🌸 “नारी तू शक्ति है, तू सृष्टि की मुस्कान है” — टनकपुर में ‘सशक्त बहना उत्सव’ में बोले सीएम धामी 💫

टनकपुर के छीनीगोठ गाँव में गुरुवार का दिन कुछ खास था। हवा में उत्सव का उल्लास था और मंच पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के शब्दों में नारी शक्ति के प्रति गहरा सम्मान झलक रहा था।
मंच से उतरकर जब सीएम धामी ने महिलाओं के साथ मट्ठा बनाया, ओखल में धान कूटा, दीपावली की लाइटों की सोल्डरिंग की और लौह उत्पाद निर्माण में हाथ आजमाया, तो वो सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक प्रेरक बन गए — एक ऐसे नेता जो “नारी सशक्तिकरण” को नारे से आगे ले जाकर जीवन का हिस्सा बना रहे हैं।


👩‍🌾 महिलाएँ बनें आत्मनिर्भर उत्तराखंड की अग्रदूत

“महिलाएँ अब सिर्फ सहयोगी नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उत्तराखण्ड की अग्रदूत हैं।” — सीएम धामी के ये शब्द कार्यक्रम की आत्मा बन गए।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार महिलाओं को सहयोग देने के साथ उन्हें उद्यमशीलता, तकनीक और वित्तीय सशक्तिकरण से जोड़ने के लिए निरंतर कार्यरत है।

मुख्यमंत्री ने ‘सशक्त बहना उत्सव’ में पहुंचे हजारों महिलाओं से कहा कि उनके प्रयासों से ही ‘विकसित उत्तराखंड’ का सपना साकार होगा। उन्होंने महिलाओं के स्टॉलों का अवलोकन किया, उनके साथ पारंपरिक व्यंजन बनाए और लोकल उत्पादों को ग्लोबल पहचान दिलाने का आह्वान किया।

“महिलाएँ अब उपभोक्ता नहीं, उत्पादक हैं — यही आत्मनिर्भर भारत का चेहरा है।” — सीएम धामी


🌾 परंपरा से नवाचार तक: ‘लोकल फॉर वोकल’ की मिसाल

सीएम धामी ने महिलाओं के साथ पारंपरिक तरीके से मट्ठा बनाते हुए कहा कि ये व्यंजन हमारी संस्कृति और स्वास्थ्य दोनों की धरोहर हैं। उन्होंने जोर दिया कि इन पारंपरिक उत्पादों को आधुनिक मार्केट से जोड़ना समय की मांग है।

इलेक्ट्रिक स्टॉल पर पहुँचकर उन्होंने दीपावली की लाइटों की सोल्डरिंग में हिस्सा लिया और कहा —

“दीपों की रोशनी तब और बढ़ेगी जब हर घर की बहनें आत्मनिर्भर बनेंगी।”


💪 महिलाएँ हैं प्रदेश की रीढ़

धान कूटने से लेकर लौह उत्पाद निर्माण तक, मुख्यमंत्री ने महिलाओं के श्रम और कौशल को नमन किया।
उन्होंने कहा —

“पारंपरिक कृषि पद्धतियाँ, हस्तशिल्प और खाद्य उत्पाद अब हमारी ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ बन चुके हैं। और इस रीढ़ को मजबूती दे रही हैं हमारी बहनें।”

मुख्यमंत्री ने महिला समूहों की सराहना करते हुए कहा कि उत्तराखंड में 70 हजार स्वयं सहायता समूहों से 5 लाख महिलाएँ जुड़ी हैं, जिनमें 1.65 लाख महिलाएँ ‘लखपति दीदी’ बन चुकी हैं।


🪔 सम्मान और संवेदना का संगम

मुख्यमंत्री ने महिला एवं बाल विकास विभाग की ‘महालक्ष्मी किट’ का वितरण किया, बच्चों को ‘बाल भोग’ खिलाया और आंगनबाड़ी कार्यकर्त्रियों की भूमिका की सराहना की।
उन्होंने कहा कि हर बच्चे की शिक्षा और पोषण राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

दीपावली की शुभकामनाएँ देते हुए उन्होंने कहा —

“महिलाएँ लक्ष्मी स्वरूपा हैं। जब नारी सशक्त होगी, तभी उत्तराखंड समृद्ध होगा।”

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘नारी तू नारायणी’ मंत्र का उल्लेख करते हुए सीएम धामी ने बताया कि उज्ज्वला, जन धन, आयुष्मान भारत, बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ जैसी योजनाएँ महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर साबित हो रही हैं।


🙌 सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता

सीएम धामी ने कहा कि राज्य सरकार ने महिलाओं को सरकारी सेवाओं में 30% आरक्षण और समान नागरिक संहिता (UCC) के ज़रिए उनके अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित की है।
उन्होंने मातृशक्ति से आह्वान किया कि वे ‘लोकल फॉर वोकल’ को जन आंदोलन बनाएँ और आत्मनिर्भर उत्तराखंड के निर्माण में भागीदार बनें।


🌺 मुख्यमंत्री का संदेश

“नारी ही शक्ति है, नारी ही सृजन की मुस्कान है। जब बहनें आत्मनिर्भर होंगी, तभी उत्तराखंड आत्मगौरव से खड़ा होगा।” ✨