नई दिल्ली, 15 अक्टूबर 🗓️
त्योहारों की रौनक और पर्यावरण की चिंता के बीच सुप्रीम कोर्ट ने एक संतुलित फैसला सुनाया है। देश की सर्वोच्च अदालत ने दिल्ली-एनसीआर में 18 से 21 अक्टूबर तक “ग्रीन पटाखे” जलाने की अनुमति दे दी है। यह फैसला उन लोगों के लिए राहत लेकर आया है जो लंबे समय से त्योहारों पर पटाखे जलाने पर लगे प्रतिबंध से निराश थे।
मुख्य न्यायाधीश भूषण रामकृष्ण गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अदालत ने इस मुद्दे पर सभी पक्षों की दलीलें सुनीं — जिसमें सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और एमिकस क्यूरी के सुझाव भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि “हमें पर्यावरण और परंपरा, दोनों के बीच संतुलित दृष्टिकोण अपनाना होगा। लोगों को त्योहार मनाने की आज़ादी हो, मगर प्रकृति के प्रति संयम भी ज़रूरी है।” 🌿
🎯 सीमित अवधि और सख्त शर्तें
कोर्ट ने साफ़ किया कि यह अनुमति सिर्फ़ 18 से 21 अक्टूबर तक के लिए है। इसके बाद पटाखों की बिक्री और जलाने पर प्रतिबंध जारी रहेगा। साथ ही अदालत ने कहा कि केवल QR कोड वाले प्रमाणित “ग्रीन पटाखे” ही बेचे और जलाए जा सकते हैं।
मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि “नियमों के उल्लंघन पर निर्माताओं और विक्रेताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” इसके लिए पेट्रोलिंग टीमें निगरानी करेंगी, और सैंपल जांच की व्यवस्था भी की जाएगी।
🔥 पटाखे जलाने का तय समय
कोर्ट ने स्पष्ट किया कि दीपावली से एक दिन पहले और दीपावली वाले दिन लोग सुबह 6 से 7 बजे और शाम 8 से 10 बजे तक ही पटाखे जला सकेंगे। इससे परंपरा भी बनी रहेगी और पर्यावरण पर असर भी कम होगा।
💬 उत्पादकों और लोगों की दलीलें
पटाखा उत्पादकों ने अदालत से गुहार लगाई थी कि सिर्फ़ पटाखों को प्रदूषण का ज़िम्मेदार ठहराना अनुचित है, क्योंकि पराली जलाने और वाहनों का धुआं भी उतना ही बड़ा कारण है। सॉलिसिटर जनरल ने भी कहा कि “त्योहारों पर लोगों को खुशियां मनाने का मौका मिलना चाहिए, मगर सीमाओं के भीतर।”
🌏 कोर्ट का संदेश: परंपरा और प्रकृति दोनों ज़रूरी हैं
अदालत ने कहा —
“हम न तो परंपरा को कुचल सकते हैं, न ही पर्यावरण की अनदेखी कर सकते हैं। ज़रूरत है संयम और समझदारी से चलने की।”
इस फैसले को लोग एक मध्य रास्ते के रूप में देख रहे हैं — जहां दिवाली की चमक भी बरकरार रहेगी और हवा की सांस भी हल्की रहेगी।










