भैया दूज के पावन अवसर पर आज सुबह श्री केदारनाथ धाम में भावनाओं का ऐसा सागर उमड़ा, जिसने हर भक्त की आंखें नम कर दीं। बर्फीली हवाओं के बीच जब मंदिर परिसर “हर हर महादेव” और “जय बाबा केदार” के जयघोषों से गूंज उठा, तो मानो पूरा आकाश भी शिवभक्ति में झूम उठा।
गुरुवार, 23 अक्टूबर 2025 की सुबह 8:30 बजे, कार्तिक शुक्ल सप्तमी के शुभ योग में, विश्वप्रसिद्ध ग्यारहवें ज्योतिर्लिंग श्री केदारनाथ धाम के कपाट विधिवत रूप से बंद कर दिए गए। इस भावुक क्षण के साक्षी बने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी।
🌸 भक्ति और श्रद्धा का दृश्य:
कपाट बंद होने से पहले मंदिर को फूलों से सुसज्जित किया गया — ब्रह्मकमल, कुमजा, बुकला, राख और स्थानीय पुष्पों से सजे धाम की छटा देखते ही बनती थी। सेना के बैंड की भक्ति धुनों और जयघोषों के बीच करीब 10 हजार श्रद्धालु इस ऐतिहासिक पल का हिस्सा बने।
मुख्य पुजारी बागेशलिंग जी और आचार्यगणों ने ब्रह्ममुहूर्त में यज्ञ, हवन और समाधि पूजन के बाद स्वयंभू शिवलिंग को स्थानीय पुष्पों और पत्रों से ढककर समाधि रूप दिया। इसके साथ ही गर्भगृह के द्वार बंद कर दिए गए — यह दृश्य ऐसा था, जिसे देख भक्तों की पलकों पर आंसू और होंठों पर बस एक ही नाम था — “बाबा केदार।” 🙏
🎐 पंचमुखी डोली का प्रस्थान:
कपाट बंद होने के बाद बाबा केदार की पंचमुखी उत्सव डोली ने मंदिर की परिक्रमा कर प्रथम पड़ाव रामपुर के लिए प्रस्थान किया। सेना के बैंड की गूंज, पुजारियों की वाणी और श्रद्धालुओं के जयघोषों से पूरी केदारपुरी शिवमय हो उठी।
मुख्यमंत्री धामी ने इस अवसर पर कहा —
“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में केदारपुरी आज भव्य और दिव्य स्वरूप में पुनर्जीवित हुई है। इस वर्ष रिकॉर्ड 17 लाख 68 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा केदार के दर्शन किए — जो पिछले वर्ष से सवा लाख अधिक है। यह आस्था की अटूट डोर है जो देवभूमि को जोड़ती है।”
🌄 शीतकालीन यात्रा का आमंत्रण:
मुख्यमंत्री ने श्रद्धालुओं से चारधाम के शीतकालीन गद्दी स्थलों की यात्रा का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे न केवल आस्था की निरंतरता बनी रहेगी, बल्कि स्थानीय लोगों, होमस्टे, होटल चालकों और व्यापारियों की आजीविका को भी बल मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने सभी विभागों, सुरक्षा बलों, मंदिर समिति और स्थानीय नागरिकों को बधाई देते हुए कहा कि वर्ष 2025 की यात्रा “सफल, सुरक्षित और सुचारु” रही। उन्होंने आश्वस्त किया कि शीतकाल में भी केदारनाथ धाम और इसके गद्दी स्थलों पर सुरक्षा और पूजन की व्यवस्था सुदृढ़ रहेगी।
📜 शीतकालीन यात्रा कार्यक्रम:
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24 अक्टूबर को डोली श्री विश्वनाथ मंदिर, गुप्तकाशी पहुंचेगी।
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25 अक्टूबर को डोली शीतकालीन गद्दीस्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर, ऊखीमठ पहुंचेगी, जहां बाबा केदार की पूजा शीत ऋतु में होगी।
इस अवसर पर विधायक आशा नौटियाल, जिला पंचायत अध्यक्ष पूनम कठैत, बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी, जिलाधिकारी प्रतीक जैन, पुलिस अधीक्षक अक्षय प्रह्लाद कोंडे सहित अनेक श्रद्धालु उपस्थित रहे।










