रिपोर्ट: 7 जुलाई 2025, रियो डी जेनेरियो/दिल्ली
ब्राजील की गर्माहट और दुनिया के सबसे बड़े मंचों में से एक की गूंज… यही थी वो फिज़ा जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रियो डी जेनेरियो में आयोजित 17वें BRICS शिखर सम्मेलन में भारत की भूमिका को न सिर्फ मजबूती से पेश किया, बल्कि एक नई वैश्विक व्यवस्था की ज़रूरत भी दुनिया के सामने रखी।
🌍 ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना से लबरेज़ प्रधानमंत्री मोदी ने जहां “वैश्विक शासन में सुधार”, “शांति और सुरक्षा”, और “कृत्रिम बुद्धिमत्ता” जैसे जटिल मुद्दों पर अपनी बेबाक राय रखी, वहीं दुनिया को यह भी याद दिलाया कि दक्षिणी देशों की आवाज़ अब दबाई नहीं जा सकती — उसे सुना जाना ही होगा।
🔹 ग्लोबल साउथ की आवाज़ बनकर उभरे मोदी
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में साफ कहा कि 21वीं सदी की चुनौतियों से जूझने के लिए अब 20वीं सदी के संस्थानों को बदलना ज़रूरी है। चाहे वो संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद हो या IMF, वर्ल्ड बैंक या WTO – सबको अब आज की ज़रूरतों के हिसाब से बदला जाना चाहिए।
उन्होंने BRICS घोषणापत्र में UNSC सुधार की स्पष्ट भाषा शामिल करने के लिए अन्य देशों का आभार जताया।
🔺 “आतंकवाद सिर्फ एक देश का नहीं, पूरी मानवता का दुश्मन”
प्रधानमंत्री ने अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले को याद करते हुए कहा कि यह सिर्फ भारत पर नहीं, पूरी मानवता पर हमला था। उन्होंने साफ कहा कि अब आतंकवाद के खिलाफ कोई ढील नहीं चलेगी —
“जो आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, फंड करते हैं या उन्हें पनाह देते हैं, उन्हें बख्शा नहीं जाना चाहिए। इस पर ज़ीरो टॉलरेंस ज़रूरी है।”
उन्होंने BRICS नेताओं का इस हमले की स्पष्ट निंदा करने के लिए आभार भी जताया।
🔍 संघर्ष के दौर में भारत की भूमिका – कूटनीति और संवाद
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया से लेकर यूरोप तक फैले संघर्षों पर चिंता जताते हुए दोहराया कि भारत बातचीत और कूटनीति के माध्यम से समाधान का पक्षधर रहा है और आगे भी रहेगा।
🧠 आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बहुपक्षीयता पर चार ठोस सुझाव
PM मोदी ने BRICS के भविष्य के लिए चार सुझाव रखे:
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NDB (न्यू डेवलपमेंट बैंक) को स्थानीय ज़रूरतों और स्थायित्व पर फोकस करना चाहिए
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वैज्ञानिक अनुसंधान भंडार बनाया जाए जो वैश्विक दक्षिण को मजबूती दे
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क्रिटिकल मिनरल्स की सप्लाई चेन को मज़बूत और सुरक्षित किया जाए
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ज़िम्मेदार AI गवर्नेंस को अपनाया जाए और इनोवेशन को भी समान महत्व मिले
📜 सदस्य देशों ने अंत में ‘रियो डिक्लेरेशन’ को अपनाया, जो BRICS देशों की एकजुटता और वैश्विक जिम्मेदारी का प्रतीक है।
✅ निष्कर्ष:
PM मोदी ने BRICS के मंच से एक बार फिर साबित किया कि भारत अब सिर्फ एक भागीदार नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व में निर्णायक भूमिका निभाने वाला देश है। रियो से उठी यह आवाज़ अब दुनिया के हर कोने में गूंज रही है — न्याय, सुरक्षा और तकनीकी संतुलन की मांग के साथ।










