देवभूमि में न्याय की नई पहल: ‘राजस्व लोक अदालत’ से घर-घर पहुंचेगा न्याय ⚖️🏔️

देहरादून, 28 मार्च 2026 — उत्तराखंड की वादियों में अब न्याय की गूंज और तेज़ होने वाली है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पूरे प्रदेश में ‘राजस्व लोक अदालत’ का शुभारम्भ कर एक ऐसी पहल की शुरुआत की है, जो सीधे आम आदमी की ज़िंदगी से जुड़ी है।

यह सिर्फ एक सरकारी कार्यक्रम नहीं, बल्कि उन हजारों परिवारों के लिए राहत की किरण है, जो सालों से जमीन से जुड़े विवादों में उलझे हुए थे।


⚖️ ‘न्याय आपके द्वार’—अब सच में हकीकत

मुख्यमंत्री धामी ने साफ कहा कि सरकार का मकसद सिर्फ फैसले देना नहीं, बल्कि समय पर और सुलभ न्याय देना है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “सबका साथ, सबका विकास” के मंत्र को आगे बढ़ाते हुए इस पहल को आम जनता तक न्याय पहुंचाने का बड़ा कदम बताया।


🌾 जमीन के विवाद अब नहीं बनेंगे बोझ

धामी ने भावुक अंदाज़ में कहा कि राजस्व विवाद सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं होते—
इनके पीछे किसानों की जमीन, परिवारों की रोजी-रोटी और सम्मान जुड़ा होता है।

प्रदेश में इस वक्त:

  • 400+ राजस्व न्यायालय
  • 50,000 से ज्यादा लंबित मामले

ऐसे में ‘राजस्व लोक अदालत’ इन मामलों को तेजी और संवेदनशीलता से निपटाने का बड़ा जरिया बनेगी।


📍 13 जिलों में एक साथ सुनवाई, 6900+ मामलों का निस्तारण

इस अभियान के तहत:

  • 13 जिलों में 210 स्थानों पर एक साथ आयोजन
  • करीब 6,933 मामलों का त्वरित निस्तारण

सिर्फ भूमि विवाद ही नहीं, बल्कि आबकारी, स्टाम्प, बिजली, वरिष्ठ नागरिक और रेंट कंट्रोल जैसे कई मामलों का भी समाधान होगा।


💻 घर बैठे दर्ज होंगे केस—डिजिटल सिस्टम लॉन्च

सरकार ने ‘Revenue Court Case Management System’ पोर्टल भी लॉन्च किया है, जिससे अब लोग घर बैठे अपने केस दर्ज कर सकेंगे

यह कदम ‘Digital India’ की दिशा में बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जहां तकनीक के जरिए न्याय और भी आसान होगा।


⏱️ सख्त निर्देश: एक महीने में निपटें विवाद

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए:

  • अविवादित विरासत के मामलों में तय समय में नामांतरण
  • तेहरवीं तक नई खतौनी देने का सुझाव
  • भूमि पैमाइश और कब्जे से जुड़े विवाद एक महीने में खत्म करने का लक्ष्य

मुख्य सचिव आनंद बर्धन ने भी जिलाधिकारियों को बैकलॉग खत्म करने के लिए युद्ध स्तर पर काम करने के निर्देश दिए।


🧭 पारदर्शिता और संवेदनशीलता—नई न्याय व्यवस्था की पहचान

इस पूरी पहल की खास बात है:

  • हर पक्ष को सुनने की प्रक्रिया
  • पारदर्शिता और निष्पक्षता
  • तकनीक और नवाचार का इस्तेमाल

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार “विकल्प रहित संकल्प” के साथ हर नागरिक को समयबद्ध न्याय देने के लिए प्रतिबद्ध है।