हरादून | 5 जुलाई 2025
उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों की आवाज़ आज देशभर में गूंज उठी, जब मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने नागर विमानन सम्मेलन-2025 के मंच से केंद्र सरकार के समक्ष एक ऐतिहासिक मांग रखी – पर्वतीय क्षेत्रों के लिए पृथक विमानन नीति।
देहरादून के एक होटल में आयोजित इस सम्मेलन में जैसे ही मुख्यमंत्री धामी मंच पर पहुंचे, तो उत्तराखंड की जमीनी हकीकत और ज़रूरतों की पूरी तस्वीर उन्होंने केंद्रीय नागर विमानन मंत्री किंजरापु राममोहन नायडू और देश के अन्य राज्यों के मंत्रियों के सामने रख दी।
🗣️ “हवाई सेवा हमारे लिए केवल यात्रा का ज़रिया नहीं, बल्कि ज़िंदगी की डोर है,” मुख्यमंत्री ने भावुक स्वर में कहा।
उन्होंने बताया कि राज्य में फिलहाल 18 हेलीपोर्ट्स पर काम चल रहा है, जिनमें से 12 पहले ही सक्रिय हो चुके हैं। इन हेलीकॉप्टर सेवाओं ने दुर्गम गांवों में जीवन रेखा की भूमिका निभाई है — चाहे वह आपदा राहत हो, गंभीर रोगियों की एयर एंबुलेंस सेवा या चारधाम जैसी तीर्थयात्राएं।
📢 मुख्यमंत्री की प्रमुख मांगें:
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पर्वतीय विमानन नीति में विशेष वित्तीय सहायता
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संचालन के लिए सब्सिडी
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एटीसी नेटवर्क की मजबूती
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सटीक मौसम पूर्वानुमान और आपदा-पूर्व तैयारी
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विशेष पायलट प्रशिक्षण और सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन
🛫 उन्होंने देश के सभी विमानन ऑपरेटरों से आग्रह किया कि वे पर्वतीय उड़ानों के लिए जरूरी संवेदनशीलता और सतर्कता बरतें, क्योंकि यहां की भौगोलिक परिस्थितियाँ मैदानों से बिल्कुल अलग हैं।
सम्मेलन में उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री सुरेश कुमार खन्ना, राजस्थान के गौतम कुमार, हरियाणा के विपुल गोयल, और उत्तराखंड के मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन भी मौजूद रहे।
💬 मुख्यमंत्री धामी की यह पहल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि समूचे हिमालयी क्षेत्र के लिए एक नई आशा की किरण बनकर उभरी है।










