देहरादून | 6 नवंबर 2026
किसी ने भालू के हमले के बीच दोस्त को बचाने की कोशिश की, किसी ने उफनती नदी में डूबती बच्ची को सुरक्षित बाहर निकाला, तो किसी ने बादल फटने के दौरान अपनी सूझबूझ से 17 लोगों की जान बचाई। उत्तराखंड के ऐसे ही छह बहादुर बच्चों को केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने प्रथम मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया।
शुक्रवार को देहरादून के परेड ग्राउंड में आयोजित समारोह में सभी छह बच्चों को पदक, प्रशस्ति पत्र और ₹51-₹51 हजार की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। यह धनराशि डीबीटी के माध्यम से उनके बैंक खातों में भेजी गई।
🏅 पहली बार शुरू हुआ मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार
उत्तराखंड सरकार के महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में पहली बार मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार प्रदान किए हैं।
राज्य स्तर पर मिले आवेदनों में से छह बच्चों को उनके साहस, बहादुरी और कठिन परिस्थितियों में दिखाई गई सूझबूझ के आधार पर चुना गया।
सम्मान पाने वाले बच्चों में चमोली के तीन, जबकि चम्पावत, देहरादून और टिहरी गढ़वाल के एक-एक बच्चे शामिल हैं।
🐻 चमोली: भालू के हमले में तीन बच्चों ने दिखाई बहादुरी
चमोली की दिव्या, दीपिका और आरव सिंह को 22 दिसंबर 2025 की घटना में साहस दिखाने के लिए सम्मानित किया गया।
यह घटना जीआईसी यूपीएस हरिशंकर, चमोली की है। सुबह करीब 9:30 बजे एक भालू विद्यालय परिसर में घुस आया और उसने कक्षा छह में पढ़ने वाले आरव सिंह पर हमला कर दिया।
इस दौरान आरव ने खुद को बचाने के लिए संघर्ष किया। कक्षा आठ की छात्रा दिव्या ने भालू का पीछा कर आरव को बचाने की कोशिश की और उसे सुरक्षित विद्यालय तक पहुंचाने में मदद की।
वहीं दीपिका ने तत्काल सूझबूझ दिखाते हुए नौ अन्य विद्यार्थियों को कक्षा सात के कमरे में पहुंचाया और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद की।
तीनों बच्चों के साहस और तत्परता को देखते हुए उन्हें राज्य बाल वीरता पुरस्कार के लिए चुना गया।
🌊 चम्पावत: उफनती नदी में कूदकर बच्ची को बचाया
चम्पावत की माया को एक बालिका की जान बचाने के लिए सम्मानित किया गया।
5 अगस्त 2025 को भारी बारिश के चलते नदी का जलस्तर काफी बढ़ गया था। इसी दौरान एक बालिका तेज बहाव में बहने लगी।
माया ने अपनी जान की परवाह किए बिना उसे बचाने का प्रयास किया और नदी के तेज बहाव से सुरक्षित बाहर निकाला। इस घटना में माया खुद भी घायल हो गई थीं।
उनकी बहादुरी और साहसिक प्रयास को राज्य सरकार ने सम्मानित किया।
⛈️ देहरादून: बादल फटने के दौरान आराध्या ने बचाई 17 लोगों की जान
देहरादून की आराध्या ने 2 जून 2026 की शाम भारी बारिश के बीच असाधारण सतर्कता दिखाई।
बारिश के कारण अचानक मलबा और पानी आने की स्थिति बन गई थी। खतरे को भांपते हुए आराध्या ने घर में मौजूद सभी 17 लोगों को तुरंत सतर्क कर दिया, जिससे वे समय रहते सुरक्षित स्थान पर पहुंच सके।
इतना ही नहीं, उन्होंने तीन साल की एक छोटी बच्ची को भी पानी के तेज बहाव से बचाया।
आराध्या की सूझबूझ और समय पर उठाए गए कदमों के लिए उन्हें मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार दिया गया।
🚗 टिहरी: श्वेता ने बुजुर्ग को तेज रफ्तार वाहन से बचाया
टिहरी गढ़वाल की श्वेता ने भी अपनी तत्परता से एक बुजुर्ग व्यक्ति की जान बचाई।
30 जनवरी 2025 को एक बुजुर्ग व्यक्ति सड़क पर लाठी के सहारे चल रहे थे। इसी दौरान सामने से एक वाहन तेजी से उनकी ओर आ रहा था।
खतरे को देखते हुए श्वेता ने तुरंत बुजुर्ग का हाथ पकड़ा और उन्हें सड़क के किनारे सुरक्षित पहुंचा दिया।
उनकी इस त्वरित कार्रवाई से बुजुर्ग व्यक्ति की जान बच गई।
🇮🇳 बच्चों के साहस को पहचान देने की पहल
मुख्यमंत्री राज्य बाल वीरता पुरस्कार का उद्देश्य उन बच्चों को पहचान और प्रोत्साहन देना है, जिन्होंने मुश्किल परिस्थितियों में असाधारण हिम्मत, समझदारी और जिम्मेदारी का परिचय दिया है।
इस पहल के जरिए ऐसे बच्चों के साहसिक कार्यों को सार्वजनिक पहचान देने के साथ अन्य बच्चों को भी विपरीत परिस्थितियों में सूझबूझ और संवेदनशीलता से काम लेने के लिए प्रेरित करने का प्रयास किया जा रहा है।









