🔴 विकसित उत्तराखंड से विकसित भारत तक
विजन 2047 पर मुख्यमंत्री धामी का प्रशासन को स्पष्ट संदेश 🎯
देहरादून | शुक्रवार
उत्तराखंड को अगले 25 वर्षों में किस दिशा में ले जाना है—इसका खाका शुक्रवार को सिविल सर्विसेस इंस्टीट्यूट में साफ़ तौर पर उभर कर सामने आया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चिंतन शिविर एवं डायलॉग ऑन विज़न 2047 में राज्य के शीर्ष प्रशासनिक अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि विकसित भारत का सपना तभी साकार होगा, जब उत्तराखंड अपने संसाधनों, सामर्थ्य और स्थानीय जरूरतों के अनुसार विकसित होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दो दिवसीय चिंतन शिविर केवल विचार-विमर्श का मंच नहीं, बल्कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की ठोस, व्यवहारिक और समयबद्ध रणनीति तैयार करने की शुरुआत है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत संकल्प को जमीन पर उतारने में उत्तराखंड की भूमिका निर्णायक होगी।
🌄 हर राज्य विकसित होगा, तभी भारत विकसित बनेगा
मुख्यमंत्री धामी ने दो टूक कहा कि विकसित भारत कोई एक सरकार या एक कार्यकाल का एजेंडा नहीं है, बल्कि एक दीर्घकालिक राष्ट्रीय दृष्टि है—जिसमें आर्थिक मजबूती के साथ सामाजिक समरसता, तकनीकी प्रगति, सांस्कृतिक संरक्षण और आत्मनिर्भरता शामिल है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि विकास का अर्थ केवल आंकड़ों की बढ़ोतरी नहीं, बल्कि मानव-केंद्रित, समावेशी और टिकाऊ बदलाव है—जहां शासन पारदर्शी हो, अवसर समान हों और आम नागरिक खुद को व्यवस्था का हिस्सा महसूस करे।
🏛️ विजन 2047 में प्रशासनिक तंत्र की सबसे बड़ी भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि नीति निर्माण से लेकर ज़मीनी क्रियान्वयन तक प्रशासन की संवेदनशीलता और दक्षता ही सफलता तय करती है। अधिकारियों से अपील करते हुए उन्होंने कहा—
“आपका काम सिर्फ़ फाइलें निपटाना नहीं, बल्कि नतीजे देना है। हर योजना लक्ष्य-आधारित और जन-केंद्रित होनी चाहिए।”
उन्होंने नवाचार, पारदर्शिता, समयबद्धता और जवाबदेही को प्रशासन की पहचान बताया। साथ ही यह भी कहा कि योजनाओं की सफलता इस बात से तय होगी कि किसान की आय बढ़ी या नहीं, युवाओं को रोजगार मिला या नहीं, महिलाओं को समान अवसर मिले या नहीं।
🤝 ‘सोलो प्लेयर’ नहीं, ‘टीम उत्तराखंड’ बनिए
पर्वतीय राज्य की चुनौतियों का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि यही चुनौतियां उत्तराखंड की सबसे बड़ी ताकत बन सकती हैं, अगर नीतियां स्थानीय भूगोल और जरूरतों के अनुसार बनाई जाएं।
उन्होंने अधिकारियों से कहा कि विभागीय सीमाओं से ऊपर उठकर विजन 2047 के लिए साझा रोडमैप तैयार करें और “टीम उत्तराखंड” की भावना से काम करें।
साथ ही जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार कार्यक्रम के दौरान सामने आई समस्याओं को गंभीरता से लेकर उनका समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
🌱 विकसित उत्तराखंड की नींव: सुशासन, तकनीक और जनकल्याण
मुख्यमंत्री धामी ने बताया कि विकसित उत्तराखंड की नींव तीन मजबूत स्तंभों पर टिकी होगी—
-
सुशासन: समय पर निर्णय, पारदर्शी योजनाएं और जवाबदेह प्रशासन
-
तकनीक व नवाचार: ई-गवर्नेंस, AI और डेटा एनालिटिक्स का प्रभावी उपयोग
-
संतुलित विकास: पर्यावरण संरक्षण के साथ आर्थिक प्रगति
उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक का लाभ दूरस्थ और सीमांत गांवों तक पहुंचना चाहिए। साथ ही आपदा प्रबंधन को विकास योजनाओं का अभिन्न हिस्सा बनाने पर भी जोर दिया।
📊 रुपया खर्च नहीं, असर दिखना चाहिए
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि हर योजना का आउटपुट और आउटकम तय हो।
“सिर्फ बजट खर्च हो जाना सफलता नहीं है, असली कसौटी जनता के जीवन में आया बदलाव है।”
उन्होंने यह भी कहा कि लालफीताशाही और जनता की अनसुनी, प्रशासन पर भरोसे को कमजोर करती है—और विश्वास ही शासन की सबसे बड़ी पूंजी है।
📝 संबोधन के बाद भी मंथन में सक्रिय रहे मुख्यमंत्री
उद्घाटन सत्र के बाद भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी मंच से नीचे आकर हॉल की पहली पंक्ति में बैठ गए।
वह विभिन्न विषयों पर चल रही परिचर्चाओं को ध्यान से सुनते रहे और महत्वपूर्ण सुझावों को स्वयं नोट करते दिखे—जो इस बात का संकेत है कि यह संवाद सिर्फ औपचारिकता नहीं था।
इस अवसर पर सेतु आयोग के CEO शत्रुघ्न सिंह, प्रमुख सचिव आर.के. सुधांशु, डॉ. आर. मीनाक्षी सुंदरम, नीति आयोग की डॉ. नीलम पटेल, वरिष्ठ IAS अधिकारी और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ मौजूद रहे।









