नैनीताल | 25 दिसंबर 2025 (सूवि)
पर्यटन नगरी नैनीताल गुरुवार को उल्लास, संस्कृति और विकास के रंगों में रंगी नजर आई, जब मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी ने भव्य विंटर कार्निवाल में प्रतिभाग किया। बर्फीली हवाओं के बीच झील नगरी में उमड़ा जनसैलाब इस बात का प्रमाण था कि शीतकालीन पर्यटन अब उत्तराखंड की नई पहचान बनता जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर कहा कि शीतकालीन पर्यटन आत्मनिर्भर उत्तराखंड की मजबूत नींव है। इसे जन-आंदोलन का रूप देकर प्रदेश को समृद्ध और रोजगार सम्पन्न बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि नैनीताल विंटर कार्निवाल केवल उत्सव नहीं, बल्कि उत्तराखंड की आस्था, संस्कृति, परंपरा और स्वाभिमान का जीवंत प्रतीक है, जो “विकास भी–विरासत भी” की सोच को साकार करता है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के शीतकालीन यात्रा के आह्वान के बाद प्रदेश के पर्यटन स्थलों में अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिल रहा है। इससे स्थानीय युवाओं को ट्रेकिंग गाइड, होम-स्टे, होटल, कैफे और पर्यटन से जुड़े अन्य कार्यों के माध्यम से रोज़गार और स्वरोज़गार के नए अवसर मिल रहे हैं। शीतकालीन पर्यटन ने न केवल पलायन को रोका है, बल्कि लोक कलाकारों, हस्तशिल्प, पारंपरिक व्यंजनों और स्थानीय उत्पादों को भी नया बाज़ार दिया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार विकास के साथ-साथ संस्कृति, कानून व्यवस्था और पारदर्शिता को भी समान रूप से सशक्त बना रही है। समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून, सख्त भू-कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति ने उत्तराखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में खड़ा किया है।
उन्होंने कहा कि नैनीताल में आयोजित यह विंटर कार्निवाल क्षेत्र के पर्यटन विकास को नई गति देगा। मुख्यमंत्री ने बताया कि इसी दिन नैनीताल के समग्र विकास से जुड़ी 121 करोड़ रुपये से अधिक की 13 महत्वपूर्ण परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास भी जनता को समर्पित किया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दिन इसलिए भी विशेष है क्योंकि आज देवभूमि उत्तराखंड के शिल्पकार, भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती है। उन्होंने प्रदेशवासियों की ओर से अटल जी को कोटि-कोटि नमन करते हुए कहा कि उत्तराखंड राज्य निर्माण का सपना उन्हीं के नेतृत्व में साकार हुआ।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सात वर्षों बाद इतने भव्य रूप में आयोजित यह शीतकालीन कार्निवाल, नैनीताल की सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत को देश-दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का सशक्त मंच बना है। बोट रेस, सांस्कृतिक झांकियां, लाइट एंड साउंड शो, बैंड प्रस्तुतियां, लोक नृत्य और संगीत कार्यक्रमों ने पर्यटकों को मंत्रमुग्ध किया। इसके साथ ही ट्रेकिंग, एस्ट्रो टूरिज़्म, प्रकृति भ्रमण और आर्टिफ़िशियल रॉक क्लाइंबिंग जैसी गतिविधियों ने युवाओं को खासा आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को विश्व की आध्यात्मिक राजधानी के रूप में स्थापित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। केदारखंड की तर्ज पर मानसखंड के पौराणिक मंदिरों—नैना देवी, कैंची धाम, हनुमानगढ़ी और मुक्तेश्वर धाम—के पुनरुत्थान और सौंदर्यीकरण पर भी तेज़ी से कार्य हो रहा है। साथ ही वेलनेस टूरिज्म, एडवेंचर टूरिज्म, फिल्म शूटिंग और वेडिंग डेस्टिनेशन के रूप में भी उत्तराखंड नई पहचान बना रहा है।
उन्होंने बताया कि “शीतकालीन यात्रा” की शुरुआत का उद्देश्य प्रदेश में बारहों महीने पर्यटन की निरंतरता सुनिश्चित करना है। गढ़वाल और कुमाऊं में एक-एक स्पिरिचुअल इकोनॉमिक ज़ोन की स्थापना की योजना भी इसी दिशा में बड़ा कदम है। वहीं “वन डिस्ट्रिक्ट, वन फेस्टिवल” की अवधारणा से स्थानीय मेलों और लोक परंपराओं को नई ऊर्जा मिल रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जनपद–दो उत्पाद, हाउस ऑफ हिमालयाज, स्टेट मिलेट मिशन, नई पर्यटन नीति, नई फिल्म नीति, होम-स्टे योजना और ‘वेड इन उत्तराखंड’ जैसी योजनाओं ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया है। आज प्रदेश में सैकड़ों होम-स्टे संचालित हो रहे हैं, जिनसे पहाड़ों में रोज़गार के नए द्वार खुले हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि पलायन निवारण आयोग की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में रिवर्स पलायन 44 प्रतिशत बढ़ा है। पर्यटन क्षेत्र में उत्तराखंड को Best Wildlife Destination, Best Adventure Destination और World Responsible Tourism Award (One to Watch) जैसे प्रतिष्ठित सम्मान प्राप्त हुए हैं। केंद्रीय पर्यटन मंत्रालय ने जखोल, हर्षिल, गूंजी और सूपी गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम घोषित किया है।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार विकास के साथ-साथ देवभूमि के मूल स्वरूप और डेमोग्राफी की रक्षा के लिए भी संकल्पबद्ध है। अवैध कब्जों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए 10 हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि कब्जा मुक्त, 500 से ज्यादा अवैध निर्माण ध्वस्त किए गए हैं। सख्त भू-कानून, दंगा विरोधी कानून, समान नागरिक संहिता, नकल विरोधी कानून और भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई से प्रशासन को पारदर्शी बनाया गया है। बीते साढ़े चार वर्षों में 26 हजार से अधिक युवाओं को सरकारी नौकरी मिली है।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री के “स्वदेशी अपनाओ, देश को मजबूत बनाओ” मंत्र को दोहराते हुए लोगों से अधिक से अधिक स्वदेशी उत्पादों के उपयोग की अपील की।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड के लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों का भी आनंद लिया।
कार्यक्रम में विधायक सरिता आर्या, विधायक बंशीधर भगत, भाजपा जिला अध्यक्ष प्रताप बिष्ट, आयुक्त कुमाऊं दीपक रावत, जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल, एसएसपी डॉ. मंजूनाथ टीसी सहित अनेक जनप्रतिनिधि, पर्यटक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।









