महिलाओं की आय बढ़ेगी। इससे वे अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के साथ प्रदेश की अर्थव्यवस्था में भी योगदान देंगी।

माँ नंदा-सुनंदा की आरती में शामिल हुए CM

महोत्सव के दौरान मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने माँ नंदा-सुनंदा की आरती में भी भाग लिया। उन्होंने विधिवत आरती कर आशीर्वाद प्राप्त किया और प्रदेशवासियों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की। 🙏

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ उत्तराखंड को देश का श्रेष्ठ राज्य बनाने की दिशा में काम कर रही है।

उन्होंने युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार के अवसर, मातृशक्ति के सशक्तिकरण तथा संस्कृति और विरासत के संरक्षण को सरकार के प्रयासों से जोड़ा।

प्रदेश की खुशहाली के लिए मांगी प्रार्थना

मुख्यमंत्री ने माँ नंदा-सुनंदा से प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि माँ की कृपा उत्तराखंड पर हमेशा बनी रहे और देवभूमि निरंतर खुशहाल एवं समृद्ध बने।

उन्होंने महोत्सव के आयोजन के लिए आयोजकों और इससे जुड़े लोगों को बधाई देते हुए प्रदेशवासियों को माँ नंदा-सुनंदा महोत्सव की शुभकामनाएं दीं।