धामी का साफ संदेश – “खुद भी नशे को ना कहो, दोस्तों को भी ना कहलवाओ” 🎯
देहरादून। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नशामुक्त भारत अभियान की 5वीं वर्षगांठ पर युवाओं से दिल से जुड़ी अपील की – “सिर्फ खुद नहीं, अपने हर दोस्त को भी नशे को मजबूती से ‘ना’ कहने के लिए प्रेरित करें।”
मुख्य सेवक सदन, सीएम कैंप कार्यालय में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि नशा सिर्फ बुरी आदत नहीं, ये समाज को भीतर से खोखला करने वाली खतरनाक आग है, जो धीरे-धीरे इंसान की सोच, विवेक और भविष्य – तीनों को जला देती है।
नशे के खिलाफ ‘साइलेंट वॉर’ और निशाने पर युवा पीढ़ी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि आज नशा पूरी दुनिया में एक ‘साइलेंट वॉर’ की तरह फैल रहा है, और इस छुपे हुए युद्ध का सबसे बड़ा निशाना है – हमारी युवा शक्ति।
उन्होंने कहा,
“युवा पीढ़ी ही नए भारत की नवाचार, ऊर्जा और प्रगति की असली ताकत है। अगर यही ऊर्जा नशे की गिरफ्त में आ जाएगी, तो विकास की रफ़्तार रुक जाएगी।”
धामी ने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2020 में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर नशामुक्त भारत अभियान शुरू कर इसे एक जन–आंदोलन का रूप देने का आह्वान किया था, और आज उसी पहल की 5वीं वर्षगांठ पर उत्तराखंड एक मजबूत संदेश दे रहा है – “ड्रग्स फ्री उत्तराखंड”।
मिशन मोड में “ड्रग्स फ्री उत्तराखंड” का संकल्प 💪
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री की प्रेरणा से राज्य सरकार मिशन मोड में नशे के खिलाफ लड़ाई लड़ रही है।
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वर्ष 2022 में त्रिस्तरीय एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (ANTF) का गठन किया गया
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पिछले तीन वर्षों में 6,000 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी
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200 करोड़ रुपये से अधिक के मादक पदार्थों की बरामदगी
उन्होंने साफ कहा कि ये आंकड़े सिर्फ कार्रवाई नहीं, बल्कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति का प्रमाण हैं।
नशा मुक्ति केंद्र, रिहैब और काउंसलिंग से लौट रही ज़िंदगियाँ
सरकार सिर्फ पकड़–धकड़ तक सीमित नहीं है, बल्कि नशे के शिकार लोगों को फिर से मुख्यधारा में लाने पर भी बराबर ध्यान दे रही है।
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प्रदेश के सभी जनपदों में नशा मुक्ति केंद्रों को प्रभावी बनाया जा रहा है
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वर्तमान में राज्य में चार इंटीग्रेटेड रिहैबिलिटेशन सेंटर फॉर एडिक्ट्स (IRCA) संचालित हो रहे हैं
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जहाँ नशा पीड़ितों को उपचार, परामर्श और पुनर्वास की सुविधाएँ दी जा रही हैं
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AIIMS ऋषिकेश की मदद से राज्य में एडिक्शन ट्रीटमेंट फैसिलिटी (ATF) भी चलाई जा रही है
मुख्यमंत्री ने कहा कि “हर वह युवक जो नशे से बाहर निकलना चाहता है, उसके लिए सरकार दरवाज़ा बंद नहीं, बल्कि खुला रखे हुए है।”
कॉलेज–स्कूलों में एंटी–ड्रग कमेटियाँ, समाज भी हुआ भागीदार
युवा पीढ़ी तक सीधा संदेश पहुंचे, इसके लिए राज्य के हर जनपद के शिक्षण संस्थानों में एंटी–ड्रग कमेटियाँ बनाई गई हैं।
इनमें शामिल हैं:
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जागरूक विद्यार्थी
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अभिभावक
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शिक्षक
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प्रधानाचार्य
इन कमेटियों का उद्देश्य है कि स्कूल–कॉलेज ही नशा–विरोधी जागरूकता के सबसे मजबूत केंद्र बनें, ताकि नशा शुरू होने से पहले ही रोका जा सके।
“ऐपण कला” और “दगड़िया क्लब” से जोड़ा नशा–विरोधी संदेश 🎨
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की परंपरा और आधुनिक मुहिम के सुंदर मेल का भी ज़िक्र किया।
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राज्य की लोककला “ऐपण” को नशा–विरोधी अभियान से जोड़ा गया है
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शैक्षणिक संस्थानों और सार्वजनिक स्थलों पर नशा विरोधी संदेशों से सजी ऐपण पेंटिंग्स लगाई जा रही हैं
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युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के लिए ‘दगड़िया क्लब’ बनाए गए हैं, जो खेल, संस्कृति और रचनात्मक गतिविधियों के ज़रिए उन्हें नशे से दूर रहने की प्रेरणा दे रहे हैं
युवाओं से सीएम की भावुक अपील – “आपका ‘ना’ किसी की ज़िंदगी बचा सकता है” 🎯
मुख्यमंत्री धामी ने कार्यक्रम में मौजूद युवाओं और पूरे प्रदेश के नौजवानों से भावुक अपील की:
“आप खुद भी नशे को पूरी मजबूती से ‘ना’ कहें, और अपने हर साथी को भी नशे से दूर रहने के लिए प्रेरित करें। आपका एक ‘ना’ किसी दोस्त का पूरा भविष्य बचा सकता है।”
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड को देश का अग्रणी राज्य बनाने का संकल्प तभी सफल होगा,
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जब युवा अपनी पूरी ऊर्जा
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पूरी क्षमता
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और पूरे संकल्प के साथ
नशे से दूर रहकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ें।
मुख्यमंत्री ने उपस्थित युवाओं को नशा मुक्त भारत अभियान की शपथ भी दिलवाई और स्कूल–कॉलेज स्तर पर आयोजित भाषण व निबंध प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मानित किया।










