देहरादून | 2 अक्टूबर 2026
उत्तराखंड में वन्यजीव सप्ताह-2026 की शुरुआत हो गई है। देहरादून के एफ.आर.आई. कैंपस में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर जोर दिया। 🐅🌿
इस मौके पर वन्यजीव संघर्ष के दौरान अपनी जान की परवाह किए बिना दूसरों की जिंदगी बचाने वाले 18 लोगों को सम्मानित किया गया। मुख्यमंत्री ने सभी 18 सम्मानित लोगों को ₹51-₹51 हजार की धनराशि देने की घोषणा भी की।
🐾 वन्यजीव संघर्ष में साहस दिखाने वालों का सम्मान
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उन लोगों को सम्मानित किया, जिन्होंने वन्यजीव संघर्ष की परिस्थितियों में अदम्य साहस का परिचय दिया और दूसरे लोगों की जान बचाने के लिए अपनी सुरक्षा की परवाह नहीं की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ संघर्ष से प्रभावित नागरिकों की सहायता करना भी सरकार की प्राथमिकता है।
🌳 हर जिले में नए पर्यटन स्थल तलाशने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से प्रदेश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक नए पर्यटन स्थल की पहचान करने को कहा। उन्होंने प्राकृतिक सुंदरता को सुरक्षित रखते हुए इन स्थानों पर पर्यटकों के लिए जरूरी सुविधाएं विकसित करने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि हल्द्वानी में चिड़ियाघर की परिकल्पना को सरकार ने अपने घोषणा पत्र में शामिल किया है। इस दिशा में तेजी से काम किया जाएगा, ताकि यह परियोजना वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण शिक्षा और पर्यटन का महत्वपूर्ण केंद्र बन सके।
📸 फोटो प्रदर्शनी और प्रतियोगिता के विजेताओं को सम्मान
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न स्टॉलों का अवलोकन किया। उन्होंने वन्यजीव फोटोग्राफी पर आधारित फोटो प्रदर्शनी भी देखी।
इसके अलावा वन्यजीव विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को भी सम्मानित किया गया।
🏔️ उत्तराखंड की प्राकृतिक विरासत को बताया बड़ी पूंजी
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमालय, जंगल, नदियां, झीलें और समृद्ध जैव-विविधता उत्तराखंड की प्राकृतिक पहचान हैं। उन्होंने जिम कॉर्बेट और राजाजी नेशनल पार्क को राज्य की पहचान से जुड़ा बताया।
उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखते हुए वाइल्डलाइफ टूरिज्म और इको-टूरिज्म को आगे बढ़ाना है। इसके साथ होमस्टे जैसी गतिविधियों के जरिए जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों की आय बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
🐯 कॉर्बेट से राजाजी में बाघों के पुनर्स्थापन का दूसरा चरण
मुख्यमंत्री ने बताया कि कॉर्बेट टाइगर रिजर्व से राजाजी टाइगर रिजर्व में बाघों के पुनर्स्थापन की परियोजना का दूसरा चरण शुरू होने जा रहा है।
उन्होंने उच्च हिमालयी क्षेत्रों में स्नो लेपर्ड पर्यटन की संभावनाओं का भी उल्लेख किया। वन विभाग के अधिकारियों को इस दिशा में तेजी से काम करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि हिम तेंदुए के संरक्षण के साथ स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी विकसित हो सकें।
🚧 मानव-वन्यजीव संघर्ष कम करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार की प्राथमिकताओं में मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना शामिल है। इसके लिए जंगलों की निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि कॉर्बेट और राजाजी टाइगर रिजर्व में स्पेशल टाइगर प्रोटेक्शन फोर्स के गठन की दिशा में भी निर्णय लिया गया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, विकास परियोजनाओं के साथ वन्यजीवों के आवागमन और उनके सुरक्षित क्षेत्रों को ध्यान में रखने पर भी जोर दिया जा रहा है। उन्होंने दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर को इसी सोच का उदाहरण बताया।
👨🌾 स्थानीय लोगों की भागीदारी पर सरकार का जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण में स्थानीय समुदायों की भूमिका महत्वपूर्ण है। सरकार इको-टूरिज्म को बढ़ावा दे रही है, ताकि जंगलों के आसपास रहने वाले लोगों को स्थानीय स्तर पर रोजगार मिल सके और वे प्रकृति संरक्षण में भागीदार बनें।
उन्होंने बताया कि एक लाख युवाओं को “सीएम यंग ईको-प्रिन्योर” बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ रहा है।
इस पहल के तहत नेचर गाइड, ड्रोन पायलट, वाइल्डलाइफ फोटोग्राफर, इको-टूरिज्म और वन्यजीव पर्यटन से जुड़े कौशल को रोजगार तथा उद्यम के रूप में विकसित करने की बात कही गई है।
🎒 विद्यार्थियों के लिए वन्यजीवों से जुड़ी शैक्षिक यात्राएं
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रत्येक जिले में इको क्लब के माध्यम से विद्यार्थियों के लिए वन्यजीवों से संबंधित शैक्षिक यात्राएं शुरू की गई हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास इकोलॉजी और इकोनॉमी के बीच संतुलन बनाकर विकास को आगे बढ़ाना है, ताकि आने वाली पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक धरोहर सुरक्षित रह सके।
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “मिशन LiFE” का उल्लेख करते हुए पर्यावरण संरक्षण को रोजमर्रा की आदतों का हिस्सा बनाने की बात कही। उन्होंने बताया कि राज्य में GEP (ग्रास इन्वायरनमेंट प्रोडक्ट) के माध्यम से जल, जंगल और अन्य प्राकृतिक संसाधनों के मूल्यांकन का कार्य किया जा रहा है।
💰 वन्यजीव हमले में मौत पर अब ₹10 लाख अनुग्रह राशि
मुख्यमंत्री ने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ प्रभावित नागरिकों की मदद भी सरकार की जिम्मेदारी है।
उन्होंने बताया कि वन्यजीव हमले में मृत्यु होने पर दी जाने वाली अनुग्रह राशि ₹6 लाख से बढ़ाकर ₹10 लाख की गई है। वहीं वन्यजीव हमले में घायल नागरिकों के इलाज का खर्च भी राज्य सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है।
🚯 पर्यटकों से जंगलों को स्वच्छ रखने की अपील
मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों से जंगल सफारी, राष्ट्रीय उद्यान और धार्मिक स्थलों की यात्रा के दौरान स्वच्छता का ध्यान रखने की अपील की।
उन्होंने पर्यटकों से गंदगी और प्लास्टिक नहीं फैलाने तथा वन्यजीवों से सुरक्षित दूरी बनाए रखने को कहा।
🌿 वन मंत्री बोले- वन्यजीव संरक्षण सामूहिक जिम्मेदारी
वन मंत्री सुबोध उनियाल ने कहा कि उत्तराखंड देवभूमि के साथ-साथ वन भूमि भी है और राज्य में 71 प्रतिशत से अधिक वन भूमि का क्षेत्र है। उन्होंने वन्यजीवों को प्रकृति के साथ-साथ रोजगार और राज्यवासियों की आजीविका के लिए भी महत्वपूर्ण बताया।
उन्होंने कहा कि वन्यजीवों की सुरक्षा सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। इस वर्ष की थीम “जुड़े आवास – वन्य जीवन का विकास” है।
वन मंत्री ने बताया कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने के लिए कई कॉरिडोर के निर्माण का कार्य किया जा रहा है। साथ ही वनों को आम लोगों की आजीविका से जोड़ने और विंटर टूरिज्म को बढ़ावा देने पर भी काम किया जा रहा है।
उन्होंने उम्मीद जताई कि इस तरह के कार्यक्रम विशेष रूप से युवाओं में वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करेंगे।
कार्यक्रम में विधायक सविता कपूर, राजीव तलवार, मीडिया सलाहकार समिति के अध्यक्ष प्रो. गोविंद बिष्ट, प्रमुख सचिव वन आर.के. सुधांशु, प्रमुख वन संरक्षक (हाफ) कपिल लाल, प्रमुख वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक नीना गैरवाल सहित अन्य लोग मौजूद रहे।










