रजत जयंती वर्ष पर आध्यात्मिक संगम: उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा को मिला संतों का आशीर्वाद
मुख्यमंत्री आवास आज श्रद्धा, संस्कृति और अध्यात्म का अद्भुत संगम बन गया। अवसर था उत्तराखंड के रजत जयंती वर्ष का — और साक्षी थे देशभर के प्रतिष्ठित संत, महात्मा और धर्माचार्य। जब संत समाज ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को “देवभूमि का धर्म-संरक्षक” कहकर आशीर्वाद दिया, तो वातावरण में भक्ति और सम्मान का अद्भुत भाव उमड़ पड़ा।
संतों ने मुख्यमंत्री धामी के नेतृत्व में राज्य में हुए सांस्कृतिक संरक्षण, धार्मिक आस्था और विकास कार्यों की सराहना की। उन्होंने कहा —
“मुख्यमंत्री धामी ने उत्तराखंड की सनातन आत्मा को जीवंत रखा है। उनके नेतृत्व में राज्य न केवल विकास की राह पर अग्रसर है, बल्कि अपनी संस्कृति और परंपरा की जड़ों को और मज़बूती से थामे हुए है।”
🕉️ आध्यात्मिक संतों का संगम — संस्कृति और श्रद्धा का महापर्व
मुख्यमंत्री आवास पर हुए इस ऐतिहासिक संगम में देशभर के प्रतिष्ठित संतों का आगमन हुआ —
जगद्गुरु शंकराचार्य राजराजेश्वर महाराज, आचार्य महामंडलेश्वर कैलाशानंद गिरी जी, जूनापीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अवधेशानंद गिरि जी, परमार्थ निकेतन के स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, अखाड़ा परिषद अध्यक्ष स्वामी रविंद्रपुरी महाराज, बागेश्वर धाम के पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री, पतंजलि योगपीठ के आचार्य बालकृष्ण, प्रसिद्ध प्रवचनकार जया किशोरी और चिंतक डॉ. कुमार विश्वास सहित कई संत-महात्माओं ने मुख्यमंत्री से भेंट कर देवभूमि की दिशा पर अपने विचार साझा किए।
सभी संतों ने एक स्वर में कहा —
“उत्तराखंड आज आस्था और विकास का संतुलित उदाहरण है। यह वह भूमि है जहां संस्कृति नीतियों में बसती है, और आस्था प्रशासन के निर्णयों को दिशा देती है।”
🕊️ ‘कुंभ 2027’ बनेगा विश्व-स्तरीय आयोजन — संत समाज और सरकार एकजुट
संत समाज ने संकल्प लिया कि हरिद्वार कुंभ-2027 को “भव्य, दिव्य और विश्व-स्तरीय आयोजन” बनाने के लिए वे सरकार के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कार्य करेंगे।
संतों ने कहा —
“कुंभ सिर्फ एक पर्व नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वैश्विक चेतना का महासंगम है। इसे ऐतिहासिक बनाना हम सबकी साझा ज़िम्मेदारी है।”
उन्होंने सरकार द्वारा कुंभ की तैयारियों — यातायात, अधोसंरचना, घाटों का सौंदर्यीकरण, सुरक्षा और स्वच्छता योजनाओं की सराहना की और कहा कि मुख्यमंत्री धामी की दूरदृष्टि ने “कुंभ 2027” को पहले ही देश-विदेश की निगाहों में केंद्र बिंदु बना दिया है।
🌺 धर्म, संस्कृति और विकास का त्रिवेणी संगम बन रहा उत्तराखंड
संतों ने कहा कि मुख्यमंत्री धामी ने देवभूमि को “आध्यात्मिक पर्यटन” और “सांस्कृतिक समृद्धि” के केंद्र के रूप में नई पहचान दी है।
“उत्तराखंड अब केवल तीर्थ नहीं, बल्कि वैश्विक शांति और आध्यात्मिकता का केंद्र बन रहा है।”
संत समाज ने कहा कि सरकार द्वारा धार्मिक स्थलों के सौंदर्यीकरण, तीर्थ विकास, परंपरा-संरक्षण और सामाजिक अनुशासन के लिए जो नीतियां लागू की जा रही हैं, वे आने वाले समय में राज्य की दिशा बदल देंगी।
सभी संतों और धर्माचार्यों ने मुख्यमंत्री धामी को आशीर्वाद देते हुए कहा —
“आपके नेतृत्व में उत्तराखंड न केवल विकास की ऊँचाइयाँ छू रहा है, बल्कि अपनी संस्कृति को भी गौरव के साथ जीवित रखे हुए है।”
कार्यक्रम के अंत में पूरे परिसर में गूंजा एक ही संदेश —
“धर्म, संस्कृति और विकास — यही है उत्तराखंड की पहचान।”









