मुख्यमंत्री आवास में रात्रि भोज बना भावनाओं और विकास का संगम
देहरादून का मुख्यमंत्री आवास बुधवार की शाम कुछ अलग था — वहाँ राजनीति नहीं, रिश्तों की गर्माहट और मिट्टी की खुशबू बसी थी।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने देशभर के कोनों से आए प्रवासी उत्तराखंडियों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा —
“आप भले ही दूर रह रहे हों, लेकिन दिल हमेशा उत्तराखंड के साथ धड़कता है। आप हमारी शक्ति हैं, हमारी पहचान हैं — देवभूमि के असली दूत।”
कार्यक्रम में रात्रि भोज सिर्फ भोजन का नहीं, बल्कि भावनाओं और विकास के सेतु का प्रतीक बना। मुख्यमंत्री ने हर प्रवासी अतिथि से व्यक्तिगत संवाद किया, उनकी बातें सुनीं और उनके अनुभवों को राज्य की नीतियों में शामिल करने का आश्वासन दिया।
🏔️ “ग्लोबल उत्तराखंड विज़न” से जुड़े प्रवासी, दिखा गर्व और अपनापन
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि सरकार “ग्लोबल उत्तराखंड विज़न” को मिशन मोड में आगे बढ़ा रही है।
“हमारा लक्ष्य है कि हर प्रवासी अपने ज्ञान, अनुभव और नेटवर्क के ज़रिए राज्य निर्माण में भागीदार बने।”
उन्होंने बताया कि जल्द ही प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए एक डिजिटल कनेक्ट प्लेटफ़ॉर्म, ग्लोबल नेटवर्किंग फोरम, और स्पेशल पार्टनरशिप नीति शुरू की जाएगी, जिससे देश-विदेश में बसे उत्तराखंडी अपनी मातृभूमि के विकास में प्रत्यक्ष भूमिका निभा सकें।
🌺 “दिल में उत्तराखंड, बातों में अपनापन” — भावुक हुए प्रवासी अतिथि
कार्यक्रम में भावनाओं का माहौल गहरा था। कई प्रवासी अतिथि मुख्यमंत्री से मिलकर भावुक हो उठे। उन्होंने कहा कि पहली बार किसी सरकार ने इतने सम्मान और आत्मीयता से प्रवासियों के अनुभवों को सुना है।
उन्होंने राज्य में तेज़ी से हो रहे विकास, निवेश बढ़ने, धार्मिक स्थलों के पुनरुद्धार और युवाओं के लिए नए अवसरों की सराहना की।
कई प्रतिभागियों ने कहा कि उत्तराखंड अब सिर्फ पहाड़ों की भूमि नहीं, बल्कि संभावनाओं की नई राजधानी बन चुका है।
🌱 “हम सब मिलकर देवभूमि को विश्व-स्तर पर पहुंचाएँगे” — मुख्यमंत्री धामी
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि उत्तराखंड की शक्ति उसके लोग हैं — चाहे वे देश में हों या विदेश में।
“हमारा प्रयास है कि हर उत्तराखंडी, जहाँ भी है, उसे अपनी जड़ों से जोड़ा जाए। हम विकास के साथ अपनी संस्कृति को भी संवार रहे हैं।”
उन्होंने भरोसा दिलाया कि आने वाले वर्षों में राज्य की नीतियों में प्रवासियों की भागीदारी को संस्थागत रूप दिया जाएगा — ‘विकास भी, विरासत भी’ की भावना के साथ।
रात्रि भोज का यह आयोजन एक संदेश बन गया —
देवभूमि सिर्फ भूगोल नहीं, एक भावना है जो दिलों को जोड़ती है।










