📍 देहरादून | 24 अप्रैल 2026
देवभूमि के मुख्यमंत्री आवास में शुक्रवार को एक ऐसी अहम बैठक हुई, जिसने सिर्फ उत्तराखंड ही नहीं बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करने का संकेत दे दिया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में पहली बार “हिमालयी राज्यों से समन्वय एवं नीति निर्धारण परिषद” की बैठक आयोजित हुई—जहां विकास, पर्यावरण और आजीविका को एक साथ लेकर चलने की रणनीति पर गहन मंथन हुआ।
🏔️ “हिमालय का भविष्य, मिलकर ही होगा मजबूत”—CM धामी
बैठक में मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा कि हिमालयी राज्यों की चुनौतियां अलग-अलग नहीं, बल्कि एक जैसी हैं—चाहे वह जलवायु परिवर्तन हो, आपदा प्रबंधन या सीमावर्ती इलाकों का विकास।
👉 “अगर अनुभव साझा होंगे, तो नीतियां भी ज्यादा प्रभावी बनेंगी,” उन्होंने जोर देकर कहा।
उनका फोकस साफ था—इकॉनोमी और ईकोलॉजी का संतुलन, यानी विकास भी हो और प्रकृति भी सुरक्षित रहे।
🌿 बेस्ट प्रैक्टिस मॉडल अपनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने सुझाव दिया कि जिन हिमालयी राज्यों में किसी क्षेत्र में बेहतर काम हुआ है, उसे “बेस्ट प्रैक्टिस” के तौर पर अपनाया जाए।
इससे न सिर्फ समय बचेगा बल्कि बेहतर परिणाम भी मिलेंगे।
उन्होंने उत्तराखंड की खासियत—जैव विविधता, औषधीय पौधों और प्राकृतिक संसाधनों—को विकास का मजबूत आधार बताया।
💧 जल संरक्षण और पर्यावरण पर फोकस
बैठक में जल संरक्षण और जल स्रोतों के पुनर्जीवन को लेकर गंभीर चर्चा हुई।
👉 सरकार की प्राथमिकता साफ है—सूखते जल स्रोतों को फिर से जिंदा करना और हिमालयी पारिस्थितिकी को सुरक्षित रखना।
इसके लिए विशेषज्ञों और राष्ट्रीय संस्थानों के सहयोग को भी जरूरी बताया गया।
⚠️ बड़े मुद्दों पर गहन मंथन
बैठक में जिन अहम विषयों पर चर्चा हुई, वे सीधे आम जनता और आने वाली पीढ़ियों से जुड़े हैं:
- जलवायु परिवर्तन
- आपदा प्रबंधन
- पर्यटन विकास
- जैव विविधता संरक्षण
- सीमावर्ती क्षेत्रों का विकास
🧠 विशेषज्ञों की राय: “अब वक्त है संयुक्त रणनीति का”
बैठक में मौजूद विशेषज्ञों और जनप्रतिनिधियों ने भी कई अहम सुझाव दिए:
- किशोर उपाध्याय ने हिमालयी नदियों के जल स्तर के वैज्ञानिक अध्ययन पर जोर दिया
- अनिल रतूड़ी ने संगठित प्रयासों से आजीविका बढ़ाने की बात कही
- विशेषज्ञों ने ज्वाइंट टास्क फोर्स बनाने का सुझाव भी दिया
- बुग्यालों और जड़ी-बूटियों के संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात उठी










