नई दिल्ली | 4 अगस्त 2026
केंद्र सरकार ने दावा किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में वर्ष 2021 से 2026 के बीच 36 देशों से 274 भगोड़े अपराधियों को भारत वापस लाया गया है। गृह मंत्रालय के अनुसार, भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई को राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाते हुए कानूनी, तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित रणनीति अपनाई गई है।
गृह मंत्रालय ने गिनाईं प्रमुख उपलब्धियां
गृह मंत्रालय के मुताबिक, पहले प्रत्यर्पण प्रक्रिया कई कानूनी और प्रक्रियागत चुनौतियों से प्रभावित रहती थी। सरकार का कहना है कि हाल के वर्षों में खुफिया जानकारी, तकनीक और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के आधार पर भगोड़ों की तलाश और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, इस अभियान का उद्देश्य केवल आर्थिक अपराधियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आतंकवाद, संगठित अपराध, मादक पदार्थों की तस्करी, साइबर अपराध और अन्य गंभीर मामलों में वांछित आरोपियों को भी भारत वापस लाना रहा।
तीन स्तंभों पर आधारित रणनीति
गृह मंत्रालय के अनुसार, केंद्र सरकार ने भगोड़े अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए तीन प्रमुख आधार तय किए—
- वैश्विक स्तर पर समन्वित अभियान
- विभिन्न एजेंसियों के बीच मजबूत तालमेल
- स्मार्ट कूटनीतिक प्रयास
मंत्रालय का कहना है कि इसी रणनीति के तहत प्रत्यर्पण मामलों को मिशन मोड में आगे बढ़ाया गया।
नए कानूनों और कानूनी प्रावधानों पर जोर
गृह मंत्रालय ने कहा कि वर्ष 2019 में NIA संशोधन अधिनियम और UAPA संशोधन अधिनियम लागू किए गए। इसके बाद वर्ष 2024 में लागू तीन नए आपराधिक कानूनों में भगोड़े अपराधियों से जुड़े विशेष प्रावधान शामिल किए गए।
मंत्रालय के अनुसार, पहली बार भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 355 और 356 में ‘ट्रायल इन एब्सेंटिया (Trial in Absentia)’ का प्रावधान किया गया, जिससे आरोपी की अनुपस्थिति में भी कानूनी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।
इंटरपोल और ‘भारतपोल’ से बढ़ा समन्वय
गृह मंत्रालय के अनुसार, जनवरी 2025 में ‘भारतपोल (BHARATPOL)’ शुरू किया गया, जिसके माध्यम से 1,400 से अधिक केंद्रीय और राज्य स्तरीय एजेंसियों को इंटरपोल नेटवर्क से जोड़ा गया।
सरकार का दावा है कि इससे विभिन्न एजेंसियों के बीच सूचना साझा करने का समय पहले की तुलना में काफी कम हुआ और कई मामलों में जानकारी 3 से 10 दिनों के भीतर उपलब्ध होने लगी।
रेड कॉर्नर नोटिस जारी होने में भी बढ़ोतरी
गृह मंत्रालय के अनुसार, पिछले तीन वर्षों में 401 भगोड़े अपराधियों के खिलाफ इंटरपोल द्वारा रेड कॉर्नर नोटिस जारी किए गए।
वर्षवार आंकड़ों के अनुसार—
- 2022: 40
- 2023: 100
- 2024: 107
- 2025: 112
- 2026 (अब तक): 182
PMLA के तहत ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त होने का दावा
गृह मंत्रालय ने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग निरोधक कानून (PMLA) के सख्त क्रियान्वयन के तहत 2019 से 2026 के बीच भगोड़े अपराधियों की ₹17,874 करोड़ की संपत्ति जब्त की गई।
इसके अलावा इसी अवधि में ₹18,762 करोड़ की सफल Restitution (वापसी) होने का भी दावा किया गया, जिसमें देश छोड़कर भागे आर्थिक अपराधियों से संबंधित धन शामिल है।
ऑपरेशन ‘त्रिशूल’ के जरिए तकनीक का उपयोग
मंत्रालय के अनुसार, ‘ऑपरेशन त्रिशूल’ के तहत विदेशों में छिपे भगोड़ों की पहचान और लोकेशन का पता लगाने के लिए सैटेलाइट तकनीक, डिजिटल फुटप्रिंट, सर्विलांस और जियो-लोकेशन ट्रैकिंग का उपयोग किया गया।
सरकार का कहना है कि कई मामलों में आरोपियों द्वारा नाम और पहचान बदलने के बावजूद तकनीकी विश्लेषण और प्रोफाइल मैपिंग के माध्यम से उन्हें चिन्हित किया गया।
किन मामलों के आरोपी वापस लाए गए
गृह मंत्रालय के अनुसार, भारत वापस लाए गए 274 भगोड़ों में वित्तीय अपराध, आतंकवाद, संगठित अपराध, हत्या, डकैती, यौन अपराध, पॉक्सो, मादक पदार्थ तस्करी, मानव तस्करी और साइबर अपराध जैसे मामलों में वांछित आरोपी शामिल हैं।
सरकार का दावा
गृह मंत्रालय ने कहा कि भगोड़ों के खिलाफ यह अभियान केवल प्रत्यर्पण तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें विभिन्न केंद्रीय एजेंसियों, राज्य पुलिस, खुफिया संस्थाओं और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से समन्वित कार्रवाई की जा रही है। मंत्रालय के अनुसार, इस दिशा में कानूनी तैयारी, कूटनीतिक प्रयास और एजेंसियों के बीच तालमेल को लगातार मजबूत किया गया है।









