गढ़वाली सिनेमा ने बदला इतिहास, थिएटर नहीं अब ओटीटी बना नया मंच

पहाड़ की कहानी ने पाई डिजिटल आवाज, “बिरणी आंखी” से गढ़वाली सिनेमा ने रचा नया अध्याय

कोटद्वार | 16 जनवरी 2026

उत्तराखंड की मिट्टी में पली-बढ़ी कहानियों के लिए यह दिन खास है। गढ़वाली सिनेमा ने पहली बार सिनेमा हॉल की सीमाओं को तोड़ते हुए डिजिटल दुनिया में अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। उत्तराखंड के पहले ओटीटी प्लेटफॉर्म “वीडियोज अलार्म” पर गढ़वाली फिल्म “बिरणी आंखी” की रिलीज के साथ ही क्षेत्रीय फिल्मों के इतिहास में एक नई शुरुआत हो गई है।

“बिरणी आंखी” सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि पहाड़ की ज़िंदगी की सच्ची झलक है। रिश्तों की नज़ाकत, अपनों से जुड़ा दर्द, प्रेम की गहराई और आत्मसम्मान की लड़ाई इस फिल्म की आत्मा है। कहानी आम पहाड़ी लोगों के जीवन से निकली हुई लगती है, जो हर उस दर्शक को छू जाती है, जिसने पहाड़ को जिया है या उससे जुड़ाव महसूस किया है। 🏔️

फिल्म के निर्माता दीपक देव सागर और निर्देशक फैसल सैफी ने अनुभव और संवेदनशीलता के साथ एक ऐसी कहानी परदे पर उतारी है, जो बनावटी नहीं लगती, बल्कि सच्चाई के बेहद करीब महसूस होती है। मुख्य भूमिकाओं में कोटद्वार के सूरज कोटनाला, शिवानी भट्ट और अंशूल भारद्वाज ने अपने सहज अभिनय से किरदारों को जीवंत बना दिया है। उनका अभिनय फिल्म को मजबूती देता है और कहानी से दर्शकों को बांधे रखता है। 🎬

3 जनवरी को कोटद्वार में फिल्म का पोस्टर, टीज़र और गीत रिलीज किया गया था, जिसके बाद से ही दर्शकों में उत्सुकता बनी हुई थी। अब जब “बिरणी आंखी” पूरी फिल्म के रूप में सामने आई है, तो यह उम्मीदों पर खरी उतरती दिखाई दे रही है। फिल्म की शूटिंग कोटद्वार, दुगड्डा, लैंसडाउन, आमसौड़, फतेहपुर और दिल्ली जैसे लोकेशनों पर हुई है, जो कहानी को वास्तविक परिवेश प्रदान करते हैं।

इस फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे देखने के लिए दर्शकों को सिनेमा हॉल तक जाने की मजबूरी नहीं है। “वीडियोज अलार्म” ओटीटी प्लेटफॉर्म पर यह फिल्म अब मोबाइल और स्मार्ट टीवी पर, घर बैठे परिवार के साथ देखी जा सकती है। 📱📺
आज जब पहाड़ के कई इलाकों में सिनेमा हॉल नहीं हैं, ऐसे में यह प्लेटफॉर्म सिनेमा को सीधे लोगों के घरों तक पहुंचा रहा है।

“वीडियोज अलार्म” आज भारत सहित 18 देशों में देखा जा रहा है। ओटीटी के हेड वैभव गोयल के अनुसार, फिल्म के रिलीज होते ही ऐप के डाउनलोड में तेज़ी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है, खासकर विदेशों में रहने वाले उत्तराखंडवासियों के बीच इसका खासा क्रेज देखने को मिल रहा है। यह संकेत है कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़ा कंटेंट सीमाओं से परे भी दर्शकों को जोड़ रहा है।

इस ओटीटी प्लेटफॉर्म पर इससे पहले असगार, मीठी मां कु आशीर्वाद, रत्ब्याण, धरती म्यारा कुमाऊं की और शहीद जैसी क्षेत्रीय फिल्में रिलीज हो चुकी हैं। आने वाले समय में कई नई फिल्में और वेब सीरीज़ भी दर्शकों के सामने लाई जाएंगी। यह ऐप एंड्रॉइड, iOS और एंड्रॉइड टीवी पर उपलब्ध है, जिसे मात्र 99 रुपये प्रतिवर्ष में सब्सक्राइब किया जा सकता है।

गढ़वाल, कुमाऊं और जौनसार की खुशबू समेटे “वीडियोज अलार्म” आज उत्तराखंड की बोली, संस्कृति और स्थानीय कलाकारों को न सिर्फ प्रदेश में, बल्कि देश और विदेश में पहचान दिलाने का माध्यम बन रहा है। “बिरणी आंखी” इसी डिजिटल बदलाव की पहली मजबूत कड़ी बनकर सामने आई है। 🎯