🔴 आपदा की मार, लेकिन हौसले बुलंद: उत्तरकाशी में डटे रहे सीएम धामी, रातभर संभाली राहत की कमान

उत्तरकाशी | 8 अगस्त 2025
उत्तराखंड की धरती एक बार फिर प्रकृति के कहर से काँप उठी है। गुरुवार देर रात जब ज़्यादातर लोग नींद में थे, तब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी आपदा कंट्रोल रूम में डटे हुए हालात पर नज़र बनाए हुए थे। उत्तरकाशी के हर्षिल-धराली इलाके में बादल फटने के बाद पैदा हुए हालात किसी जंग से कम नहीं, और इस जंग में सीएम खुद मोर्चा संभाले हुए हैं।

🎯 दूसरे दिन भी मैदान में मौजूद रहकर सीएम धामी राहत कार्यों की न केवल निगरानी कर रहे हैं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर अधिकारियों को दिशा-निर्देश भी दे रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए मुख्य सचिव और तमाम वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा – “युद्धस्तर पर राहत अभियान चलाओ, किसी भी पीड़ित को बेसहारा मत छोड़ो।”

मुख्यमंत्री ने बिजली, पानी, संचार और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को तत्काल बहाल करने के निर्देश दिए। धराली और हर्षिल जैसे दूरस्थ इलाकों में वीसेट और जेनसेट जैसी तकनीकी ज़रूरतों को पहुंचाने की प्रक्रिया को भी तेज़ किया जा रहा है ताकि राहत टीमों के पास संचार और ऊर्जा की कमी न हो।

💬 “प्रभावितों तक राहत सामग्री समय पर पहुंचे, और हर व्यक्ति सुरक्षित स्थान पर पहुँचे – यही मेरी प्राथमिकता है,” – सीएम धामी ने अधिकारियों से कहा।

मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से उन लोगों के लिए हेली सेवा की व्यवस्था करने का आदेश दिया जिन्हें प्राथमिक इलाज या सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की आवश्यकता है। उन्होंने निर्देश दिया कि जो लोग हेलीकॉप्टर से देहरादून या मातली लाए जा रहे हैं, उन्हें उनके घर तक भी राज्य सरकार सुरक्षित पहुंचाए।

🛑 आपदा प्रबंधन में कोई चूक नहीं होनी चाहिए
मुख्यमंत्री ने आपदा की पूर्व चेतावनी प्रणाली और संचार नेटवर्क को और मज़बूत करने के लिए दीर्घकालिक कार्ययोजना बनाने को कहा। उन्होंने सभी विभागों को आपसी समन्वय से कार्य करने की हिदायत दी ताकि राहत कार्यों में एक भी पल की देरी न हो।

👉 केंद्र भी पूरी तरह सतर्क और सहयोगी
मुख्यमंत्री ने यह भी जानकारी दी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लगातार स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और हरसंभव मदद देने का आश्वासन दे चुके हैं।

📍 राहत कार्यों में तैनात टीमें:

  • NDRF, SDRF, ITBP, पुलिस, और अन्य एजेंसियां

  • ज़मीनी स्तर पर लगातार कार्यरत हैं

  • लोगों की जान और ज़रूरतों को प्राथमिकता