देवभूमि उत्तराखंड की सांस्कृतिक आत्मा कहे जाने वाले लोक पर्व इगास-बूढ़ी दीवाली का रंग आज मुख्यमंत्री आवास में देखते ही बन रहा था। ढोल-दमाऊ की थाप, झूमेंलो के गीत और थड़िया की लय पर सजी शाम ने हर दिल में लोकगौरव की नई ज्योति जलाई।
राज्यपाल ले. ज. गुरमीत सिंह (से नि) की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित इस भव्य आयोजन में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रदेशवासियों को शुभकामनाएँ दीं और कहा —
“इगास हमारी संस्कृति, लोक आस्था और सामूहिक भावना का प्रतीक है। जब घर-आंगन में लोकगीत गूंजते हैं, तो लगता है मानो देवभूमि खुद मुस्कुरा रही हो।” 🎶
कार्यक्रम में उत्तराखंड के प्रख्यात लोक कलाकारों और सांस्कृतिक दलों ने हारुल, चांचरी, जागर, थड़िया और झूमेंलो जैसे पारंपरिक नृत्यों से ऐसा समां बांधा कि पूरा परिसर लोकधुनों से सराबोर हो गया। मुख्यमंत्री धामी खुद भी कलाकारों के बीच पहुंचे और लोक संस्कृति के इस जीवंत उत्सव का हिस्सा बने।
उन्होंने कहा —
“हमारी लोक परंपराएँ हमारी पहचान हैं। इन्हें जीवित रखना और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना हम सबका कर्तव्य है।”
मुख्यमंत्री ने पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार “भेलों” खेलकर पर्व की परंपरा को जीवंत किया, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में खास उत्साह देखा गया। 🎉
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने लोक कलाकारों को सम्मानित करते हुए कहा कि राज्य सरकार “कल्चर-बेस्ड रोजगार” और लोक कलाकारों के सशक्तिकरण की दिशा में ठोस प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के प्रवासी अब अपनी जड़ों की ओर लौट रहे हैं और इगास जैसे लोकपर्वों के जरिये अपनी मिट्टी से जुड़ाव फिर मजबूत कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संकल्प वाक्य का उल्लेख करते हुए कहा —
“तीसरा दशक उत्तराखंड का होगा। यह केवल नारा नहीं, बल्कि देवभूमि के उज्ज्वल भविष्य का संकल्प है। हमें विकल्प रहित संकल्प के साथ इस दिशा में आगे बढ़ना होगा।”
उन्होंने जनता से आह्वान किया कि हम सब मिलकर अपनी संस्कृति, परंपरा और आस्था को सहेजें — और “विकास के दीप” के साथ “गर्व के दीप” भी अपने मन में जलाएं।
कार्यक्रम में कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, गणेश जोशी, पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी, रमेश पोखरियाल निशंक, राज्यसभा सांसद नरेश बंसल, मुख्य सचिव समेत अनेक जनप्रतिनिधि और प्रदेश के गणमान्य लोग उपस्थित रहे।









