देहरादून | 13 जुलाई, 2026
देवभूमि उत्तराखंड से आस्था, संस्कृति और राष्ट्रीय गौरव का संदेश लेकर सोमवार को हर्रावाला रेलवे स्टेशन से ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ के अवसर पर वेरावल (सोमनाथ) के लिए विशेष रेल यात्रा का शुभारंभ हुआ। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरी झंडी दिखाकर इस विशेष ट्रेन को रवाना किया और यात्रा पर निकले लगभग 700 श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए इसे केवल तीर्थ यात्रा नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और सनातन परंपरा से जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। 🚆🙏
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस छह दिवसीय यात्रा में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी माताएं-बहनें, विभिन्न सरकारी योजनाओं के लाभार्थी, संत समाज और समाज के अनेक वर्गों के प्रतिनिधि शामिल हैं। उन्होंने संस्कृति विभाग की इस पहल की सराहना करते हुए सभी यात्रियों की सुरक्षित, सुखद और मंगलमय यात्रा की कामना भगवान सोमनाथ और बाबा केदार से की।
🛕 सोमनाथ भारत के आत्मविश्वास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का प्रतीक
मुख्यमंत्री ने कहा कि द्वादश ज्योतिर्लिंगों में शामिल सोमनाथ मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारत के अटूट विश्वास, सांस्कृतिक गौरव और अदम्य स्वाभिमान का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि अनेक ऐतिहासिक आक्रमणों और चुनौतियों के बावजूद सोमनाथ ने यह संदेश दिया कि भारत हर कठिनाई के बाद और अधिक मजबूती के साथ आगे बढ़ता है।
उन्होंने कहा कि ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ श्रद्धालुओं को अपनी गौरवशाली विरासत, सनातन संस्कृति और राष्ट्रबोध से जोड़ने का विशेष अवसर प्रदान करता है।
🕉️ देश में सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण का नया दौर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और धार्मिक स्थलों के पुनर्विकास का व्यापक अभियान चल रहा है। अयोध्या, काशी विश्वनाथ, केदारनाथ, महाकाल और सोमनाथ जैसे तीर्थस्थलों का विकास भारत की सांस्कृतिक चेतना को नई ऊर्जा दे रहा है।
उन्होंने कहा कि मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं, बल्कि भारतीय सभ्यता, संस्कृति और आध्यात्मिक परंपरा की जीवंत पहचान हैं।
🌿 देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी बनाने की दिशा में तेजी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड सरकार भी देवभूमि को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के लक्ष्य पर तेजी से काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि केदारखंड और मानसखंड के मंदिरों के सौंदर्यीकरण, हरिद्वार-ऋषिकेश कॉरिडोर, शारदा कॉरिडोर और हरिपुर कालसी स्थित यमुनातीर्थ के पुनरुद्धार जैसी महत्वपूर्ण परियोजनाओं पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
साथ ही भारतीय संस्कृति, दर्शन और इतिहास पर शोध को बढ़ावा देने के लिए दून विश्वविद्यालय में ‘सेंटर फॉर हिन्दू स्टडीज’ की स्थापना भी की गई है।
📍 सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार देवभूमि की सांस्कृतिक पहचान और मूल स्वरूप की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि इसी उद्देश्य से राज्य में धर्मांतरण विरोधी कानून और दंगारोधी कानून लागू किए गए हैं। साथ ही सरकारी भूमि से अवैध अतिक्रमण हटाने का अभियान भी चलाया गया, जिसके तहत 13 हजार एकड़ से अधिक भूमि को मुक्त कराया गया।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में समान नागरिक संहिता लागू कर सभी नागरिकों के लिए समान कानून और समान न्याय व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए भी कई कदम उठाए गए हैं।
🤝 यात्री बनें उत्तराखंड की संस्कृति और संस्कार के दूत
मुख्यमंत्री ने यात्रा पर जा रहे सभी श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि वे जहां भी जाएं, वहां देवभूमि उत्तराखंड की संस्कृति, संस्कार और ‘अतिथि देवो भवः’ की भावना का परिचय दें।
उन्होंने कहा कि यह यात्रा केवल सोमनाथ के दर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि उत्तराखंड की आध्यात्मिक विरासत और सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतिनिधित्व करने का भी अवसर है। उन्होंने यात्रियों से अपने व्यवहार और आचरण से राज्य की सकारात्मक छवि को और मजबूत करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर विधायक बृज भूषण गैरोला, मेयर सौरभ थपलियाल सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिक उपस्थित रहे।










