उत्तराखंड में होम स्टे से बदली गांवों की तस्वीर, 537 लाभार्थियों को ₹79.28 करोड़ की सब्सिडी

देहरादून | 19 सितंबर 2026

उत्तराखंड के पर्वतीय गांवों में पर्यटन को बढ़ावा देने के साथ स्थानीय युवाओं और महिलाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत बीते चार वर्षों में 537 लाभार्थियों को ₹79 करोड़ 28 लाख 18 हजार की धनराशि होम स्टे निर्माण के लिए अनुदान के रूप में दी जा चुकी है।

सरकार के अनुसार, होम स्टे को बढ़ावा मिलने से गांवों में पर्यटन गतिविधियां बढ़ी हैं और रिवर्स पलायन को भी प्रोत्साहन मिला है। करीब साढ़े छह हजार प्रवासियों के गांव लौटने की बात कही गई है, जिनमें 22 फीसदी से अधिक ने होम स्टे व्यवसाय अपनाया है।

🏔️ गांवों तक पहुंच रहा पर्यटन, युवाओं को मिल रहा स्वरोजगार

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में प्रदेश सरकार पर्यटन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जोड़ने पर जोर दे रही है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ गांवों को पर्यटन गतिविधियों का हिस्सा बनाना है।

प्रदेश में अब तक पांच हजार से अधिक होम स्टे संचालित होने का अनुमान बताया गया है। इस पूरी व्यवस्था में होम स्टे योजना को ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों के विस्तार के महत्वपूर्ण माध्यम के तौर पर देखा जा रहा है।

💰 पर्वतीय क्षेत्रों में 50 फीसदी तक अनुदान

दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत पर्वतीय क्षेत्रों में परियोजना लागत का 50 फीसदी, अधिकतम ₹15 लाख तक अनुदान दिया जाता है। वहीं मैदानी क्षेत्रों में परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, अधिकतम ₹7.50 लाख तक अनुदान निर्धारित है। उत्तराखंड पर्यटन विभाग के उपलब्ध दस्तावेजों में भी इन अनुदान प्रावधानों का उल्लेख है।

योजना का लाभ लेने के लिए उत्तराखंड के मूल निवासी पात्र हैं। योजना पूरे राज्य में लागू है, जबकि नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्रों को इसके दायरे से बाहर रखा गया है।

🏡 सारी गांव बना होम स्टे मॉडल का उदाहरण

रुद्रप्रयाग जिले का सारी गांव होम स्टे आधारित पर्यटन गतिविधियों का एक उदाहरण बनकर सामने आया है। यहां 40 से अधिक होम स्टे संचालित हो रहे हैं और बड़ी संख्या में ट्रेकर्स तथा पर्यटक पहुंच रहे हैं।

इससे स्थानीय स्तर पर पर्यटकों के ठहरने की सुविधा के साथ ग्रामीणों के लिए पर्यटन आधारित व्यवसाय का अवसर भी तैयार हुआ है।

🇮🇳 जादुंग में तैयार हो रहा होम स्टे क्लस्टर

उत्तरकाशी जिले में भारत-चीन सीमा के पास स्थित जादुंग गांव को होम स्टे क्लस्टर के रूप में विकसित करने की दिशा में काम किया जा रहा है। यहां छह होम स्टे का निर्माण अंतिम चरण में बताया गया है।

वर्ष 1962 में भारत-चीन युद्ध के दौरान सामरिक कारणों से सेना ने सीमांत नेलांग और जादुंग गांवों को खाली कराया था। अब ये दोनों गांव केंद्र सरकार के वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम में शामिल हैं।

होम स्टे के जरिए इन सीमांत गांवों को पर्यटन गतिविधियों से जोड़ने की योजना बनाई जा रही है।

🎯 ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे योजना से 258 लोगों को लाभ

‘मेरी योजना मेरी सरकार’ कार्यक्रम के तहत ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर होम स्टे अनुदान योजना भी लागू की गई है। इसका उद्देश्य ट्रेकिंग क्षेत्रों में पर्यटन से जुड़े बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाना है।

पिछले चार वर्षों में इस योजना के तहत 258 पात्र लोगों को लाभान्वित किए जाने की जानकारी दी गई है।

उत्तराखंड पर्यटन विभाग के नियमों के अनुसार यह योजना ट्रेकिंग ट्रैक्शन सेंटर के आसपास के गांवों के लिए है और ऐसे भवनों को होम स्टे के रूप में विकसित करने की व्यवस्था है, जहां भवन स्वामी स्वयं अपने परिवार के साथ रहता हो।

📋 होम स्टे योजना के लिए क्या हैं प्रमुख शर्तें?

दीनदयाल उपाध्याय होम स्टे विकास योजना के तहत:

  • योजना पूरे उत्तराखंड में लागू है, लेकिन नगर निगम और नगर पालिका क्षेत्र इसके दायरे से बाहर हैं।
  • उत्तराखंड के मूल निवासी ही योजना का लाभ ले सकते हैं।
  • नए भवन के निर्माण या पुराने भवन के नवीनीकरण के बाद उसे पर्यटन विकास परिषद में पंजीकृत कराना जरूरी है।
  • आवेदन उत्तराखंड सरकार के ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किया जाता है।
  • जिलाधिकारी की अध्यक्षता वाली समिति में आवेदक का साक्षात्कार और प्रस्ताव पर विचार किया जाता है।
  • प्रस्ताव स्वीकृत होने के बाद ऋण स्वीकृति के लिए संबंधित बैंक को भेजा जाता है।

🌿 गांवों की अर्थव्यवस्था से जुड़ रहा पर्यटन

होम स्टे मॉडल के जरिए पर्यटन को केवल प्रमुख शहरों और पारंपरिक पर्यटन स्थलों तक सीमित रखने के बजाय गांवों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। स्थानीय लोग अपने घरों को पर्यटकों के ठहरने के लिए तैयार कर पर्यटन गतिविधियों से सीधे जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा है कि गांवों की खुशहाली को प्रदेश और देश की खुशहाली से जोड़ते हुए पर्यटन को गांव-गांव तक पहुंचाने का लक्ष्य है। उनके अनुसार, स्थानीय लोगों के होम स्टे व्यवसाय से जुड़ने पर युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं और गांव पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र बन रहे हैं।

पुष्कर सिंह धामी
मुख्यमंत्री, उत्तराखण्ड