अग्निवीर कैडेट्स से मिले CM, बोले—हर अग्निवीर के भविष्य की सुरक्षा सरकार की जिम्मेदारी 🇮🇳

देवभूमि उत्तराखण्ड की अस्थायी राजधानी भराड़ीसैंण में मंगलवार का दिन युवाओं के उत्साह और देशभक्ति की भावना से सराबोर रहा। यहां मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सेना में भर्ती होने की तैयारी कर रहे अग्निवीर कैडेट्स से सीधे संवाद किया। यह संवाद केवल सवाल-जवाब तक सीमित नहीं रहा, बल्कि युवाओं के सपनों, अनुशासन और देशसेवा के जज़्बे को समझने का एक प्रेरक अवसर बन गया।

मुख्यमंत्री ने कैडेट्स के सवालों का सहजता और खुलेपन से जवाब देते हुए कहा कि अग्निवीरों का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों में अग्निवीरों के लिए 10 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण की व्यवस्था की है, ताकि सेवा पूरी होने के बाद युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर मिल सकें।


सैनिक परिवार से मिली प्रेरणा

संवाद के दौरान कैडेट शंकर सिंह राणा ने मुख्यमंत्री से पूछा कि सैनिक पुत्र होने के बावजूद क्या कभी उनका मन सेना में जाने का हुआ था?

इस पर मुख्यमंत्री ने भावुक होते हुए कहा कि सेना में जाना देश की सबसे सम्मानजनक सेवाओं में से एक है। उन्होंने बताया कि अपने पिता के साथ रहते हुए उन्होंने सेना के अनुशासन, त्याग और कर्तव्यनिष्ठा को करीब से देखा है।

मुख्यमंत्री ने कहा—
“मैं अपने जीवन को भी एक सैनिक की तरह अनुशासित और समर्पित मानकर काम करता हूं। जिस भावना से हमारे जवान देश की रक्षा करते हैं, उसी भावना से मैं प्रदेश की देवतुल्य जनता की सेवा करने की कोशिश करता हूं।”


“प्रदेश की जनता ही मेरा परिवार”

कैडेट हिमांशु रौतेला ने मुख्यमंत्री से पूछा कि व्यस्त राजनीतिक जीवन के बीच वे अपने परिवार को समय कैसे दे पाते हैं।

इस पर मुख्यमंत्री ने मुस्कराते हुए कहा कि जब कोई व्यक्ति सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होता है तो उसकी जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के हर नागरिक को वे अपने परिवार का हिस्सा मानते हैं और हर गांव उन्हें अपना लगता है।


अग्निवीरों के लिए रोजगार के अवसर

कैडेट ओ.पी. कण्डारी ने सवाल उठाया कि सेवा पूरी होने के बाद अग्निवीरों के रोजगार के लिए सरकार क्या कर रही है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने वर्दीधारी पदों में 10% क्षैतिज आरक्षण का प्रावधान किया है। इसके अलावा केंद्र सरकार भी कई क्षेत्रों में अग्निवीरों को अवसर दे रही है।

उन्होंने स्पष्ट कहा—
“हर अग्निवीर का भविष्य सुरक्षित करना सरकार की जिम्मेदारी है और इसके लिए लगातार कदम उठाए जा रहे हैं।”


“धाकड़ धामी” नाम कैसे पड़ा?

कैडेट रितेश पंवार ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उनकी पहचान “धाकड़ धामी” के रूप में क्यों बनी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि जनप्रतिनिधि का व्यवहार हमेशा सौम्य होना चाहिए, लेकिन राज्य और जनता के हित में कभी-कभी साहसिक फैसले लेने पड़ते हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि उत्तराखण्ड देश का पहला राज्य बना जिसने समान नागरिक संहिता (UCC) लागू की। इसके अलावा राज्य में सख्त नकल विरोधी कानून और दंगा रोधी कानून भी लागू किया गया है।


मुस्कान का राज भी बताया

कैडेट अमन सेमवाल ने मुख्यमंत्री से पूछा कि उनके चेहरे पर हमेशा मुस्कान क्यों रहती है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्हें काम करने की ऊर्जा प्रदेश की जनता के आशीर्वाद और विश्वास से मिलती है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के समग्र विकास के लिए लगातार काम कर रही है और आज कई क्षेत्रों में उत्तराखण्ड देश में अग्रणी बन रहा है।


उत्तराखण्ड और सेना का गहरा रिश्ता

इस मौके पर मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि उत्तराखण्ड की सबसे बड़ी पहचान यह है कि यहां लगभग हर परिवार से कोई न कोई सदस्य सेना या अर्द्धसैनिक बलों में सेवा देता है।

उन्होंने कहा कि देश के सैनिक सीमांत और ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों की कठिन परिस्थितियों में भी देश की रक्षा करते हैं, जो पूरे राष्ट्र के लिए गर्व की बात है।

मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि देहरादून में एक भव्य सैन्यधाम बनाया जा रहा है, जहां राज्य के वीर शहीदों की गाथाएं और स्मृतियां हमेशा के लिए संजोई जाएंगी।


भारत की सेना तेजी से हो रही आत्मनिर्भर

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय सेना तेजी से आत्मनिर्भर बन रही है। रक्षा क्षेत्र में भारत का निर्यात बढ़ रहा है और सेना का लगातार आधुनिकीकरण किया जा रहा है।

कार्यक्रम में यूथ फाउंडेशन के संस्थापक कर्नल अजय कोठियाल (सेनि.), पूर्व सैनिक और बड़ी संख्या में अग्निवीर कैडेट्स मौजूद रहे।