अम्मान | 15 दिसंबर 2025 🌏🇮🇳
भारत और पश्चिम एशिया के रिश्तों में एक और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया, जब प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जॉर्डन के महामहिम शाह अब्दुल्ला द्वितीय से अम्मान स्थित अल हुसैनिया पैलेस में आत्मीय मुलाकात की। इस अवसर पर शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने प्रधानमंत्री का पारंपरिक अंदाज़ में गर्मजोशी से स्वागत किया, जिसने दोनों देशों के बीच गहरी मित्रता और भरोसे को एक बार फिर रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री और जॉर्डन के शासक के बीच सीमित और शिष्टमंडल स्तर पर हुई बातचीत में बीते वर्षों की मुलाकातों को याद करते हुए भारत–जॉर्डन के ऐतिहासिक और भरोसेमंद संबंधों पर विस्तार से चर्चा हुई। यह मुलाकात ऐसे समय पर हुई है, जब दोनों देश अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे होने का उत्सव मना रहे हैं, जिससे इस दौरे का महत्व और बढ़ गया है।
आतंकवाद के खिलाफ एकजुट भारत-जॉर्डन
महामहिम शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने आतंकवाद के खिलाफ भारत के संघर्ष का खुलकर समर्थन करते हुए इसके हर रूप और तरीके की कड़ी निंदा की। प्रधानमंत्री मोदी ने भी आतंकवाद, उग्रवाद और कट्टरपंथ के विरुद्ध वैश्विक लड़ाई में शाह अब्दुल्ला द्वितीय के नेतृत्व और उनके प्रयासों की सराहना की। दोनों नेताओं ने साफ कहा कि शांति और स्थिरता के बिना किसी भी क्षेत्र का विकास संभव नहीं है।
व्यापार से लेकर डिजिटल साझेदारी तक नए आयाम
बैठक में व्यापार, निवेश, रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, कृषि, उर्वरक, डिजिटल तकनीक, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे विषयों पर गहन मंथन हुआ। प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि भारत जॉर्डन का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों को अगले पांच वर्षों में आपसी व्यापार को 5 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय करना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने जॉर्डन के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) से जोड़ने का प्रस्ताव भी रखा, जिससे दोनों देशों के नागरिकों और व्यापारियों को सीधा लाभ मिल सके। उर्वरक क्षेत्र में जॉर्डन की अहम भूमिका को रेखांकित करते हुए बताया गया कि भारत में फॉस्फेटिक उर्वरकों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए जॉर्डन में निवेश बढ़ाने पर दोनों पक्षों के बीच चर्चा जारी है।
संस्कृति और विरासत ने जोड़े दिल
इस दौरे के दौरान संस्कृति, नवीकरणीय ऊर्जा, जल प्रबंधन, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना और पेट्रा–एलोरा ट्विनिंग जैसी ऐतिहासिक पहलों से जुड़े कई समझौता ज्ञापनों को अंतिम रूप दिया गया। इन समझौतों से दोनों देशों के बीच लोगों से लोगों के संबंध और भी मजबूत होंगे।
बातचीत के बाद शाह अब्दुल्ला द्वितीय ने प्रधानमंत्री मोदी के सम्मान में रात्रिभोज का आयोजन किया। प्रधानमंत्री ने उन्हें भारत आने का निमंत्रण दिया, जिसे जॉर्डन के शासक ने सहर्ष स्वीकार किया। यह दौरा भारत–जॉर्डन संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।









